नयी दिल्ली. दिल्ली पुलिस ने देशभर में ‘डिजिटल एरेस्ट’ की साजिश रचने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया और एक महिला से 20 लाख रुपये की ठगी करने के आरोप में गिरोह के कथित सरगना समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया. एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी.
पुलिस ने बताया कि दिल्ली, हापुड़ और ग्रेटर नोएडा में छापेमारी के बाद आरोपी, सरगना मोहित जैन उर्फ रिंकू (33), उसके सहयोगी लोकेश गुप्ता (38), मनोज कुमार चौधरी, केशव कुमार (45) और सैफ अली (30) को गिरफ्तार किया गया. अधिकारी ने बताया कि आरोपियों के पास से 14 मोबाइल फोन, 40 चेक बुक, 33 सिम कार्ड, 15 कंपनी स्टांप, 22 स्टांप पेपर, 19 डेबिट कार्ड, 14 पैन कार्ड, सात डिजिटल हस्ताक्षर, एक इंटरनेट बैंकिंग की, एक डेबिट/क्रेडिट कार्ड स्वैपिंग मशीन, एक बैंक स्कैनर और एक एसयूवी सहित बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई.
अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक विश्लेषण से पता चला है कि बरामद चेकबुक से जुड़े बैंक खाते देशभर में 473 साइबर अपराध शिकायतों से जुड़े थे, जिनमें 2025 में दिल्ली में दर्ज 24 मामले भी शामिल हैं. पुलिस को यह भी पता चला कि मोहित और केशव साइबर धोखाधड़ी के कई मामलों में शामिल थे, जबकि सैफ अली को लोगों को फर्जी कंपनियां और खाते खोलने के लिए सात लाख रुपये दिए गए थे.
पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) निधिन वलसन ने कहा, “यह मामला तब प्रकाश में आया जब एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और मुंबई पुलिस का अधिकारी बनकर धमकी देने वाले लोगों ने उसके साथ 20 लाख रुपये की धोखाधड़ी की है.” वलसन ने बताया कि महिला को बताया गया कि उसका आधार कार्ड आपराधिक गतिविधि में संलिप्त पाया गया और यदि वह सहयोग नहीं करेगी तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा. डीसीपी ने एक आधिकारिक बयान में कहा, “उसे ‘एमएच00739 एनसीबी डिपार्टमेंट’ नाम की एक स्काइप आईडी से जुड़ने के लिए कहा गया, जहां धोखेबाजों ने अपने सेटअप को असली दिखाने के लिए नकली आईडी कार्ड और पत्र दिखाए. महिला को अपने बैंक विवरण, डेबिट कार्ड की तस्वीरें और ओटीपी साझा करने के लिए मजबूर किया गया.”
उन्होंने बताया कि इसके बाद आरोपी ने महिला के बचत खाते से 89,000 रुपये निकाल लिए और बाद में महिला के नाम पर 19.9 लाख रुपये का ‘पर्सनल लोन’ ले लिया, जिसकी राशि मेसर्स लोकेज इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड के खाते में भेजी गयी. उन्होंने बताया कि मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई जिसके बाद पुलिस ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश के हापुड़ और ग्रेटर नोएडा में कई छापे मारे.
पुलिस ने बताया कि लोकेश को सबसे पहले 23 सितंबर को दिल्ली के मुकुंदपुर इलाके से गिरफ्तार किया गया था. उससे प्राप्त हुए विवरण के आधार पर मनोज को 25 सितंबर को हापुड़ से पकड़ा गया. इसके बाद मोहित जैन, केशव कुमार और सैफ अली को 26 से 28 सितंबर के बीच ग्रेटर नोएडा और शाहदरा से पकड़ा गया. आरोपियों के नाम पर फर्जी कंपनियां (लोकेज इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड और अजलोके सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड) का पता चला, जिनका उपयोग धनशोधन और धोखाधड़ी की आय प्राप्त करने के लिए किया जाता था. पुलिस ने बताया कि मामले में जांच जारी है.