मुंबई/नयी दिल्ली. शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत ने बुधवार को कहा कि 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने संविधान के प्रावधानों के अनुसार आपातकाल लगाया था और निर्धारित समय में इसे हटा लिया था ताकि नए सिरे से लोकसभा चुनाव हो सकें. आपातकाल की घोषणा के विरोध में 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ मनाने के लिए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि यह घटना 50 साल पहले घटी थी और अतीत को भूलकर भविष्य की ओर बढ़ना आवश्यक है.
राउत ने दावा किया कि तत्कालीन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख बालासाहेब देवरस ने आपातकाल का समर्थन किया था.
राज्यसभा सदस्य ने कहा, ”जब आंतरिक और बाहरी ताकतों द्वारा अराजकता फैलाने का प्रयास किया जाता है, तो संविधान में आपातकाल (लगाने) का प्रावधान है. उन्हें (भाजपा को) इसका अध्ययन करना होगा. उन्होंने (इंदिरा गांधी ने) इसे कानूनी रूप से लागू किया था और विशेष सत्र बुलाकर संसद की मंजूरी मांगी थी.” राउत ने दावा किया कि भारत अब अघोषित आपातकाल का सामना कर रहा है और देश में भ्रष्टाचार और सांठगांठ वाला पूंजीवाद बड़े पैमाने पर है.
उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं को जेल में डाला जा रहा है और कई अन्य लोगों को नक्सली और राष्ट्रविरोधी बताकर जेल में डाला जा रहा है. राउत ने कहा, ”इंदिरा गांधी ने ऐसा कभी नहीं किया. उन्होंने एक निश्चित समयावधि में आपातकाल हटा लिया और नए चुनावों का मार्ग प्रशस्त किया. वह और उनकी पार्टी (कांग्रेस) चुनाव हार गईं (1977 में) और जनादेश को स्वीकार कर लिया.” मोदी सरकार ने पिछले साल घोषणा की थी कि हर साल आपातकाल की बरसी को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा.
आपातकाल लगाना दुर्भाग्यपूर्ण, लेकिन इंदिरा गांधी ने इसके लिए माफी मांगी थी : शरद पवार
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने बुधवार को कहा कि देश में 50 साल पहले लगाया गया आपातकाल दुर्भाग्यपूर्ण था, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसके लिए माफी मांगी थी. मुंबई में श्रमिक संघों द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में पवार ने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना एक पवित्र कार्य है और लोगों को आज भी इनकी रक्षा के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है.
पवार ने याद दिलाया कि समाजवादी दिग्गजों जॉर्ज फर्नांडिस, चंद्रशेखर और मधु दंडवते से परामर्श के बाद 1978 में महाराष्ट्र में सरकार में परिवर्तन (कांग्रेस के नेतृत्व में) किया गया और वह मुख्यमंत्री बने. केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार का जिक्र करते हुए पवार ने कहा कि मौजूदा सरकार की आलोचना को अस्वीकार्य माना जाता है.
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ”आज हमें सावधान रहना होगा. आज भी मीडिया में सरकार की आलोचना को अच्छा नहीं माना जाता. पत्रकारों को धमकाया जाता है. घोषित और अघोषित आपातकाल में फर्क होता है.” उन्होंने आम नागरिकों से किसी भी कीमत पर संसदीय लोकतंत्र को संरक्षित और सुरक्षित रखने के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया.
वरिष्ठ समाजवादी नेता दिवंगत जॉर्ज फर्नांडिस की प्रशंसा करते हुए राज्यसभा सदस्य पवार ने कहा कि वह एक श्रमिक संघ के नेता से केंद्र में मंत्री बने. पवार ने आपातकाल को एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना करार दिया लेकिन साथ ही कहा कि इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार ने मौलिक अधिकारों पर अंकुश लगाने, असहमति को दबाने, सामूहिक गिरफ्तारियां करने और प्रेस सेंसरशिप जैसे उपायों को लागू करने के लिए माफी भी मांगी थी.
वाजपेयी ने की थी इंदिरा की तारीफ, भाजपा को उनसे सीखना चाहिए: पप्पू यादव
निर्दलीय लोकसभा सदस्य राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने आपातकाल के विषय को लेकर बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा और कहा कि सत्तारूढ़ दल को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से लोकतांत्रिक मूल्यों के बारे में सीखना चाहिए, जिन्होंने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तारीफ की थी. बिहार के पूर्णिया से सांसद ने यह दावा भी किया कि वर्तमान सरकार में सभी संवैधानिक संस्थाओं को खत्म किया जा रहा है.
उन्होंने आरोप लगाया, ”सारी संस्थाओं के मूल्यों को खत्म किया जा रहा है. उच्चतम न्यायालय के पांच न्यायाधीशों ने संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि अघोषित आपातकाल है. ईडी, सीबीआई, चुनाव आयोग, सब भाजपा का दफ्तर बनकर रह गया है. सारी शैक्षणिक संस्थाओं में आरएसएस के लोग बैठ गए हैं.” यादव ने कहा, ”आपने (सरकार ने) कहा था कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद आतंकवाद खत्म हो जाएगा, नोटबंदी से आतंकवाद की कमर टूट जाएगी. लेकिन क्या हुआ? आतंकवादी हमले बढ़ गए हैं.”
उनके मुताबिक, युवाओं को बताना होगा कि अंग्रेजों से माफी किसने मांगी और आजादी आंदोलन के साथ विश्वासघात किसने किया था. यादव ने कहा, ”आपातकाल एक राजनीतिक प्रक्रिया थी, जिसमें कहीं गलती या भूल हुई और इसे स्वीकार भी किया गया. लेकिन आपातकाल के कुछ साल बाद हुए चुनाव में जनता ने इंदिरा गांधी को बड़ा जनादेश दिया.” उन्होंने कहा, ”हम तो कहेंगे कि आप (भाजपा) अटल जी से लोकतांत्रिक मूल्यों के बारे में सीखिए, जिन्होंने इंदिरा जी को दुर्गा की उपाधि दी थी और कहा था कि हमें उन पर गर्व है.”