अदाणी सोलर का देश के स्वच्छ ऊर्जा अभियान में बड़ा योगदान, 15,000 मेगावाट के सौर मॉड्यूल भेजे

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 02 Nov 2025 09:17 PM
अदाणी सोलर का देश के स्वच्छ ऊर्जा अभियान में बड़ा योगदान, 15,000 मेगावाट के सौर मॉड्यूल भेजे
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नयी दिल्ली. अदाणी सोलर ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में 15,000 मेगावाट से अधिक सौर मॉड्यूल भेजकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह पहली और सबसे तेज भारतीय विनिर्माता बन गई है. अधिकारियों ने बताया कि कुल खेप में से 10,000 मेगावाट भारत में तैनात किए गए और 5,000 मेगावाट विदेशों में निर्यात किए गए, जो लगभग 7,500 फुटबॉल मैदानों को कवर करने वाले 2.8 करोड़ मॉड्यूल के बराबर है.

इनमें से लगभग 70 प्रतिशत मॉड्यूल अदाणी के भारत-निर्मित सौर सेल का उपयोग करके उत्पादित किए गए थे, जो ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत पहल को आगे बढ.ाने में कंपनी की भूमिका को मजबूत करता है. अदाणी सोलर अगले वित्त वर्ष तक अपनी उत्पादन क्षमता को 4,000 मेगावाट से दोगुना से अधिक करके 10,000 मेगावाट करने की योजना बना रही है और आने वाले वर्षों में 15,000 मेगावाट अतिरिक्त उत्पादन करने का लक्ष्य रखती है.

शोध फर्म वुड मैकेंजी द्वारा दुनिया के शीर्ष 10 सौर मॉड्यूल उत्पादकों में शामिल यह कंपनी एकमात्र भारतीय विनिर्माता है. वुड मैकेंजी ने पिछले सप्ताह एक रिपोर्ट में कहा कि भारत की सौर मॉड्यूल निर्माण क्षमता 2025 तक 125 गीगावाट को पार करने की राह पर है, जो घरेलू बाजार की लगभग 40 गीगावाट की मांग से तीन गुना से भी ज़्यादा है. ‘भारतीय सौर आपूर्ति श्रृंखला में एक आदर्श लहर’ नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि निकट भविष्य की चुनौतियों के बावजूद, भारत में चीन के सौर आपूर्ति श्रृंखला प्रभुत्व का एक बड़े पैमाने पर विकल्प बनने की स्पष्ट क्षमता है.

35 विशिष्ट चैनल भागीदारों के माध्यम से 550 से अधिक जिलों में खुदरा उपस्थिति के साथ, अदाणी सोलर भारत का सबसे बड़ा सौर मॉड्यूल वितरण नेटवर्क संचालित करती है. कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, ”हमारा 15,000 मेगावाट का लक्ष्य भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता और स्वच्छ ऊर्जा भविष्य के प्रति अदाणी सोलर की दृढ. प्रतिबद्धता को दर्शाता है.” अधिकारियों ने बताया कि अदाणी सोलर के खेप के प्रभाव में 50 लाख घरों को किफायती सौर ऊर्जा से बिजली देना, 2,500 हरित नौकरियों का सृजन, सालाना छह करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी और 65,000 किलोमीटर तक फैले मॉड्यूल शामिल हैं, जो पृथ्वी का 1.5 बार चक्कर लगाने के लिए पर्याप्त हैं. भारत की सौर विनिर्माण क्षमता 2014 के 2.3 गीगावाट से बढ.कर 2025 तक अनुमानित 100 गीगावाट हो गई है, और इस क्षेत्र में अब 100 से अधिक घरेलू विनिर्माता सक्रिय हैं.

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