एनआईए ने खालिस्तानी आतंकियों से जुड़ाव वाले तीन आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 15 Jun 2025 10:41 PM
एनआईए ने खालिस्तानी आतंकियों से जुड़ाव वाले तीन आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया
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नयी दिल्ली/जम्मू/चंडीगढ़. राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने पंजाब के एसबीएस नगर जिले में एक पुलिस चौकी पर ग्रेनेड हमले से संबंधित 2024 के मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है. अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस हमले में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (केजेडएफ) की बड़ी साजिश होने का पता चला है.

उन्होंने बताया कि एसबीएस नगर के राहोन गांव के रहने वाले युगप्रीत सिंह उर्फ युवी निहंग, जसकरण सिंह उर्फ शाह और हरजोत सिंह उर्फ जोत हुंदल पर पंजाब के मोहाली की एक अदालत में शनिवार को दाखिल आरोपपत्र में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और अन्य संबंधित प्रावधानों की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं.

अधिकारियों ने बताया कि एनआईए ने केजेडएफ प्रमुख और घोषित आतंकवादी रंजीत सिंह उर्फ नीता, संगठन के सदस्य जगजीत सिंह लाहिड़ी उर्फ जग्गा उर्फ जग्गा मियापुर उर्फ हरि सिंह (वर्तमान में ब्रिटेन में रह रहा है) और अन्य अज्ञात आतंकवादी गुर्गों के खिलाफ भी जांच शुरू की है.

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस वर्ष मार्च में पंजाब पुलिस से मामला अपने हाथ में लेने वाली एजेंसी ने पाया है कि जग्गा ने ब्रिटेन में अपने एक परिचित के माध्यम से युगप्रीत सिंह की भर्ती की थी. एजेंसी ने कहा कि अन्य केजेडएफ आतंकवादियों और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर जग्गा ने युगप्रीत को कट्टरपंथी बनाया था और ”ए्क्रिरप्टेड मैसेजिंग एप्लीकेशन के माध्यम से उसे नियंत्रित करता था.” एनआईए के बयान में कहा गया है कि जग्गा ने कनाडा स्थित संस्थाओं के माध्यम से युगप्रीत को 4.36 लाख रुपये से अधिक का आतंकी वित्तपोषण किया था, जिनकी पहचान कर ली गई है और उनकी जांच की गई है.

इसमें कहा गया है, ”युगप्रीत ने अन्य दो आरोपियों की भर्ती की थी और तीनों ने एक और दो दिसंबर 2024 की रात के दौरान पुलिस चौकी असरोन पर हमला किया था.” जांच एजेंसी ने कहा कि तीनों आरोपियों को नवंबर 2024 की शुरुआत में उनके विदेशी संचालकों ने ग्रेनेड मुहैया कराए थे.

पीडीपी नेता वहीद पारा कानून का पालन करने वाले नागरिक नहीं: एनआईए

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) नेता और विधायक वहीद-उर-रहमान पारा की जमानत शर्तों में नरमी दिये जाने के अनुरोध का विरोध करते हुए कहा कि ”वह कानून का पालन करने वाले नागरिक नहीं हैं” और उनके खिलाफ ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ से संबंधित अपराधों में आरोप तय किए गए हैं.

एनआईए ने जम्मू-कश्मीर से बाहर जाने की अनुमति देने के लिए जमानत शर्तों में नरमी बरतने के अनुरोध संबंधी पारा की याचिका पर चार पन्नों के जवाब में मामले का विस्तृत विवरण दिया और कहा कि याचिका को खारिज करने की जरूरत है क्योंकि आरोपी कानून के शिकंजे से भाग सकता है. एनआईए अदालत ने पारा को जमानत दे दी, लेकिन अदालत की अनुमति के बिना उन्हें केंद्र शासित प्रदेश नहीं छोड़ने का निर्देश दिया. पीडीपी विधायक पारा को एनआईए ने पहली बार 25 नवंबर 2020 को गिरफ्तार किया था और नौ जनवरी 2021 को उन्हें जमानत मिल गई थी. उन्हें हालांकि जम्मू की जेल से रिहा नहीं किया गया.

