लखनऊ. समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर ‘नमामि गंगे’ का ‘जुमला’ देने का आरोप लगाते हुए रविवार को कहा कि नदियों के नाम से कई बार ठग चुकी भाजपा को समाजवादियों से नदी की सफाई की ‘ट्यूशन’ लेनी चाहिये. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यहां एक बयान में कहा कि भाजपा सरकार ने नदियों की सफाई का वादा किया था लेकिन उसे पूरा नहीं किया और नदियों की सफाई के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है.
यादव ने अपनी सरकार में शुरू हुई गोमती रिवरफ्रंट योजना का जिक्र करते हुए कहा, ”नदियों की सफाई के लिए समाजवादी सरकार में किये जा रहे कार्यों को भाजपा सरकार ने रोक दिया. भाजपा सरकार ने समाजवादी सरकार में हुए गोमती रिवरफ्रंट के कार्य को भी पूरा नहीं होने दिया. समाजवादी सरकार ने गोमती नदी पर विश्वस्तरीय रिवरफ्रंट बनाकर नदियों की सफाई के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया था कि इसी तरह से प्रदेश की अन्य नदियां भी साफ हो सकती हैं. भाजपा सरकार ने गंगा नदी की सफाई को लेकर बड़े-बड़े वादे किये लेकिन 10 साल की सरकार में मां गंगा की सफाई नहीं हो पाई.” उन्होंने यमुना नदी की सफाई का जिक्र करते हुए कहा, ”भाजपा ने नदियों के नाम से कई बार ठगा है. ‘नमामि गंगे’ का जुमला बहकर न जाने कहां चला गया है और अब यमुना की स़फाई के नाम पर यमुना नदी का ‘जंतु और पादप’ जीवन ही भाजपाई जुमला बनकर रह गया है.”
सपा अध्यक्ष ने सलाह देते हुए कहा, ”भाजपाई चाहें तो समाजवादियों से नदी की स़फाई की ट्यूशन ले सकते हैं. समाजवादी पार्टी की सरकार के समय हुए गोमती रिवरफ्रंट की स्वच्छता और सौंदर्यीकरण के उदाहरण को समझने के लिए समाजवादियों को बुलाकर ‘गेस्ट लेक्चर’ आयोजित कर नि?शुल्क सीख भी ले सकते हैं.” पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ”नदी जीवन देती है, किसी का जीवन लेती नहीं है. अब यमुना पर सिफ.र् सियासत होगी या नदी की स़फाई की जगह केवल फंड का सफाया होगा? याद रहे यही यमुना नदी ताजमहल के पीछे बहती है, जहां दुनिया भर से पर्यटक आते हैं. प्रदूषित नदी सरकार की छवि को भी दूषित कर रही है.” सपा प्रमुख ने कहा, ”भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार गंगा में रसायनिक प्रदूषण से जलीय जीवों की कई प्रजातियों के लुप्त होने का खतरा पैदा हो गया है. मां गंगा की सफाई के नाम पर हजारों करोड़ रूपये के बजट की लूट हो गई.” यादव ने कहा, ”भाजपा नदियों की सफाई नहीं कर पाई लेकिन जनता अब भाजपा की सफाई का कार्यक्रम बना चुकी है. भाजपा की सफाई होते ही सब कुछ अपने आप साफ हो जाएगा.”
सपा कार्यकर्ताओं को समझा दिया है, उपमुख्यमंत्री पाठक से भी बयानबाजी बंद करने की उम्मीद है: अखिलेश
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के मीडिया प्रकोष्ठ पर राज्य के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के बारे में की टिप्पणी के मामले में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने समाजवादी कार्यकर्ताओं को समझा दिया है, लेकिन उम्मीद है कि पाठक जिस तरह की बयानबाजी निंरतर करते आये हैं उस पर भी विराम लगेगा. यादव ने शनिवार देर रात पाठक के मामले में एक लंबा पोस्ट लिखा.
यादव ने पाठक को नसीहत देते हुए कहा, “सब जानते हैं कि हम यदुवंशी हैं और यदुवंश का संबंध भगवान श्रीकृष्ण से है. ऐसे में हमारे ‘डीएनए’ के बारे में आपके प्रहार से हम धार्मिक रूप से भी आहत हुए हैं.” वहीं, ब्रजेश पाठक ने रविवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बयान पर पलटवार करते हुए कहा “हे महान लोहिया, जनेश्वरजी ! इन नादानों को क्षमा करें, इन्हें कुछ पढ़ाया – लिखाया , सिखाया व समझाया नहीं गया.” दरअसल, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की लखनऊ महानगर इकाई के अध्यक्ष आनन्द द्विवेदी ने राज्य के मुख्य विपक्षी दल सपा मीडिया प्रकोष्ठ के आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल के अज्ञात हैंडलर के खिलाफ उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के “डीएनए” को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में शनिवार को लखनऊ के हजरतगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है.
