मुंबई. शिवसेना नेता संजय निरूपम ने मंगलवार को कहा कि राजनीति उत्तराखंड की ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का कार्यक्षेत्र नहीं है और उन्हें इस मुद्दे पर बयान देने से बचना चाहिए. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को शिवसेना (यूबीटी) के नेता उद्धव ठाकरे से मुलाकात की थी और कहा था कि ठाकरे विश्वासघात का शिकार हुए हैं. इसके बाद निरूपम का बयान आया है.
निरूपम ने यहां संवाददाताओं से कहा, ”मैं शंकराचार्य से कहना चाहता हूं कि वह धर्म और अध्यात्म पर बोलें और हमारा मार्गदर्शन करें. आप हमारे धार्मिक गुरु हैं. लेकिन राजनीति पर नहीं बोलिए. यह उनका कार्यक्षेत्र नहीं है.” ठाकरे से मुंबई के बांद्रा स्थित उनके आवास ‘मातोश्री’ में मुलाकात के बाद संवाददाताओं से बातचीत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, ”उद्धव ठाकरे के साथ विश्वासघात हुआ है और कई लोग इससे आक्रोशित हैं. मैं उनके आग्रह पर उनसे मिला और कहा कि जनता को हुई पीड़ा उनके दोबारा मुख्यमंत्री बनने तक कम नहीं होगी.” अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस साल जनवरी में अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में जाने से इनकार कर दिया था.
निरूपम ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस और अविभाजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन बनाया था.
पूर्व सांसद ने कहा, ”यह विश्वासघात था. अगर यह विश्वासघात नहीं था तो एक व्यक्ति की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए किया गया राजनीतिक फैसला था.” निरूपम के बयान पर पलटवार करते हुए शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने कहा कि अगर किसी को शंकराचार्य के बयान पर आपत्ति है तो इसका मतलब है कि वह हिंदुत्व को नहीं मानता.