दिल्ली विस्फोट मामले में गिरफ्तार डॉक्टर के घर की गहन तलाशी, पूरे उप्र में कड़ी की गयी सुरक्षा

अंतरराज्यीय आतंकी मॉड्यूल: गिरफ्तार महिला डॉक्टर जैश-ए-मोहम्मद के संगठन का हिस्सा

लखनऊ/नयी दिल्ली. दिल्ली में लालकिले के पास हुए कार विस्फोट के एक दिन बाद मंगलवार को पूरे उत्तर प्रदेश में सुरक्षा चौकसी और सघन निरीक्षण ब­ढ़ा दिया गया. इस विस्फोट में कम से कम 12 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए. आतंकवाद-रोधी एजेंसियों और पुलिस दलों ने लखनऊ सहित कई शहरों में तलाशी अभियान चलाया.

राजधानी लखनऊ में आतंकवाद-रोधी दस्ते (एटीएस), लखनऊ पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की एक संयुक्त टीम ने दिल्ली विस्फोट मामले में पहले गिरफ्तार की गई डॉक्टर शाहीन शाहिद के मुत्तकीपुर स्थित आवास पर गहन तलाशी अभियान चलाया.
सूत्रों ने बताया कि अधिकारियों ने शाहीन की पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी जुटाने के लिए दस्तावेज एकत्र किये और परिवार के सदस्यों तथा पड़ोसियों से पूछताछ की.

शाहीन के पिता सैयद अहमद अंसारी ने संवाददाताओं को बताया कि वह दिल्ली धमाके के मामले में अपनी बेटी की कथित संलिप्तता के बारे में सुनकर हैरान हैं. उन्होंने कहा, ”मेरे तीन बच्चे हैं. मेरा सबसे बड़ा बेटा मोहम्मद शोएब यहां मेरे साथ रहता है. मेरी बेटी शाहीन शाहिद और मेरा सबसे छोटा बेटा परवेज अंसारी है. मैंने शाहीन से आखिरी बार लगभग एक महीने पहले बात की थी. मैंने उसे कभी भी डॉक्टर मुजम्मिल या ऐसी गतिविधियों से जुड़े किसी भी व्यक्ति का जिक्र करते नहीं सुना.” पुलिस सूत्रों ने बताया कि शाहीन के डॉक्टर मुजम्मिल से संबंध होने की आशंका है. पुलिस सूत्रों ने बताया कि मुजम्मिल के पास से पहले फरीदाबाद में भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद किया गया था. पुलिस सूत्रों ने बताया कि मुजम्मिल जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद का कथित रूप से समर्थन करने वाले एक सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े एक अलग मामले में वांछित था.

इस बीच, दिल्ली विस्फोट के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. पुलिस ने भीड़-भाड़ वाले बाजारों, मेट्रो स्टेशन, शॉपिंग मॉल, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर तलाशी अभियान चलाया. संवेदनशील स्थानों पर बम निरोधक दस्ते और श्वान दस्तों को भी तैनात किया गया है.

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ”सभी प्रमुख जिलों में सतर्कता ब­ढ़ा दी गई है और दिन-रात गश्त करने के निर्देश जारी किए गए हैं. अगले आदेश तक अलर्ट जारी रहेगा.” अधिकारियों ने बताया कि लखनऊ के अलावा, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या, मथुरा-वृंदावन, गोरखपुर, कानपुर, सहारनपुर और अलीग­ढ़ जैसे प्रमुख स्थानों सहित पूरे राज्य में सुरक्षा चौकसी ब­ढ़ा दी गयी है.

पुलिस के अनुसार, दिल्ली विस्फोट में मारे गए 12 लोगों में से दो की पहचान अमरोहा निवासी अशोक कुमार (45), शामली जिले के नौमान अंसारी (18) और उत्तर प्रदेश के दो अन्य लोगों के रूप में हुई है. दिल्ली विस्फोट से कुछ दिन पहले गुजरात एटीएस ने रविवार को बनासकांठा जिले में संदिग्ध आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप में लखीमपुर खीरी के निवासी मोहम्मद सुहैल को गिरफ्तार किया था. हालांकि उसका दिल्ली में हुए विस्फोट से जाहिर तौर पर कोई सम्बन्ध नहीं बताया जा रहा है. उसके परिवार ने दावा किया है कि वह निर्दोष है और उसे गलत तरीके से फंसाया गया है.

सिंगाही कस्बे का निवासी सुहैल अपने पिता सलीम, मां रुखसाना, भाई वसीम और एक छोटी बहन के साथ रहता था. उसकी मां ने कहा कि उसका बेटा पिछले तीन सालों से मुजफ़्फरनगर के दारुल उलूम में ‘हाफिजा’ की प­ढ़ाई कर रहा था और कभी किसी गलत काम में शामिल नहीं रहा.

सुहैल की मां ने संवाददाताओं से कहा, ”मेरा बेटा ऐसे कामों में कैसे शामिल हो सकता है? वह बहुत ही सीधा-सादा था. हमें उसके मदरसे से या कस्बे से उसके बारे में कभी कोई शिकायत नहीं मिली.” उन्होंने बताया कि सुहैल आखिरी बार जून में बकरीद के दौरान घर आया था और बाद में प­ढ़ाई फिर से शुरू करने के लिए वापस चला गया था. कुछ दिन पहले उसने अपनी बहन को बताया था कि वह छुट्टियों में गुजरात गया है.

