नयी दिल्ली. भारत ने बांग्लादेश में हिंसक विरोध-प्रदर्शन को शुक्रवार को उस देश का ”आंतरिक” मामला करार दिया.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि 8,000 छात्रों सहित लगभग 15,000 भारतीय वर्तमान में बांग्लादेश में रह रहे हैं और वे सुरक्षित हैं. ढाका और अन्य शहरों में विश्वविद्यालय के छात्र 1971 में पाकिस्तान से देश की आजादी के लिए लड़ने वाले युद्ध नायकों के रिश्तेदारों के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों को आरक्षित करने की प्रणाली के खिलाफ कई दिनों से रैलियां कर रहे हैं. बृहस्पतिवार को आरक्षण प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान राजधानी ढाका तथा अन्य जगहों पर हिंसा भड़कने से करीब 30 लोगों की मौत हो चुकी है तथा 2,500 से अधिक लोग घायल हुए हैं.
जायसवाल ने कहा, ”जैसा कि आप जानते हैं, बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन जारी हैं. हम इसे उस देश का आंतरिक मामला मानते हैं.” प्रवक्ता ने कहा, ”हमने बांग्लादेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों एवं हमारे छात्रों को उनकी सुरक्षा और आवश्यकता पड़ने पर सहायता के लिए एक परामर्श जारी किया है. हमसे संपर्क करने के लिए हेल्पलाइन नंबर चौबीसों घंटे सक्रिय हैं.” जायसवाल ने कहा कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर खुद इस मामले पर करीब से नजर रख रहे हैं.
उन्होंने कहा, ”हमारा उच्चायोग (हालात पर) नियमित रूप से अद्यतन जानकारी प्रदान करेगा. मैं भी नियमित रूप से अद्यतन जानकारी साझा करूंगा. मैं परिवार के सदस्यों से आग्रह करता हूं कि वे नवीनतम जानकारी के लिए हमारे द्वारा साझा जानकारी पर ध्यान दें.” जायसवाल ने कहा, ”हम बांग्लादेश में अपने नागरिकों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.”
म्यांमा के म्यावाडी में फंसे 11 भारतीयों को मुक्त कराया गया : भारतीय दूतावास
म्यांमा के म्यावाडी में ‘स्कैम सेंटर’ में फंसे 11 भारतीयों को म्यांमा के अधिकारियों और स्थानीय सहायता की मदद से शुक्रवार को मुक्त करा लिया गया. म्यांमा स्थित भारतीय दूतावास ने यह जानकारी दी. दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में यह जानकारी दी और साथ ही मुक्त कराए गए लोगों की तस्वीरें भी साझा कीं.
दूतावास ने यह भी कहा कि वह मुक्त कराए गए भारतीयों की स्वदेश वापसी पर काम कर रहा है. दूतावास ने एक पोस्ट में कहा, ” म्यांमा के म्यावाडी स्थित श्वे को को ‘स्कैम सेंटर’ में फंसे 11 भारतीय पीड़ितों को आज म्यांमा के अधिकारियों और स्थानीय सहायता से मुक्त करा लिया गया है. हम उन्हें भारत वापस भेजने पर काम कर रहे हैं.”