मुंबई. पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद नारायण राणे ने मंगलवार को शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए उन पर अपने चचेरे भाई एवं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे को परेशान करने का आरोप लगाया.
राणे ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे में खोई जमीन वापस पाने की ताकत या क्षमता नहीं है और अविभाजित शिवसेना के पतन के लिए अकेले वह ही जिम्मेदार हैं. उन्होंने यह टिप्पणी ऐसे वक्त में की है जब राजनीतिक रूप से अलग हो चुके ठाकरे बंधुओं ने करीब दो दशक बाद पांच जुलाई को एक मंच साझा करने का फैसला किया है.
राणे ने पोस्ट में लिखा, ”उद्धव ठाकरे भाईचारे का हवाला देकर राज ठाकरे के साथ नजदीकी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन क्या वह भूल गए हैं कि उन्होंने राज को परेशान किया था. उन्हें बहुत परेशान किया था और उन्हें पार्टी (अविभाजित शिवसेना) छोड़ने के लिए मजबूर किया था? क्या उन्हें पता नहीं है कि उन्होंने क्या किया? अब वह राज की चापलूसी क्यों कर रहे हैं?” भाजपा सांसद ने कहा, ”राज ठाकरे, गणेश नाइक, एकनाथ शिंदे और मैंने अपना जीवन शिवसेना के विकास के लिए सर्मिपत कर दिया, लेकिन उद्धव ठाकरे ने हमें बाहर निकाल दिया. आदरणीय बालासाहेब ठाकरे पार्टी को सत्ता में लाए, लेकिन उद्धव ठाकरे ने वह सत्ता खो दी और (वह) शिवसेना के पतन के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार हैं.” उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के राजनीतिक रूप से मजबूत स्थिति में आने के प्रयासों की आलोचना करते हुए दावा किया कि उनमें वह ताकत या क्षमता नहीं है, जिससे वह खोई जमीन वापस पा सकें.
गौरतलब है कि राज ठाकरे ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले राणे के लिए प्रचार किया था. उद्धव ठाकरे के खिलाफ भाजपा नेता के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता भास्कर जाधव ने कहा, ”नारायण राणे दूसरों के बारे में इतना क्यों सोचते हैं? एक साल के अंदर ही उन्होंने अपनी पार्टी क्यों छोड़ दी? उन्होंने कांग्रेस क्यों छोड़ दी? उन्हें महाराष्ट्र की जनता को कारण बताना चाहिए. उन्होंने रवींद्र चव्हाण को भी परोक्ष चेतावनी दी – आखिर ऐसा क्यों हुआ?”
दो दशक बाद मंच साझा करेंगे चचेरे भाई उद्धव और राज ठाकरे
त्रिभाषा नीति से संबंधित विवादित सरकारी प्रस्ताव वापस लिए जाने के उपलक्ष्य में शिवसेना (उबाठा) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की पांच जुलाई को होने वाली संयुक्त विजय रैली में 20 साल में पहली बार उद्धव और राज ठाकरे मंच साझा करते दिखाई देंगे.
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) और राज ठाकरे की अगुवाई वाली मनसे ने मंगलवार को वर्ली स्थित एनएससीआई डोम में आयोजित होने वाले “मराठी विजय दिवस” ??समारोह के लिए संयुक्त सार्वजनिक निमंत्रण जारी किया. ‘मराठीचा आवाज’ शीर्षक वाला संयुक्त निमंत्रण इस आयोजन की पहली आधिकारिक घोषणा है.
निमंत्रण में पार्टी का कोई चिन्ह या झंडा नहीं है, बस महाराष्ट्र की एक ग्राफिक तस्वीर दिखाई गई है. इसमें मेजबान के रूप में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के नाम का उल्लेख है. शिवसेना (उबाठा) के सांसद संजय राउत ने पुष्टि की कि उद्धव और राज ठाकरे रैली में शामिल होंगे. आने वाले महीनों में र्चिचत मुंबई नगर निकाय और अन्य नगर निगमों के चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में मराठी पहचान के संवेदनशील मुद्दे पर दोनों भाइयों के बीच संभावित सुलह पर राज्य के राजनीतिक हलकों में उत्सुकता से नजर रखी जा रही है.
महाराष्ट्र के स्कूलों में कक्षा एक से हिंदी भाषा की पढ.ाई शुरू करने को लेकर विरोध के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को त्रिभाषा नीति के कार्यान्वयन से संबंधित दो जीआर (सरकारी प्रस्ताव) वापस लेने की घोषणा की. मनसे और शिवसेना (उबाठा) ने त्रिभाषा नीति के माध्यम से हिंदी भाषा को “थोपे जाने” के खिलाफ विरोध मार्च का आह्वान किया था.
राज्य सरकार द्वारा प्रस्ताव वापस लिए जाने के तुरंत बाद, दोनों दलों ने मराठी लोगों की जीत का हवाला देते हुए, संयुक्त मार्च रद्द कर दिया. बाद में उद्धव ठाकरे ने कहा कि पांच जुलाई को ‘मराठी मानुष की एकता’ का जश्न मनाने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. मंगलवार को जारी संयुक्त निमंत्रण “मराठी बहनों और भाइयों” को संबोधित किया गया है, तथा रैली को मराठी गौरव व एकता का उत्सव बताया गया है.
निमंत्रण पर संदेश में लिखा है, “क्या हमने सरकार को झुका दिया? हां! यह जश्न आपका होगा और हम केवल आपकी ओर से लड़ रहे थे.” शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे ने उद्धव के साथ मतभेदों के कारण जनवरी 2006 में पार्टी से इस्तीफा दे दिया था.