सपा के मीडिया प्रकोष्ठ ने शनिवार को ‘एक्स’ खाते पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के डीएनए को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. हालांकि कुछ देर बाद पोस्ट को डिलीट कर दी गई. पाठक ने सपा के ‘डिलीट’ पोस्ट को साझा करते हुए शनिवार को यादव पर निशाना साधा.
पाठक ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा “अखिलेश जी, ये आपकी पार्टी की भाषा है? ये आपकी पार्टी का आफिशियल हैंडल है!! किसी के दिवंगत माता-पिता के लिए शब्दों का ये चयन है?” पाठक ने पोस्ट में कहा “लोकतंत्र में सहमति-असहमति और आरोप-प्रत्यारोप सब चलते आए हैं और चलते रहेंगे पर आप अपनी पार्टी को इस स्तर पर ले आएंगे? क्या आदरणीय डिंपल जी इस स्त्री विरोधी और पतित मानसिकता को स्वीकार करेंगी? सोचिएगा!!!” पाठक के इस पोस्ट के कुछ घंटे बाद यादव ने ‘एक्स’ पर एक लंबे पोस्ट में कहा “हमने उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री जी की टिप्पणी का संज्ञान लेते हुए, पार्टी स्तर पर उन लोगों को समझाने की बात कही है जो समाजवादियों के डीएनए पर दी गयी आपकी (पाठक) ‘अति अशोभनीय टिप्पणी’ से आहत होकर आपा खो बैठे.”
यादव ने कहा “आइंदा ऐसा न हो, इसके लिए हमने उनसे तो ये आश्वासन ले लिया है लेकिन आपसे भी यही आशा है कि आप जिस तरह की बयानबाजी निंरतर करते आये हैं उस पर भी विराम लगेगा.” उन्होंने पोस्ट में कहा “आप जिस स्तर के बयान देते हैं वे भले आपको अपने व्यक्तिगत स्तर पर उचित लगते हों, लेकिन आपके पद की मर्यादा और शालीनता के पैमाने पर किसी भी तरह उचित नहीं ठहाराये जा सकते.” यादव ने कहा, “ऐसे में आपसे आग्रह है कि राजनीति करते-करते न अपनी नैतिकता भूलिए और न ही धर्म जैसी संवेदनशील भावना को जाने-अंजाने में ठेस पहुंचाइए.”
यादव ने कहा “आशा है आप अपनी टिप्पणी के लिए अपने अंदर बैठे हुए उस अच्छे इंसान से क्षमा मांगेंगे, जो पहले ऐसा न था. आप यदि एकांत में बैठकर अपने विगत वर्षों के व्यवहार, विचार और व्यक्तित्व का निष्पक्ष अवलोकन-आलोचन करेंगे तो पाएंगे कि मूल रूप से आपके विचारों में पहले कभी भी ऐसा विचलन न था. न ही आपकी राजनीतिक आकांक्षाएं ऐसी थीं कि आप व्यक्तिगत स्तर पर आदर्श को भूल जाएं और अपना शाब्दिक संतुलन खो बैठें.” सपा प्रमुख ने कहा, “आशा है इस बात को यहीं खत्म समझा जाएगा. एक जनसेवक होने के नाते हम सबके पास जनसेवा के लिए वैसे भी समय हमेशा कम रहता है, ऐसे में व्यर्थ के विषयों में न उलझकर हमें सकारात्मक राजनीति के उद्देश्यों पर अडिग रहकर आगे बढ़ते रहना चाहिए. शुभेच्छा!”
इस बीच, पाठक ने रविवार को ‘एक्स’ पर लिखा, “सपा मीडिया प्रकोष्ठ के साथी आलोचना करने के दौरान जिन शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, उसे पढ़ कर लगता ही नहीं कि यह पार्टी राममनोहर लोहिया और जनेश्वर मिश्र की पार्टी रह गई है. जार्ज साहब की बात तथाकथित “समाजवादी ” भूल गए कि शिविर लगाया करो, पढ़ा – लिखा करो.” पाठक ने कहा “अखिलेशजी ! सपाइयों को लोहिया- जेपी पढ़ाइए और पंडित जनेश्वर जी के भाषण सुनवाइए, ताकि इनके आचरण और उच्चारण में समाजवाद झलके. लोहिया की किताबें आप पर न हो तो मैं उपलब्ध करवा सकता हूं ………” उन्होंने कहा “हे महान लोहिया, जनेश्वरजी ! इन नादानों को क्षमा करें, इन्हें कुछ पढ़ाया – लिखाया , सिखाया व समझाया नहीं गया.”