नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कर्नाटक मर्हिष वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम और मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) में ‘घोटालों’ में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की संलिप्तता का दावा करते हुए सोमवार को उनके इस्तीफे की मांग की. केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि सिद्धरमैया को मामले में निष्पक्ष जांच के लिए तत्काल इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि उनके पास राज्य का वित्त विभाग भी है और वह दोनों निगमों में उनके इशारे पर हुई वित्तीय अनियमितताओं को ‘रफा-दफा’ करने की कोशिश कर रहे हैं.
करंदलाजे ने आरोप लगाया, ” उन्होंने (सिद्धरमैया) न केवल वाल्मीकि विकास निगम से, बल्कि राज्य के हर निगम से पैसा लिया है. इसकी जांच होनी चाहिए. सिद्धरमैया के कहने पर वाल्मीकि विकास निगम से हैदराबाद को 187 करोड़ रुपये अवैध रूप से अंतरित किए गए. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और गरीबों के धन का इस्तेमाल तेलंगाना विधानसभा चुनाव के लिए किया गया.” उन्होंने कहा, ”वह एमयूडीए भूमि घोटाले में भी शामिल हैं. सिद्धरमैया की पत्नी को 50-50 के अनुपात वाली योजना के तहत भूखंड आवंटित किए गए और वह घोटालों को दबाने और रफा-दफा करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्हें तत्काल इस्तीफा देना चाहिए, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके.” केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि कर्नाटक ‘कांग्रेस और उसके आलाकमान के लिए एटीएम’ बन गया है.
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने चुनाव के दौरान राज्य के लोगों को जो गारंटी दी थी, उसके क्रियान्वयन के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति उप योजना निधि का इस्तेमाल किया जा रहा है. राज्य सरकार संचालित कर्नाटक मर्हिष वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड से जुड़ा कथित अवैध धन अंतरण घोटाला, तब प्रकाश में आया जब इसके लेखा अधीक्षक चंद्रशेखरन पी ने 26 मई को आत्महत्या कर ली और सुसाइड नोट में कथित भ्रष्टाचार का उल्लेख किया.
सुसाइड नोट में निगम के बैंक खाते से 187 करोड़ रुपये के अनधिकृत अंतरण का आरोप लगाया गया है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने यह भी दावा किया कि कुल राशि में से 88.62 करोड़ रुपये ‘जानी-मानी’ आईटी कंपनियों और हैदराबाद स्थित एक सहकारी बैंक समेत अन्य के विभिन्न खातों में अंतरित किए गए.
घोटाले के संबंध में अपने खिलाफ आरोपों के बाद अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री बी नागेंद्र ने छह जून को अपना इस्तीफा दे दिया था. वह फिलहाल ईडी की हिरासत में हैं. एमयूडीए मामला प्राधिकरण द्वारा भूमि खोने वालों को भूखंडों के फर्जी आवंटन से जुड़ा है, जिसमें सिद्धरमैया की पत्नी पार्वती को दिए गए भूखंड शामिल हैं.
एमयूडीए ने पार्वती को उनकी 3.16 एकड़ जमीन के बदले 50:50 अनुपात योजना के तहत भूखंड आवंटित किए थे, जहां एमयूडीए ने एक आवासीय ‘लेआउट’ विकसित किया था. विवादास्पद योजना में लेआउट बनाने के लिए अधिग्रहीत अविकसित भूमि के बदले भूमि खोने वालों को विकसित भूमि का 50 प्रतिशत आवंटित करने की परिकल्पना की गई है. भाजपा की प्रदेश इकाई और जनता दल (सेक्युलर) ने इन दोनों मामलों में सिद्धरमैया के इस्तीफे और सीबीआई जांच की मांग की है.