आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने हिंसक आंदोलन की निरर्थकता उजागर की

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 15 Dec 2024 07:02 PM
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने हिंसक आंदोलन की निरर्थकता उजागर की
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जगदलपुर. छत्तीसगढ़ के दूरदराज के इलाकों में गरीब परिवारों से ताल्लुक रखने वाले आदिवासी जॉयमती वंजन और शंकर मार्कडे की जिंदगी एक जैसी रही है, दोनों आठवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़कर दुर्दांत नक्सली बन गए, जिनपर 5-5 लाख रुपये का ईनाम घोषित किया गया.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की पूर्व सदस्य वंजन कथित तौर पर सुरक्षा बलों के खिलाफ कई हमलों में शामिल थी. मार्कडे भी ऐसे कई हमलों में शामिल था और कथित तौर पर उस समूह का हिस्सा था जिसने कुछ साल पहले छत्तीसगढ़ में एक प्रमुख निजी कंपनी समूह के संयंत्र को नष्ट कर दिया था. दोनों, हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करने के बाद मुख्यधारा में लौट आए हैं और अब सामान्य जीवन जी रहे हैं.

वंजन ने एक कार्यक्रम में ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”मैं सुरक्षा बलों पर हुए कई हमलों में शामिल थी. मुझे यह पसंद नहीं था लेकिन मुझे इसमें शामिल होने के लिए मजबूर किया गया. अन्यथा, मैं खुद नक्सलियों की क्रूरता का शिकार बन जाती.” इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उससे बातचीत की. वंजन ने कहा कि उसे सशस्त्र संघर्ष की निरर्थकता का एहसास हुआ और उसने हथियार डालने का फैसला किया. आत्मसमर्पण के बाद, बीजापुर जिले की रहने वाली वंजन को छत्तीसगढ़ पुलिस में कांस्टेबल के पद पर भर्ती किया गया.

उसने कहा, “मैं एक सामान्य जीवन जी रही हूं, लेकिन मैं अपने गांव वापस नहीं जा सकती क्योंकि इस बात की पूरी संभावना है कि मेरे पूर्व सहकर्मी मुझे निशाना बना सकते हैं.” वहीं, मार्कडे ने कहा कि नक्सली के रूप में जीवन कठिन था. वह 2000 के दशक की शुरुआत में, अपनी किशोरावस्था में भाकपा (माओवादी) में शामिल हुआ था.

उसने कहा, “मैं नक्सलियों द्वारा किए जाने वाले खून-खराबे और बेवजह की जाने वाली हत्याओं से तंग आ चुका था. मैं एक सामान्य जीवन जीना चाहता था और इसलिए मैंने आत्मसमर्पण करने का फैसला किया.” पड़ोसी राज्य ओडिशा के मलकानगिरी की रहने वाली सुकांति मारी 2003 में माओवादियों की गतिविधियों में शामिल हुई थी और 2016 में उसने हथियार डाल दिए.

उसने कहा, “मुझे इंसास और एसएलआर राइफल समेत विभिन्न प्रकार के हथियारों को चलाने का प्रशिक्षण दिया गया था. मैं शीर्ष नक्सली नेता भास्कर की पत्नी की अंगरक्षक थी.” मारी ने बताया कि उसने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया, क्योंकि उसका पति भी नक्सली था और पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था.

आत्मसमर्पण करने वाली एक अन्य माओवादी सुशीला ने बताया कि उसके परिवार को नक्सलियों ने चेतावनी दी थी कि अगर कम से कम एक सदस्य उनके साथ नहीं जुड़ा तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. उसने कहा, ”मेरे पास कोई विकल्प नहीं था. लेकिन जब मुझे आत्मसमर्पण करने का मौका मिला, तो मैंने उन्हें छोड़ दिया और शांतिपूर्ण जीवन जीने के लिए वापस आ गई.”

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