भारत ‘उभर चुकी बाजार’ अर्थव्यवस्था का दर्जा पाने की राह पर: आरबीआई डिप्टी गवर्नर

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 29 Oct 2025 08:37 PM
भारत ‘उभर चुकी बाजार’ अर्थव्यवस्था का दर्जा पाने की राह पर: आरबीआई डिप्टी गवर्नर
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मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने बुधवार को कहा कि लगातार सुधारों और आर्थिक मजबूती के कारण भारत आने वाले दशकों या संभवत? अगले कुछ वर्षों में ही ‘उभरते हुए बाजार’ से ‘उभर चुके बाजार’ का दर्जा हासिल कर सकता है. गुप्ता ने ‘बिजनेस स्टैंडर्ड बीएफएसआई इनसाइट समिट’ में कहा कि भारत के नीतिगत ढांचे लगातार विकसित हो रहे हैं और ये इस समय वैश्विक स्तर पर सबसे अच्छे ढाचों में से एक हैं.

उन्होंने कहा कि देश की विनिमय दर 1991 तक विनियमित थी और अब यह तेजी से बाजार संचालित हो रही है. इसके बाहरी खाते का प्रबंधन भी अच्छी तरह से किया गया है. डिप्टी गवर्नर ने कहा, ”देश के विविध भुगतान संतुलन में अंर्तिनहित ताकतें हैं. चालू खाते की बात करें तो वस्तु व्यापार घाटा मजबूत सेवा निर्यात और प्रेषण प्राप्तियों से संतुलित किया गया है. तेल की कीमतें पहले की तरह निराशाजनक नहीं हैं. कुल मिलाकर चालू खाता लचीलापन दर्शाता है और पूरी तरह से टिकाऊ दायरे में है.” उन्होंने आगे कहा कि महामारी जैसे बड़े झटकों को छोड़कर, भारत ने मोटे तौर पर राजकोषीय समेकन के मार्ग का पालन किया है.

गुप्ता ने कहा, ”लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण को अपनाने के बाद बेहतर परिणाम मिले हैं. मुद्रास्फीति कम है और कम अस्थिर हो गई है. मुद्रास्फीति संबंधी अपेक्षाएं बेहतर ढंग से स्थिर हैं और मौद्रिक नीति अधिक प्रभावी हो गई है.” डिप्टी गवर्नर ने कहा, “ऐसे सामूहिक प्रयास निश्चित रूप से भारत को आगामी दशकों में (और संभवत? आने वाले वर्षों में ही) उभरते हुए बाजार से उभर चुके बाजार की स्थिति में ले जाएंगे.” उन्होंने कहा कि नीतिगत सुधारों के पूरे ढांचे के चलते भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और प्रति व्यक्ति आय वृद्धि दर समय के साथ तेज हुई है. वृद्धि दर वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक है.

भारत के एफडीआई में अमेरिका, सिंगापुर की एक-तिहाई हिस्सेदारी रही: आरबीआई आंकड़ा

वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत को मिले कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में अमेरिका और सिंगापुर की हिस्सेदारी एक-तिहाई से अधिक रही जबकि मॉरीशस, ब्रिटेन और नीदरलैंड अन्य प्रमुख निवेशक देश रहे. यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ताजा रिपोर्ट से सामने आई है.

केंद्रीय बैंक ने बुधवार को ‘विदेशी देनदारियां और परिसंपत्तियां सर्वेक्षण’ 2024-25 के अस्थायी नतीजे जारी किए. इसमें भारतीय कंपनियों की विदेशों से जुड़ी निवेश गतिविधियों का ब्योरा दिया गया है. आरबीआई के मुताबिक, इस बार के सर्वेक्षण में 45,702 भारतीय कंपनियों ने जवाब दिया, जिनमें से 41,517 संस्थाओं के खातों में एफडीआई और/ या विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (ओडीआई) दर्ज था.

कुल एफडीआई निवेश 68.75 लाख करोड़ रुपये रहा, जिसमें अमेरिका की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत और सिंगापुर की 14.3 प्रतिशत रही. इनके बाद मॉरीशस (13.3 प्रतिशत), ब्रिटेन (11.2 प्रतिशत) और नीदरलैंड (नौ प्रतिशत) भी एफडीआई के प्रमुख स्रोत रहे. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में आने वाले कुल विदेशी निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा विनिर्माण क्षेत्र में गया, जो कुल एफडीआई इक्विटी का 48.4 प्रतिशत (बाजार मूल्य पर) रहा. सेवा क्षेत्र दूसरे स्थान पर रहा. वित्त वर्ष 2023-24 में कुल एफडीआई 61.88 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया था.

आरबीआई के मुताबिक, विदेशों में भारतीय निवेश (ओडीआई) का कुल मूल्य 11.66 लाख करोड़ रुपये रहा. इसमें सिंगापुर की हिस्सेदारी 22.2 प्रतिशत, अमेरिका की 15.4 प्रतिशत और ब्रिटेन की 12.8 प्रतिशत रही. बाजार मूल्य के हिसाब से पिछले वित्त वर्ष में ओडीआई में 17.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो एफडीआई की 11.1 प्रतिशत वृद्धि से अधिक रही. इसका नतीजा यह हुआ कि भारत आने वाले और यहां से बाहर जाने वाले निवेश का अनुपात घटकर 5.9 गुना रह गया, जो वित्त वर्ष 2023-24 में 6.3 गुना था.

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