इससे पहले, गत सात नवंबर को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सहारनपुर में डॉक्टर अदील अहमद को गिरफ्तार किया था. उसे श्रीनगर में गत 28 अक्टूबर को आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के समर्थन में पोस्टर लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.
अधिकारियों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग निवासी अदील ने सहारनपुर के अंबाला रोड स्थित बापू विहार कॉलोनी में एक मकान किराए पर लिया था जहां वह पिछले छह महीनों से एक निजी अस्पताल में काम कर रहा था.

अस्पताल के प्रबंधक डॉक्टर मनोज मिश्रा ने कहा, ”अदील ने कभी किसी संदिग्ध गतिविधि में शामिल होने का कोई संकेत नहीं दिया. वह विनम्र था और अपने मरीजों के इलाज पर ध्यान केंद्रित करता था. अगर कुछ भी गलत लगता, तो हम पुलिस को सूचित करते.” उत्तर प्रदेश एटीएस और अन्य केंद्रीय इकाइयाँ आदिल के स्थानीय संपर्कों और दिल्ली विस्फोट मामले के अन्य आरोपियों के साथ उसके संभावित संबंधों का पता लगाने के लिए सहारनपुर में अपनी जांच जारी रखे हुए हैं.

अंतरराज्यीय आतंकी मॉड्यूल: गिरफ्तार महिला डॉक्टर जैश-ए-मोहम्मद के संगठन का हिस्सा

अंतरराज्यीय आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ के बाद गिरफ्तार किए गए आठ लोगों में एक महिला डॉक्टर भी शामिल थी. शुरुआती जांच के आधार पर अधिकारियों ने दावा किया कि वह प्रतिबंधित जैश-ए-मोहम्मद द्वारा पिछले महीने गठित जमात-उल-मोमिनात का हिस्सा थी.

सोमवार को श्रीनगर ले जाने के बाद गिरफ्तार की गयी डॉ. शाहीन सईद पर आरोप है कि वह भारत में जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) की महिला भर्ती शाखा का हिस्सा है. अधिकारियों ने आरोप लगाया कि करीब 35 वर्षीय और फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय से जुड़ी डॉ. सईद पाकिस्तान में अपने आका के संपर्क में थी और उसे आतंकवादी गतिविधियों के लिए अधिक से अधिक महिलाओं की भर्ती करने के निर्देश दिए गए थे.

लखनऊ में उसके पिता ने आतंकवादी गतिविधियों में उसकी संलिप्तता के बारे में अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि उन्हें उसकी गिरफ्तारी के बारे में मीडिया के माध्यम से ही पता चला है. प्रतिबंधित जैश-ए-मोहम्मद द्वारा अपनी महिला इकाई बनाने के फैसले के बाद जमात-उल-मोमिनात का गठन हुआ. इसके गठन की घोषणा इस साल अक्टूबर में जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी मसूद अजहर के नाम एक पत्र के माध्यम से की गई थी और सादिया अजहर को इसका प्रमुख नामित किया गया था.

सादिया यूसुफ अजहर की पत्नी है, जो सात मई को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मारे गए कई लोगों में से एक था, जब भारत ने बहावलपुर में मरकज सुभानअल्लाह में जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय पर हमला किया था. डॉ. सईद की कथित भूमिका से संकेत मिलता है कि जैश-ए-मोहम्मद महिला हमलावरों की भर्ती करने की आईएसआई की नीति का अनुसरण कर रहा है, जैसा कि इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) जैसे समूहों द्वारा अपनाया गया है, जो युद्ध या आत्मघाती अभियानों में महिलाओं का इस्तेमाल करते हैं. अधिकारियों ने बताया कि इस घटनाक्रम ने जम्मू-कश्मीर पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और जम्मू-कश्मीर में कार्यरत सेना की चिंता को भी उजागर किया है कि आईएसआई महिलाओं को आतंकी मॉड्यूल में शामिल करने के लिए अधिक प्रयास कर रही है.

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने युवाओं, विशेषकर छात्राओं के बीच कथित कट्टरपंथ को लेकर बढ.ती चिंताओं के कारण कई शैक्षणिक संस्थानों, विशेषकर निजी स्कूलों पर अपनी निगरानी बढ.ा दी है. अधिकारियों ने बताया कि कश्मीर के कुछ निजी स्कूलों से परेशान करने वाली सूचनाएं मिल रही हैं जो कथित तौर पर युवाओं, मुख्य रूप से लड़कियों के बीच कट्टरपंथी विचारधाराओं के प्रसार में संलिप्त हैं. महिलाओं में कट्टरपंथ की बढ.ती प्रवृत्ति ने कुछ पूर्व अलगाववादी समूहों को भी चौंका दिया है, उन्हें चिंता है कि नियंत्रण रेखा (एलओसी) के दूसरी ओर से आने वाली एक और धार्मिक उग्रवाद की लहर घाटी की सदियों पुरानी ‘सूफी’ परंपरा को अस्थिर कर देगी.

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