दिल्ली में स्कूल फीस विनियमित करने के विधेयक को मंजूरी; उल्लंघनकर्ता पर लगेगा भारी जुर्माना

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 29 Apr 2025 07:02 PM
दिल्ली में स्कूल फीस विनियमित करने के विधेयक को मंजूरी; उल्लंघनकर्ता पर लगेगा भारी जुर्माना
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नयी दिल्ली. दिल्ली के मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय राजधानी के निजी और सरकारी स्कूलों में फीस को विनियमित करने के प्रावधान वाले एक विधेयक को मंगलवार को मंजूरी दे दी. इस फैसले से हर साल मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने का मुद्दा उठाने वाले अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सरकार के निर्देशों का पालन न करने पर स्कूलों पर एक लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक का कठोर जुर्माना लगाया जाएगा.

गुप्ता ने इस कदम को “साहसिक व ऐतिहासिक” करार देते हुए कहा कि भाजपा सरकार दिल्ली स्कूल शिक्षा पारर्दिशता निर्धारण एवं शुल्क विनियमन विधेयक, 2025 को पारित करने के लिए तत्काल दिल्ली विधानसभा का सत्र बुलाएगी. शिक्षा मंत्री आशीष सूद के साथ मौजूद मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दिनों इस मुद्दे पर व्यापक रूप से चर्चा हुई और कुछ स्कूलों की गतिविधियों व फीस वृद्धि के नाम पर छात्रों के “उत्पीड़न” की शिकायतों के कारण अभिभावकों में “घबराहट” थी.

उन्होंने कहा, “दिल्ली की पिछली सरकारों ने फीस वृद्धि को रोकने के लिए कोई प्रावधान नहीं किया. निजी स्कूलों द्वारा फीस वृद्धि को रोकने में सरकार की मदद करने के लिए कोई दिशानिर्देश नहीं था.” सूद ने कहा कि विधेयक में स्कूल, जिला व राज्य स्तर पर तीन स्तरीय समितियों के गठन का प्रस्ताव है. इससे स्कूल फीस निर्धारित करने की प्रक्रिया में बहुत जरूरी पारर्दिशता वसंरचना आएगी और अभिभावकों को अनियमित बढ़ोतरी से बचाया जा सकेगा. उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया समयबद्ध होगी, ताकि अभिभावकों को किसी तरह की परेशानी न हो. शिक्षा मंत्री के अनुसार, पहले स्तर पर प्रत्येक स्कूल एक स्कूल स्तरीय फीस विनियमन समिति का गठन करेगा.

उन्होंने कहा कि इस समिति में स्कूल प्रबंधन के अध्यक्ष, सदस्य सचिव के रूप में प्रिंसिपल, तीन शिक्षक व पांच अभिभावक शामिल होंगे, जिनमें एससी/एसटी समुदाय के सदस्य और कम से कम दो महिलाएं शामिल होंगी जबकि शिक्षा निदेशालय से एक नामित व्यक्ति पर्यवेक्षक के रूप में काम करेगा. सूद ने कहा कि स्कूल अब मनमाने ढंग से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे तथा कोई भी बढ़ोतरी हर तीन साल में एक बार ही की जाएगी और वह भी इस समिति की मंजूरी के बाद.

उन्होंने कहा, “फीस बढ़ाने का फैसला 18 महत्वपूर्ण मापदंडों पर आधारित होगा, जिसमें कक्षाओं व इमारतों की स्थिति, स्कूल के वित्तीय भंडार और विज्ञान प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों व खेल के मैदानों की गुणवत्ता शामिल है.” शिक्षा मंत्री ने कहा कि इन मानकों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अगर फीस बढ़ोतरी को मंजूरी दी जाती है, तो यह वास्तविक बुनियादी ढांचे या सेवा सुधारों के आधार पर उचित हो.

सूद ने घोषणा की कि ये स्कूल-स्तरीय समितियां 31 जुलाई तक गठित की जाएंगी और उन्हें 30 दिन में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी. उन्होंने कहा, “अगर स्कूल-स्तरीय समिति समय पर अपनी सिफारिश प्रस्तुत करने में विफल रहती है, तो मामला जिला स्तरीय समिति को भेज दिया जाएगा. अगर फिर भी समाधान नहीं होता है, तो सात सदस्यों वाली एक राज्य स्तरीय समिति को अंतिम निर्णय लेने का अधिकार दिया जाएगा.”

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