पुलिसकर्मियों को आहत करने का कोई इरादा नहीं था: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 10 Apr 2025 07:40 PM
पुलिसकर्मियों को आहत करने का कोई इरादा नहीं था: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता
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नयी दिल्ली. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ”ठुल्ला” वाले अपने बयान को लेकर कहा है कि उनका इरादा पुलिसर्किमयों को नीचा दिखाने या उनका अपमान करने का नहीं था. उन्होंने कहा कि वह पुलिसर्किमयों का बहुत सम्मान करती हैं. बुधवार शाम को ‘पीटीआई’ के साथ एक विशेष साक्षात्कार में 50 वर्षीय मुख्यमंत्री ने अतीत में विपक्षी नेताओं के खिलाफ की गई विवादित टिप्पणियों को उनकी परिपक्वता की कमी का परिणाम बताया और कहा कि उन्हें अपनी गलतियों को स्वीकार करने में कोई आपत्ति नहीं है.

मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा, ”विभिन्न मंचों पर मुझसे गलतियां हुई हैं. उदाहरण के लिए, दिल्ली विधानसभा में अपने भाषण के दौरान मैंने एक घटना का जिक्र करते हुए ‘ठुल्ला’ शब्द का इस्तेमाल किया था. मेरा इरादा पुलिसर्किमयों या जवानों को आहत करने का नहीं था. मेरे मन में उनके लिए बहुत सम्मान है.” मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मी राष्ट्र की सेवा में 24 घंटे काम करते हैं. उन्होंने कहा कि वह यह शब्दों में बयां नहीं कर सकतीं कि पुलिसर्किमयों के प्रति उनके मन में कितना सम्मान है, जो दिन-रात, भोजन, नींद और अपने परिवार की चिंता किए बिना एक फोन कॉल पर उपलब्ध रहते हैं और ”हम उनसे अपना कर्तव्य निभाने की उम्मीद करते हैं.” विपक्षी आम आदमी पार्टी (आप) ने 28 मार्च को विधानसभा में गुप्ता की टिप्पणी की कड़ी आलोचना की, जिसे उसने पुलिसर्किमयों का अपमान बताया है.

मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा, ”कभी-कभी हम बिना किसी इरादे के कुछ गलतियां कर देते हैं. जब आपको कुछ समय बाद एहसास होता है कि आपने गलती की है, तो आपको हमेशा याद रखना चाहिए कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होनी चाहिए… मुझे अपनी गलतियों को स्वीकार करने में कोई आपत्ति नहीं है.” भाजपा नेता गुप्ता पहली बार विधायक बनी हैं. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 27 साल बाद दिल्ली में सरकार बनाई हैं. भाजपा ने अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी को हराया जिसने राष्ट्रीय राजधानी पर 10 वर्ष तक शासन किया था.

मेरी सफलता का श्रेय मेरे पति को, मुख्यमंत्री बनने के बाद परिवार के लिए समय कम हुआ: रेखा गुप्ता
कहते हैं, हर सफल आदमी के पीछे एक महिला का हाथ होता है. लेकिन दिल्ली की नयी मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि इसका उल्टा भी सच हो सकता है. बुधवार शाम ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में रेखा ने कहा कि उनके करियर को आकार देने और उनकी सफलता में उनके पति की अहम भूमिका रही है. रेखा को एकमात्र अफसोस यह है कि 20 फरवरी को मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद उन्हें परिवार के साथ बिताने वाले समय में कटौती करनी पड़ी है.

दिल्ली सचिवालय में दिए गए साक्षात्कार में भाजपा शासित राज्यों की एकमात्र महिला मुख्यमंत्री रेखा ने कहा कि वह अपने “बड़े संयुक्त परिवार” की ऋणी हैं, जिसने उनके सियासी करियर में उन्हें “पूर्ण समर्थन” दिया. रेखा ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की सदस्य के रूप में अपने सियासी सफर की शुरुआत की. वह 1995 में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ की सचिव चुनी गईं और 1996 में इसकी अध्यक्ष बनीं. एबीवीपी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की छात्र शाखा है, जिसकी कई विश्वविद्यालयों में मजबूत उपस्थिति है.

लंबे समय तक नगर निगम पार्षद रहीं रेखा ने इस साल शालीमार बाग से चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में दस्तक दी. वह भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और भाजपा की दिल्ली इकाई की महासचिव भी रह चुकी हैं. मुख्यमंत्री बनने के बाद जीवन में आए बदलावों के बारे में रेखा ने कहा कि पहले वह दिल्ली से बाहर पढ़ रही अपनी बेटी और बेटे से रोज बात करती थीं, लेकिन अब उन्हें तीन-चार दिन में एक बार ही उनसे बात करने का समय मिल पाता है.

उन्होंने कहा, “तो उनके (बच्चों के) लिए समय में कटौती करनी पड़ी है.” रेखा ने कहा, “पहले मैं अक्सर अपने पति से एक घंटा बात करती थी, लेकिन अब मुझे उनसे दस मिनट भी बात करने से पहले सोचना पड़ता है, क्योंकि मुझे लगता है कि इस बीच कहीं कोई जरूरी फोन कॉल न जाए. अब मैं अपने परिवार के लिए खाना बनाने और उनकी फरमाइशें पूरी करने जैसे काम भी नहीं कर पाती, जो कोई भी गृहिणी आम तौर पर करना पसंद करती है.”

मुझे ऐसा लगा जैसे कोई फिल्म चल रही हो: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने नाम की घोषणा पर कहा

दिल्ली के मुख्यमंत्री के पद पर अपने नाम की घोषणा होने को लेकर रेखा गुप्ता ने अपनी प्रतिक्रिया को याद करते हुए कहा कि ऐसा लग रहा था जैसे कोई रील या फिल्म चल रही हो और इसके खत्म होने के बाद सब कुछ सामान्य हो जाएगा. गुप्ता ने बुधवार को ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ साक्षात्कार में कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में नामित किये जाने के बारे में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से कोई फोन कॉल या संदेश नहीं मिला था, बल्कि सीधे घोषणा कर दी गई थी.

उन्होंने कहा, ”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में रामलीला मैदान में शपथ लेने के बाद मुझे यह आश्वस्त करने के लिए खुद को चिकोटी काटनी पड़ी कि यह कोई सपना तो नहीं है.” उन्होंने कहा, ”तब मुझे लगा कि मैं यहां हूं और मुझे मुख्यमंत्री के रूप में काम करना है.” गुप्ता ने कहा कि समाचार चैनलों ने जब उनका नाम मुख्यमंत्री पद के लिए शीर्ष दावेदार के रूप में दिखाना शुरू किया तब उन्हें पता चला कि वह मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं.

उन्होंने कहा, ”बाद में विधायक दल की बैठक में यह स्पष्ट हो गया. तब तक मुझे पार्टी या कहीं और से कोई संदेश नहीं मिला था.” सुषमा स्वराज के बाद दिल्ली में भाजपा की दूसरी महिला मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि विधायक दल की बैठक के दौरान उन्होंने भगवान से प्रार्थना की थी कि उन्हें केवल वही जिम्मेदारियां दें जिन्हें वह निभा सकें.

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