पाक हजारों जख्म देकर भारत को लहूलुहान करना चाहता है, हमने नयी लक्ष्मण रेखा खींची: CDS

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 03 Jun 2025 07:57 PM
पाक हजारों जख्म देकर भारत को लहूलुहान करना चाहता है, हमने नयी लक्ष्मण रेखा खींची: CDS
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पुणे. प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने मंगलवार को कहा कि पेशेवर सेनाएं अस्थायी नुकसान से प्रभावित नहीं होतीं, क्योंकि समग्र परिणाम ऐसे नुकसान से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होते हैं. शीर्ष सैन्य कमांडर ने कहा कि पाकिस्तान भारत को हजारों जख्म देकर लहूलुहान करने की नीति पर चल रहा है, लेकिन नयी दिल्ली ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए सीमापार आतंकवाद के खिलाफ पूरी तरह एक नयी लक्ष्मण रेखा खींच दी है.

सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय में अपने संबोधन में जनरल चौहान ने यह बात स्वीकार करने के लिए हो रही अपनी आलोचना को खारिज किया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के प्रारंभिक चरण में भारत ने अनिर्दष्टि संख्या में लड़ाकू जेट विमान खो दिए. उन्होंने कहा, ”जब मुझसे हमारी ओर से हुई क्षति के बारे में पूछा गया तो मैंने कहा कि यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि परिणाम और आप कैसे कार्य करते हैं, यह महत्वपूर्ण है.” चौहान ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि नुकसान और संख्या के बारे में बात करना सही नहीं होगा.

सीडीएस ने कहा कि युद्ध में यदि नुकसान भी होता है, तो आपको अपना मनोबल बनाए रखना होता है. उन्होंने कहा कि नुकसान महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि परिणाम महत्वपूर्ण हैं. जनरल चौहान ने राजनीति और हिंसा सहित युद्ध के विभिन्न पहलुओं की व्याख्या करते हुए कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भी युद्ध और राजनीति समानांतर रूप से हो रही थी.

उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर द्वारा पहलगाम हमले से कुछ सप्ताह पहले भारत और हिंदुओं के खिलाफ ”जहर उगले जाने” का भी उल्लेख किया, ताकि इस बात पर जोर दिया जा सके कि इस्लामाबाद का दृष्टिकोण ”भारत को हजार जख्म देकर ”लहूलुहान करने” का रहा है. जनरल चौहान ने कहा कि पहलगाम में जो कुछ हुआ, वह हद दर्जे की क्रूरता थी. उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के पीछे सोच यह थी कि पाकिस्तान से राज्य प्रायोजित आतंकवाद पर नकेल कसी जाए और उस देश को भारत को आतंकवाद का बंधक बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती. जनरल चौहान ने कहा कि भारत आतंकवाद और परमाणु ब्लैकमेल से डरने वाला नहीं है.

भारत के सैन्य हमलों के बारे में उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तानी ठिकानों पर बहुत सोच-समझकर सटीक हमले किए. शत्रुता समाप्त करने पर सहमति की प्रक्रिया को समझाते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ 48 घंटे तक जवाबी कार्रवाई करने की योजना बनाई थी, लेकिन यह योजना आठ घंटे में ही धराशायी हो गई. उन्होंने भारतीय हमलों के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसके चलते पाकिस्तानी पक्ष ने बातचीत की इच्छा जताई.

चौहान ने कहा कि 10 मई की रात करीब एक बजे पाकिस्तान ने 48 घंटे में भारत को शिकस्त देने का लक्ष्य बनाया और कई हमले किए. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को लगा था कि उसका अभियान 48 घंटे तक चलेगा, लेकिन उसने आठ घंटे में ही हार मान ली और वह बातचीत की इच्छा जताने लगा. जनरल चौहान ने कहा, ”जब पाकिस्तान की ओर से बातचीत और तनाव कम करने का अनुरोध आया तो हमने उसे स्वीकार कर लिया.” भारत के समग्र दृष्टिकोण के बारे में उन्होंने कहा, ”हमने मानदंड बढ़ा दिए हैं; हमने आतंकवाद को पानी से जोड़ा है, हमने आतंकवाद के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की नयी रेखा खींच दी है.”

भारत ने पाकिस्तान को ‘पारी से हराया’: सीडीएस चौहान

प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने मंगलवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पाकिस्तान पर भारत की निर्णायक जीत का वर्णन करने के लिए क्रिकेट की एक आकर्षक उपमा का इस्तेमाल किया और कहा कि भारत ने अपने प्रतिद्वंद्वी को ”पारी से हरा” दिया. सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के रक्षा एवं सामरिक अध्ययन विभाग द्वारा आयोजित ‘भविष्य के युद्ध और संघर्ष’ विषय पर अपना भाषण पूरा करने के बाद सीडीएस ने वहां उपस्थित विद्वानों के कुछ प्रश्नों के उत्तर दिए.

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान को हुए नुकसान के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में जनरल चौहान ने स्पष्ट किया कि यह ‘ऑपरेशन’ अभी समाप्त नहीं हुआ है और ”शत्रुता में अस्थायी रूप से ठहराव” आया है. उन्होंने कहा, ”मैं इस पर विस्तृत उत्तर दूंगा.” सीडीएस ने कहा, ”मान लीजिए कि आप एक फुटबॉल मैच में जाते हैं और 4-2 से जीत जाते हैं; उसने दो गोल किए और आपने चार गोल किए. तो यह एक बराबरी का मैच है.” उन्होंने इसके तुरंत बाद क्रिकेट के रूपक के जरिए शत्रुता के परिणाम के बारे में स्पष्ट रूप से अंतर बताया.

जनरल चौहान ने कहा, ”लेकिन मान लीजिए कि आप क्रिकेट टेस्ट मैच खेलने जाते हैं और आप ‘पारी से हराकर’ जीत दर्ज करते हैं, तो इसमें यह सवाल ही नहीं उठता कि आपने कितने विकेट लिए, कितनी गेंदें खेलीं और कितने खिलाड़ी खेले. यह एक पारी की हार है.” शीर्ष सैन्य कमांडर की टिप्पणी पर उपस्थित लोगों ने जोरदार तालियां बजाईं, क्योंकि यह उदाहरण भारत की जीत की व्यापक प्रकृति को दर्शाने के लिए था.

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