छत्तीसगढ़ एवं झारखंड में नक्सलियों एवं आईईडी विस्फोटों का खतरा बढ़ने पर अलर्ट जारी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 23 Mar 2025 08:55 PM
छत्तीसगढ़ एवं झारखंड में नक्सलियों एवं आईईडी विस्फोटों का खतरा बढ़ने पर अलर्ट जारी
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नयी दिल्ली/रायपुर/रांची. छत्तीसगढ़ और झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के प्रमुख क्षेत्रों में आईईडी विस्फोटों और हथियारों के बरामद होने के मामलों में ”वृद्धि” के बाद अलर्ट जारी किया गया है. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि आईईडी बरामद होने और विस्फोटों के मामलों में ऐसे समय में वृद्धि देखी गई है जब मार्च 2026 तक देश से वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) को खत्म करने के केंद्र सरकार के लक्ष्य को पूरा करने के लिए नक्सलियों के क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के अभियानों में तेजी आई है.

सुरक्षा प्रतिष्ठान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सुरक्षा बल खासकर छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के सुदूर जिलों में नए शिविर स्थापित कर रहे हैं. माओवादी अब आमने-सामने की मुठभेड़ों में शामिल नहीं होते क्योंकि उनके पास हथियार एवं गोला-बारूद की कमी है इसलिए वे सैनिकों को मारने या उन्हें घायल करने के लिए आईईडी का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं.” अधिकारी ने बताया कि आईईडी संबंधी घटनाओं के विश्लेषण के दौरान इनकी संख्या में ”काफी” वृद्धि देखने को मिली है और इसलिए टीसीओसी अवधि करीब आने के बीच सुरक्षा बलों के लिए ‘हाई अलर्ट’ जारी किया गया है.

माओवादी र्गिमयों के महीनों में सुरक्षा बलों के खिलाफ हमले करने के लिए सामरिक जवाबी आक्रामक अभियान (टीसीओसी) चलाते हैं, क्योंकि इस दौरान जंगल सूख जाते हैं और पेड़ों से पत्ते गिर जाते हैं जिससे सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर दूर तक नजर रखी जा सकती है.

विश्लेषण रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020-22 के दौरान नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के शिविर के तीन से सात किलोमीटर के दायरे में आईईडी लगाए थे लेकिन अब (2023-24) सीआरपीएफ या अन्य बलों के शिविरों के तीन किलोमीटर से भी कम के दायरे में इन्हें लगाया जा रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020-2021 की तुलना में 2022-24 के दौरान इन घटनाओं में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

एफओबी छोटी लेकिन सीआरपीएफ जवानों की मजबूत टुकड़ी होती है, जो नक्सलियों की आपूर्ति लाइन काटने का कार्य करती है. साथ ही प्रभावित इलाकों में न केवल अभियान चलाती है बल्कि स्थानीय लोगों से संवाद भी करती है. केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) द्वारा पिछले सप्ताह छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से पांच किलोग्राम का प्रेशर कुकर आईईडी बरामद किए जाने के बाद नक्सल विरोधी अभियान ग्रिड विशेष रूप से “चिंतित” है.

अधिकारियों ने बताया कि इस आरसीआईईडी (रिमोट कंट्रोल आईईडी) में दो खाली बीयर की बोतलें लगाई गई थीं, ताकि सैनिकों को कांच के टुकड़ों से गंभीर चोटें पहुंचाई जा सकें. इसके साथ ही पास के एक पेड़ के नीचे एक छोटा एंटीना भी रखा गया था, जो तार से जुड़ा था और इसमें दूर से ही विस्फोट किया जा सकता था.

उन्होंने बताया कि सीआरपीएफ के आईईडी रोधी दल ने इस आईईडी को नि्क्रिरय कर दिया. सीआरपीएफ ने इस तरह का पहला आरसीआईईडी जनवरी में बीजापुर जिले में एक पुल के नीचे से बरामद किया था. यह जमीन के नीचे छिपाकर रखा गया 50 किलोग्राम का आरसीआईईडी था. अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के ‘स्मार्ट आईईडी’ का इस्तेमाल बढ़ने की आशंका है.

आरसीआईईडी को ‘प्रेशर ट्रिगर’ (पैर रखने से) या ‘कमांड’ (दो तारों को जोड़कर होने वाले) आईईडी विस्फोटों की तुलना में घातक माना जाता है क्योंकि नक्सली इनमें दूरी से विस्फोट कर सकते हैं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2024 में छत्तीसगढ़ में 78 बड़े आईईडी विस्फोट हुए और हथियार बरामद किए गए. इन विस्फोटों में आठ सुरक्षाकर्मी मारे गए. अधिकारियों ने कहा कि राज्य में आईईडी संबंधी ये घटनाएं मार्च के मध्य तक 100 को पार कर गई हैं जिससे ऐसे समय में नक्सलियों के बढ़ते खतरे का पता चलता है जब सुरक्षा बल मार्च 2026 की समय सीमा के बीच अभियान चला रहे हैं. पिछले एक वर्ष में दोनों राज्यों में सुरक्षा बलों ने 70 से अधिक एफओबी स्थापित किए हैं जिनमें से अधिकतम सीआरपीएफ द्वारा बनाए गए हैं. सीआरपीएफ नक्सल विरोधी अभियान चलाने वाला अग्रणी बल है.

नक्सली हताश हो चुके हैं क्योंकि उनके खिलाफ अभियान तेज. हो रहा है: झारखंड के मुख्यमंत्री
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रविवार को कहा कि राज्य में सुरक्षा बलों के अभियान तेज होने से नक्सली हताश हो गए हैं. सोरेन और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने पश्चिमी सिंहभूम जिले में आईईडी विस्फोट में शहीद हो गये केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के एक जवान के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की.

यहां सीआरपीएफ की 133वीं बटालियन मुख्यालय में इन शहीद जवान को श्रद्धांजलि देने के लिए पुष्पांजलि समारोह आयोजित किया गया था. सोरेन ने पत्रकारो से कहा, ”सीआरपीएफ जवान का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा. नक्सली हताश हो चुके हैं क्योंकि उनके खिलाफ अभियान तेज हो रहा है… यह अभियान जारी रहेगा.” पुलिस के अनुसार, पश्चिमी सिंहभूम जिले में छोटानागरा थानाक्षेत्र के वानग्राम मरंगपोंगा जंगल में शनिवार को नक्सल विरोधी अभियान के दौरान आईईडी विस्फोट में सीआरपीएफ की 193 वीं बटालियन के उप-निरीक्षक सुनील कुमार मंडल और एक अन्य जवान पार्थ प्रतिम घायल हो गए थे. दोनों को इलाज के लिए हवाई मार्ग से रांची लाया गया जहां उपनिरीक्षक मंडल ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.

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