पारा को जम्मू-कश्मीर पुलिस की आपराधिक जांच (कश्मीर) शाखा ने गिरफ्तार कर लिया था, जिसे अब राज्य अन्वेषण अभिकरण (एसआईए) में बदल दिया गया है. बाद में उन्हें 2022 में जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने जमानत दी थी. पीडीपी विधायक ने हाल ही में यहां एनआईए की विशेष अदालत का रुख किया.

पारा ने विशेष अदालत में याचिका दायर कर अपने संवैधानिक कर्तव्यों के लिए जम्मू-कश्मीर से बाहर लेकिन देश के भीतर यात्रा करने की अनुमति मांगी. हालांकि, एनआईए ने कहा कि जमानत की मौजूदा शर्तें किसी भी तरह से आरोपी को विधायक के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन करने से नहीं रोकती हैं.

एनआईए ने कहा, “आरोपी वहीद-उर-रहमान पारा कानून का पालन करने वाले नागरिक नहीं हैं और उनपर राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाला गंभीर आरोप हैं.” एजेंसी ने कहा, “केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर से बाहर यात्रा करने की अनुमति के अनुरोध संबंधी किसी भी अर्जी को मुकदमे के महत्वपूर्ण चरण के दौरान एक सुनियोजित प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए.” एनआईए ने दलील दी कि जमानत शर्तों में किसी भी प्रकार की छूट पारा के कानूनी कार्यवाही से बचने और जारी मुकदमे को दरकिनार करने की मंशा के बारे में गंभीर चिंताएं पैदा करेगी.

एजेंसी ने कहा, “राहत देने से आरोपी के फरार होने का बड़ा जोखिम पैदा हो सकता है.” पारा को आतंकवाद से संबंधित एक मामले में 18 महीने बाद 2022 में उच्च न्यायालय ने जमानत दी थी. उच्च न्यायालय ने आदेश में कहा था कि अभियोजन पक्ष द्वारा एकत्र किए गए साक्ष्य अधूरे हैं, जिसकी वजह से उन्हें राहत देने से इनकार नहीं किया जा सकता.

पंजाब पुलिस ने लक्षित हत्या की साजिश नाकाम की, अर्श डल्ला मॉड्यूल के दो सदस्य गिरफ्तार

पंजाब पुलिस ने कनाडा में रहने वाले आतंकवादी अर्श डल्ला द्वारा रची गई हत्या की एक साजिश नाकाम करते हुए मॉड्यूल के दो प्रमुख गुर्गों को गिरफ्तार किया है. अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी. पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि प्रारंभिक जांच के अनुसार, गिरफ्तार किए गए व्यक्ति प्रतिद्वंद्वी गिरोह के सदस्यों का खात्मा करने के लिए अर्श डल्ला के निर्देश पर काम कर रहे थे.

डीजीपी ने पोस्ट में कहा, ”राज्य विशेष अभियान प्रकोष्ठ (एसएसओसी), पंजाब ने कनाडा में रहने वाले आतंकवादी अर्श डल्ला द्वारा रची गई लक्षित हत्या की एक साजिश को नाकाम कर दिया और दो प्रमुख गुर्गों कवलजीत सिंह, निवासी धर्मकोट और नवदीप सिंह उर्फ ??हानी, निवासी बड्डूवाल को गिरफ्तार कर लिया.” उन्होंने कहा कि समय पर और खुफिया जानकारी के आधार पर की गई इस कार्रवाई के जरिये प्रकोष्ठ ने एक लक्षित हत्या मॉड्यूल का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया है, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा टल गया है. डीजीपी ने बताया कि पुलिस ने अभियान के दौरान एक जिगाना .30 बोर पिस्तौल (तुर्की में निर्मित) और नौ कारतूस भी जब्त किए हैं. डीजीपी ने कहा, ”मॉड्यूल के बारे में और जानकारी जुटाने के लिए जांच जारी है.”

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