दुश्मन के खिलाफ ‘ढाल और तलवार’ की तरह काम करेगा ‘सुदर्शन चक्र’ : सीडीएस चौहान

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 26 Aug 2025 07:30 PM
दुश्मन के खिलाफ ‘ढाल और तलवार’ की तरह काम करेगा ‘सुदर्शन चक्र’ : सीडीएस चौहान
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महू. भविष्य की सैन्य चुनौतियों से निपटने के लिए सभी सशस्त्र बलों के तालमेल और तकनीकों के एकीकरण पर बल देते हुए प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने मंगलवार को भारत की प्रस्तावित वायु रक्षा प्रणाली ‘सुदर्शन चक्र’ का संभावित खाका पेश किया.

जनरल चौहान ने कहा कि ‘सुदर्शन चक्र’ से सेंसरों, मिसाइलों, निगरानी उपकरणों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरणों को बड़े पैमाने पर जोड़ा जाएगा और यह प्रणाली ‘ढाल और तलवार’, दोनों की तरह काम करेगी. सीडीएस ने सैन्य छावनी महू के ‘आर्मी वॉर कॉलेज’ में तीनों सेनाओं की संयुक्त रक्षा संगोष्ठी “रण संवाद 2025″ में अपने संबोधन के दौरान यह बात कही. उन्होंने इशारा किया कि भारत की ‘सुदर्शन चक्र’ प्रणाली इजराइल के उस सर्वकालिक वायु रक्षा तंत्र ‘आयरन डोम’ की तर्ज पर होगी जिसे बेहद प्रभावशाली सैन्य कवच माना जाता है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण में ‘सुदर्शन चक्र’ की 10 वर्षीय महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा की थी. इसके बाद सेना की ओर से पहली बार इस परियोजना के बारे में टिप्पणी की गई है. इस परियोजना को वर्ष 2035 तक अमली जामा पहनाए जाने की योजना है.

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए सीडीएस चौहान ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का संक्षिप्त जिक्र किया. उन्होंने कहा,”ऑपरेशन सिंदूर एक आधुनिक संघर्ष था जिससे हमने कई सबक सीखे हैं. इनमें से अधिकतर (सबक) पर अमल हो रहा है और कुछ पर अमल हो चुका है.” ‘युद्ध कला पर प्रौद्योगिकी का प्रभाव’ विषय पर दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद किया जा रहा है. हालांकि, सेना के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस कार्यक्रम की योजना ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किए जाने से काफी पहले बना ली गई थी.
संगोष्ठी में तीनों सेनाओं के अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं. इस तरह की संगोष्ठी का आयोजन पहली बार किया जा रहा है.

संगोष्ठी में सीडीएस चौहान ने ‘सुदर्शन चक्र’ के संभावित खाके पर विस्तार से प्रकाश डाला और इसे ‘भारत का अपना आयरन डोम या गोल्डन डोम’ करार दिया. सीडीएस ने कहा, “इस परियोजना का उद्देश्य भारत के सामरिक, नागरिक और राष्ट्रीय महत्व के स्थलों की सुरक्षा के लिए एक प्रणाली विकसित करना है तथा यह प्रणाली ढाल और तलवार, दोनों की तरह काम करेगी.” उन्होंने कहा कि इस प्रणाली के तहत दुश्मन के हवाई हमलों का पता लगाकर उन्हें बेअसर करने के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा.

जनरल चौहान ने कहा कि ‘सुदर्शन चक्र’ परियोजना में खुफिया, निगरानी और टोही तंत्रों के साथ ही हथियारों की अलग-अलग प्रणालियां शामिल होंगी. उन्होंने कहा, “भारत जैसे विशाल देश के लिए इतने बड़े पैमाने वाली इस परियोजना के लिए समग्र राष्ट्रीय दृष्टिकोण की आवश्यकता होगी, लेकिन हमेशा की तरह मुझे पूरा यकीन है कि हम इस परियोजना को न्यूनतम और बेहद किफायती लागत पर पूरा कर लेंगे.” ‘सुदर्शन चक्र’ परियोजना को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा के कुछ ही दिन पहले पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने कथित रूप से संकेत दिया था कि भारत-पाकिस्तान के बीच भविष्य में किसी सैन्य टकराव की स्थिति में पाकिस्तान की ओर से भारत की सीमावर्ती परिसंपत्तियों को निशाना बनाया जा सकता है जिनमें गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस रिफाइनरी शामिल है.

सीडीएस चौहान ने संगोष्ठी में यह आ”ान भी किया कि भविष्य के युद्धों में भारत की विजय सुनिश्चित करने के लिए सभी सशस्त्र बलों को पूरे आपसी तालमेल के साथ ‘त्वरित और निर्णायक प्रतिक्रिया’ देनी होगी. ‘रण संवाद 2025’ में तीनों सेनाओं के अधिकारी रक्षा क्षेत्र की मौजूदा व भावी चुनौतियों और इनसे निपटने के उपायों पर विचार मंथन कर रहे हैं. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस संगोष्ठी के दूसरे और अंतिम दिन बुधवार को पूर्ण सत्र को संबोधित करेंगे. इस दौरान कुछ संयुक्त सिद्धांत, तकनीकी दृष्टिकोण और सैन्य क्षमताओं से जुड़ी रूप-रेखा भी जारी की जाएगी.

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