नयी दिल्ली/हैदराबाद/लखनऊ. जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के नेता केसी त्यागी ने बृहस्पतिवार को कहा कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर खाने-पीने की दुकानों पर मालिकों का नाम प्रदर्शित करने के मुजफ्फरनगर पुलिस के आदेश को वापस लिया जाना चाहिए क्योंकि इससे सांप्रदायिक तनाव फैल सकता है. त्यागी ने कहा कि धर्म और जाति के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए.
मुजफ्फरनगर में पुलिस ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर सभी भोजनालयों को उनके मालिकों के नाम प्रदर्शित करने का आदेश दिया है ताकि किसी भी प्रकार का ‘भ्रम’ न हो. राजनेताओं और नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों द्वारा आदेश की आलोचना किये जाने के सवाल पर त्यागी ने कहा कि हिंदू कैलेंडर के सावन महीने के दौरान हिंदुओं द्वारा की जाने वाली ‘कांवड़ यात्रा’ सदियों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों से होकर गुजरती रही है लेकिन सांप्रदायिक तनाव की कोई खबर नहीं आई. जदयू नेता ने कहा कि धर्म के आधार पर इस तरह का भेदभाव गलत है और इससे सांप्रदायिक विभाजन ही बढ़ेगा.
त्यागी ने कहा, “कांवड़ यात्रा सदियों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों से होकर गुजरती रही है लेकिन आज तक सांप्रदायिक तनाव की कोई खबर नहीं आई.” उन्होंने कहा, “हिंदू, मुस्लिम और सिख भी स्टॉल लगाकर कांवड़ियों का स्वागत करते हैं. कांवड़ बनाने में मुस्लिम कारीगर भी शामिल होते हैं… ऐसे आदेश सांप्रदायिक तनाव बढ़ा सकते हैं.” त्यागी ने कहा कि जिला प्रशासन को अपने फैसले की समीक्षा करनी चाहिए और इसे वापस लेना चाहिए. उन्होंने कहा, “पुलिस को जांच करनी चाहिए कि कोई असामाजिक तत्व तो दुकान नहीं चला रहा लेकिन धर्म या जाति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए. इससे समाज में विभाजन बढ़ता है.”
कांवड़ यात्रा मार्ग से संबंधित आदेश पर ओवैसी ने कहा-उप्र सरकार अस्पृश्यता को बढ़ावा दे रही
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित ढाबों को अपने मालिकों के नाम प्रदर्शित करने के लिए जारी किए गए परामर्श को लेकर भाजपा नीत उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना की और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस संबंध में लिखित आदेश जारी करने की चुनौती दी. हैदराबाद के सांसद ने इसे स्पष्ट रूप से ‘भेदभावपूर्ण’ आदेश करार दिया और आरोप लगाया कि यह दर्शाता है कि सरकार उत्तर प्रदेश और पूरे देश में मुसलमानों को ‘दूसरे दर्जे’ का नागरिक बनाना चाहती है.
ओवैसी ने यहां संवाददाताओं से कहा, ”हम इसकी (मौखिक आदेश की) निंदा करते हैं. यह संविधान के अनुच्छेद 17 का उल्लंघन है, जिसमें अस्पृश्यता की बात कही गई है. उत्तर प्रदेश सरकार अस्पृश्यता को बढ़ावा दे रही है. आदेश दिए जाने के बाद से मुजफ्फरनगर में ढाबों के मालिकों ने मुस्लिम कर्मचारियों को हटा दिया है. यह मुसलमानों के साथ स्पष्ट भेदभाव है. संविधान की भावना को ठेस पहुंचाई जा रही है. यह जीवन के अधिकार और आजीविका के अधिकार के खिलाफ है.”
एआईएमआईएम प्रमुख ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनौती दी कि अगर उनमें हिम्मत है तो वह इस पर लिखित आदेश जारी करें. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर मुसलमानों के प्रति नफरत रखने का आरोप लगाते हुए ओवैसी ने दावा किया कि वे लगातार हिंदुत्व की विचारधारा को लागू कर रहे हैं और यह उनकी बड़ी ‘योजना’ का कार्यान्वयन है. उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से हिंदुत्ववादी संगठन मुसलमानों के ‘सामाजिक बहिष्कार’ का आह्वान कर रहे हैं और अब यही उत्तर प्रदेश में हो रहा है.
कांवड़ मार्ग पर भोजनालयों को मालिकों के नाम प्रदर्शित करने के आदेश को अखिलेश-मायावती ने गलत बताया
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को मुजफ्फरनगर पुलिस के उस आदेश को ‘सामाजिक अपराध’ करार दिया जिसके तहत कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित भोजनालयों से उनके मालिकों का नाम प्रदर्शित करने के लिए कहा गया है. उन्होंने अदालतों से मामले का स्वत: संज्ञान लेने का अनुरोध भी किया.
आदेश को लेकर एक अखबार में प्रकाशित खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश ने ‘एक्स’ पर कहा, “…और जिसका नाम गुड्डू, मुन्ना, छोटू या फत्ते है, उसके नाम से क्या पता चलेगा?” उन्होंने कहा, “माननीय न्यायालय स्वत: संज्ञान ले और ऐसे प्रशासन के पीछे के शासन तक की मंशा की जांच करवाकर उचित दंडात्मक कार्रवाई करे. ऐसे आदेश सामाजिक अपराध हैं, जो सौहार्द के शांतिपूर्ण वातावरण को बिगाड़ना चाहते हैं.”
इस घटना पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने ‘एक्स’ पर कहा,”पश्चिमी उप्र व मुजफ्फरनगर जिला के कांवड़ यात्रा मार्ग में पड़ने वाले सभी होटल, ढाबा, ठेला आदि के दुकानदारों को मालिक का पूरा नाम प्रमुखता से प्रदर्शित करने का नया सरकारी आदेश एक गलत परम्परा है जो सौहार्दपूर्ण वातावरण को बिगाड़ सकता है. जनहित में सरकार इसे तुरंत वापस ले.”