कांग्रेस, भाजपा ने विधायक मुकेश से इस्तीफा मांगा, अभिनेता ने आरोपों को राजनीतिक नाटक बताया

सुरेश गोपी अपने विचार रखने के हकदार, पार्टी चाहती है मुकेश इस्तीफा दें : भाजपा नेता

तिरुवनंतपुरम/कोच्चि/त्रिशूर. कांग्रेस और भाजपा ने मंगलवार को विधायक पद से अभिनेता-राजनेता एम. मुकेश के इस्तीफे की मांग तेज कर दी. यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे माकपा विधायक ने इसे “वही राजनीतिक नाटक करार दिया, जिसका मंचन 2018 में किया गया था.” मुकेश ने कहा कि आरोपों के पीछे की सच्चाई को उजागर करने के लिए उचित और पारदर्शी जांच आवश्यक है. उन्होंने दावा किया कि एक समूह पैसे के लिए उन्हें ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा है और वे ही आरोप लगा रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

इससे पहले, राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीसन और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने कहा कि मुकेश को विधायक पद से इस्तीफा दे देना चाहिए. सतीसन ने कहा कि यह मुकेश और उनकी पार्टी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) पर निर्भर है कि वह फैसला करें कि उन्हें इस्तीफा देना चाहिए या नहीं, और उम्मीद है कि वे उचित निर्णय लेंगे. विपक्षी नेता ने कहा, “मुकेश पर कई आरोप लगाए गए हैं और केरल का समाज उत्सुकता से देख रहा है कि वह और उनकी पार्टी इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है.” उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार ने “असली दोषियों” के खिलाफ कार्रवाई की होती तो फिल्म उद्योग में निर्दोष लोगों पर हमला नहीं होता.

सुरेंद्रन ने माकपा और राज्य सरकार पर मुकेश को बचाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “अगर निर्देशक रंजीत और अभिनेता सिद्दीकी इस्तीफा दे सकते हैं, तो मुकेश क्यों नहीं?” एक बयान में केरल प्रदेश कांग्रेस समिति (केपीसीसी) ने राज्य सरकार पर न्यायमूर्ति हेमा समिति की रिपोर्ट के आधार पर कोई कार्रवाई न करके कुछ लोगों को बचाने का प्रयास करने का आरोप लगाया.
केपीसीसी महासचिव एम लीजू ने कहा कि पार्टी प्रदेश सरकार के महिला विरोधी रुख के खिलाफ प्रदेशव्यापी प्रदर्शन करेगी. उन्होंने कहा कि इस दौरान राज्य के संस्कृति मंत्री साजी चेरियन के इस्तीफे की भी मांग की जाएगी तथा यौन उत्पीड़न के आरोपों के संबंध में केरल के परिवहन मंत्री के बी गणेश कुमार की भूमिका की जांच की मांग भी की जाएगी.

मुकेश ने अपने जवाब में कहा कि उनके खिलाफ आरोप लगाने वाली महिला ने पहली बार 2009 में उनसे फिल्मों में काम करने का मौका मांगा था. उन्होंने दावा किया, “मैंने हमेशा की तरह जवाब दिया कि मैं कोशिश करूंगा. बाद में जब वह मुझसे व्यक्तिगत रूप से मिली थीं, तो उन्होंने मेरे व्यवहार की प्रशंसा करते हुए मुझे व्हाट्सएप पर संदेश भेजे.” मुकेश ने दावा किया कि 2022 में महिला ने फिर से उनसे फोन पर संपर्क किया और उनसे बड़ी वित्तीय सहायता की मांग की. माकपा विधायक ने आगे कहा कि बाद में, खुद को उनका पति बताने वाले एक व्यक्ति ने भी फोन पर उनसे पैसे की मांग की थी.

उन्होंने कहा, “जो समूह मुझे पैसों के लिए ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा था, अब मौका मिलते ही वह मेरे खिलाफ हो गया है.” इस बीच, केरल पुलिस ने कहा कि हालिया आरोपों के आधार पर दर्ज मामले फिल्म उद्योग में महिलाओं द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए गठित विशेष टीम को सौंप दिए जाएंगे.

सुरेश गोपी अपने विचार रखने के हकदार, पार्टी चाहती है मुकेश इस्तीफा दें : भाजपा नेता

अभिनेताओं और निर्देशकों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के हालिया आरोपों के संबंध में मीडिया पर फिल्म उद्योग के बारे में जनता को गुमराह करने का आरोप लगाने वाली केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी की टिप्पणी को लेकर मंगलवार को विवाद खड़ा हो गया. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केरल इकाई के नेता उनके रुख से असहमत हैं.

त्रिशूर में अभिनेता और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के विधायक एम मुकेश पर लगे आरोपों के बारे में पूछे जाने पर गोपी ने पत्रकारों से कहा कि यह मामला अदालत में विचाराधीन है और वह इस पर फैसला लेगी. उन्होंने कहा, ”आप (मीडिया) न केवल अपने फायदे के लिए लोगों को एक-दूसरे से लड़वा रहे हैं, बल्कि जनता को भी गुमराह कर रहे हैं. शिकायतें फिलहाल आरोपों की शक्ल में हैं. आप लोगों को क्या बता रहे हैं? क्या आप अदालत हैं? नहीं, आप नहीं हैं. अदालत फैसला करेगी. अदालत को फैसला करने दीजिए.” इसके बाद, भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने कहा कि एक अभिनेता और मंत्री के रूप में गोपी अपनी निजी राय व्यक्त करने के हकदार हैं, लेकिन पार्टी का रुख यह है कि मुकेश को इस्तीफा दे देना चाहिए.

तिरुवनंतपुरम में पत्रकारों से मुखातिब सुरेंद्रन ने कहा, ”पार्टी का रुख वही होता है, जो पार्टी नेतृत्व तय करता है.” टीवी चैनल पर प्रसारित दृश्यों के अनुसार, जब पत्रकारों ने सुरेंद्रन के बयान पर गोपी की टिप्पणी लेनी चाही, तो उन्होंने गुस्से में उनमें से कुछ को धक्का दे दिया. दृश्यों के मुताबिक, जब गोपी अपने आधिकारिक वाहन में बैठने की कोशिश कर रहे थे, तब कुछ पत्रकार उनके पास पहुंचे, जिसके बाद उन्होंने उन्हें यह कहते हुए धक्का दे दिया, ”यह क्या है? कहीं भी जाना मेरा अधिकार है. कृपया हटिए.” इसके बाद वह कार के अंदर बैठ गए और पत्रकारों के किसी भी सवाल का जवाब दिए बिना चले गए.

इससे पहले, गोपी ने आरोपों को मीडिया के लिए ”भोजन” करार दिया था और कहा था कि इससे पैसा कमाने के लिए उनका स्वागत है.
हालांकि, केंद्रीय पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस एवं पर्यटन राज्य मंत्री ने कहा कि उन्हें सिनेमा जैसे इतने बड़े उद्योग को तबाह करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.

गोपी ने कहा था, ”यह सब आपके लिए भोजन की तरह है, ऐसा मैं समझता हूं. आप इसका उपयोग पैसे कमाने के लिए कर सकते हैं. इससे कोई समस्या नहीं है. लेकिन ये मुद्दे अदालत के समक्ष विचाराधीन हैं और उसके पास इनके संबंध में निर्णय पर पहुंचने के लिए बुद्धिमत्ता और तर्क शक्ति है.”

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