पूजा खेडकर की मां को 20 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेजा गया, हत्या की कोशिश का मामला भी जुड़ा

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Thu, 18 Jul 2024 10:09 PM
पूजा खेडकर की मां को 20 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेजा गया, हत्या की कोशिश का मामला भी जुड़ा
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पुणे. पुणे जिले की पुलिस ने बृहस्पतिवार को यहां की स्थानीय अदालत को बताया कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की प्रशिक्षु अधिकारी पूजा खेडकर की मां मनोरमा खेडकर के खिलाफ भूमि विवाद मामले में दर्ज प्राथमिक में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा-307 (हत्या की कोशिश) जोड़ी गई है. पुलिस ने इसी के साथ अदालत से मनोरमा की पांच दिन की हिरासत भी देने का अनुरोध किया.

पुलिस ने प्राथमिकी में नामजद मनोरमा, उनके पति दिलीप खेडकर और तीन अन्य को ” प्रभावशाली और राजनीति रूप से सक्रिय” बताया. इसके बाद पौड की अदालत ने मनोरमा को 20 जुलाई तक पुलिस की हिरासत में भेज दिया. दरअसल,2023 का एक वीडियो हाल में सामने आया था जिसमें मनोरमा पुणे के मुलशी तहसील के धडवाली गांव में भूमि विवाद को लेकर कुछ लोगों को कथित तौर पर बंदूक दिखाकर धमकाती नजर आ रही थीं. इसके बाद से पुलिस मनोरमा और उनके पति दिलीप खेडकर की तलाश में जुटी थी.

पुणे ग्रामीण में पौड पुलिस ने खेडकर दंपत्ति और पांच अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिनमें 307, 144 (घातक हथियार के साथ अवैध रूप से एकत्र होना), 147 (दंगा) और 506 (आपराधिक धमकी) के अलावा शस्त्र अधिनियम भी शामिल है.

पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक पंकज देशमुख ने इससे पहले बताया था कि मनोरमा को सुबह रायगढ़ जिले के महाड के निकट हिरकणीवाडी गांव में एक लॉज से पकड़ा गया, जहां वह छिपी हुई थी. उन्होंने बताया कि उसे गिरफ्तार करने से पहले पौड पुलिस थाने लाया गया. मनोरमा को बाद में पौड में न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) के समक्ष पेश किया गया.

मनोरमा, उसके पति दिलीप और तीन अन्य पर चार जून 2023 को पुणे के मुलशी तहसील के धाडवाली गांव में भूमि विवाद को लेकर पंढरीनाथ पासलकर (65) को बंदूक दिखाकर धमकाने का आरोप है. अभियोजन ने प्राथमिकी में आईपीसी की धारा 307 जोड़ने को उचित ठहराते हुए अदालत से कहा कि आरोपी ने शिकायतकर्ता के सिर पर बंदूक तान दी थी. पुलिस ने अदालत को बताया कि जब वह बंदूक का घोड़ा दबाने वाली थी, तभी शिकायतकर्ता डर के मारे झुक गया और अन्य आरोपियों ने उसे रोक लिया.

पुलिस ने आरोपी को ”प्रभावशाली और राजनीतिक रूप से सक्रिय” व्यक्ति बताते हुए कहा कि वह हथियार जब्त करना चाहती है और इसके लिए उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करनी होगी. अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि पुलिस मामले में अन्य आरोपियों का पता लगाना चाहती है. पुलिस ने बताया कि मनोरमा के पास पुणे जिले के मुलशी क्षेत्र में कुछ जमीन है और उन्हें यह जांच करनी है कि क्या उसने बंदूक से किसी अन्य व्यक्ति को तो नहीं धमकाया है.

बचाव पक्ष के वकील निखिल मलाणी ने पुलिस हिरासत के लिए अभियोजन पक्ष की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि मनोरमा ने इस मामले में शिकायतकर्ता के खिलाफ मामला दर्ज कराया था. उन्होंने कहा कि उस मामले में आरोपपत्र भी दाखिल किया गया था. मलाणी ने कहा, ”मौजूदा शिकायतकर्ता (अपने खिलाफ दर्ज मामले के कारण) बचाव की मुद्रा में था. लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद, वह आगे आया और अपने मुवक्किल के खिलाफ मामला दर्ज कराया.”

उन्होंने दलील दी कि जब उनके मुवक्किल के खिलाफ पहली बार मामला दर्ज किया गया था, तो प्राथमिकी में सभी धाराएं जमानती थीं, लेकिन पुलिस ने 17 जुलाई को अचानक आईपीसी की धारा 307 (हत्या का प्रयास) जोड़ दी. उन्होंने कहा कि चूंकि यह गैर-जमानती धारा है, इसलिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. मलानी ने अदालत को बताया कि मनोरमा के खिलाफ मामला कथित घटना के 13 महीने बाद दर्ज किया गया.

उन्होंने कहा, ”एफआईआर में धारा 307 (हत्या का प्रयास) के संबंध में कोई वैध आशंका या तर्क नहीं है.” दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने मनोरमा को 20 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया. पूजा खेडकर आईएएस परीक्षा के समय दिए गए दिव्यांगता और ओबीसी प्रमाण पत्र को लेकर सवालों के घेरे में हैं. पुणे कलेक्टर कार्यालय में तैनाती के दौरान किए गए आचरण को लेकर भी उनके खिलाफ जांच की जा रही है.

विवाद के बीच सरकार ने मंगलवार को खेडकर के जिला प्रशिक्षण कार्यक्रम को स्थगित कर दिया और उन्हें 23 जुलाई तक लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में रिपोर्ट करने को कहा गया है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को बताया कि पुणे की भ्रष्टाचार रोधी इकाई को शिकायत मिली है जिसमें पूर्व सरकारी कर्मचारी और पूजा के पिता दिलीप खेडकर के खिलाफ कथित आय से अधिक संपत्ति के मामले में खुली जांच करने का अनुरोध किया गया है. उन्होंने बताया कि एसीबी की नासिक इकाई पहले ही उनके खिलाफ कथित आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच कर रही है. इसलिए पुणे की भ्रष्टाचार रोधी इकाई ने मुख्यालय से नयी शिकायत को भी पूर्व की शिकायत से जोड़ने या नये सिरे से जांच को लेकर व्यवस्था मांगी है.

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