मैनपुरी. मैनपुरी जिले की एक विशेष अदालत ने 1981 के देहुली जनसंहार मामले में तीन लोगों को मंगलवार को मौत की सजा सुनाई.
सरकारी वकील रोहित शुक्ला ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि 18 नवंबर 1981 को हुई जनसंहार की इस घटना में छह महीने और दो साल की उम्र के दो बच्चों समेत 24 दलितों की डकैतों के एक गिरोह ने हत्या कर दी थी. उन्होंने बताया कि विशेष न्यायाधीश इंदिरा सिंह ने मामले में कप्तान सिंह (60), रामपाल (60) और राम सेवक (70) को दोषी ठहराते हुए उन्हें मौत की सजा सुनाई. अदालत ने दोषियों पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया.
शुक्ला ने बताया कि 18 नवंबर 1981 की शाम पुलिस की वर्दी पहने 17 डकैतों के एक गिरोह ने मैनपुरी के देहुली में 24 दलितों की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस त्रासद घटना के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की थी. इसके अलावा विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने फिरोजाबाद में दिहुली से सदुपुर तक पद यात्रा कर शोक संतप्त परिवारों के प्रति एकजुटता व्यक्त की थी.
दर्ज मुकदमे में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास) और 396 (हत्या के साथ डकैती) के तहत 17 आरोपियों के नाम थे. चार दशकों से अधिक समय तक चले मुकदमे की प्रक्रिया के दौरान उनमें से 13 आरोपियों की मौत हो गई.
शुक्ला के अनुसार यह नरसंहार 18 नवंबर 1981 को जसराना थानाक्षेत्र के दिहुली गांव में हुआ था, जब संतोष सिंह उर्फ ??संतोषा और राधेश्याम उर्फ ??राधे के नेतृत्व में डकैतों के एक गिरोह ने दलित समुदाय पर अंधाधुंध गोलीबारी की थी. इस घटना में महिलाओं और बच्चों समेत 24 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी. इसके अलावा 12 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे.
शुक्ला ने बताया कि वारदात के अगले दिन दिहुली निवासी लायक सिंह ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कराया था और विस्तृत जांच के बाद संतोष और राधे समेत 17 डकैतों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था. शुरू में मामले की सुनवाई मैनपुरी के विशेष न्यायाधीश (डकैती प्रभावित क्षेत्र –डीएए) की अदालत में शुरू हुई थी, लेकिन बाद में इसे इलाहाबाद के सत्र न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया था.
शुक्ला ने बताया कि फिर, दिसंबर 2024 में मामले का फैसला करने के लिए इलाहाबाद के सत्र न्यायालय से मुकदमे के रिकॉर्ड वापस विशेष न्यायाधीश (डीएए) इंदिरा सिंह की अदालत में भेजे गए. मुकदमे की सुनवाई के दौरान संतोष और राधे समेत 17 विचाराधीन आरोपियों में से 13 की मौत हो गई, जबकि एक आरोपी का पता नहीं चल सका कि वह जीवित है या नहीं. देवली वर्तमान में फिरोजाबाद जिले में है. घटना के वक्त फिरोजाबाद मैनपुरी का ही हिस्सा हुआ करता था.