चुनाव के नजदीक ही ऐसे हादसे क्यों होते हैं?: दिल्ली धमाके पर हिमाचल के मंत्री

दिल्ली विस्फोट: मुस्लिम संगठनों ने सुरक्षा चूक की ओर इशारा किया, निष्पक्ष जांच की मांग की

शिमला/नयी दिल्ली/गुवाहाटी. दिल्ली के लाल किला क्षेत्र के पास हुए धमाके में 12 लोगों की मौत के एक दिन बाद हिमाचल प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने मंगलवार को कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आता कि चुनाव नजदीक आने पर ही ऐसे हादसे क्यों होते हैं. नेगी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भूटान यात्रा पर कटाक्ष करते हुए कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में जब भी कोई संकट आता है, प्रधानमंत्री विदेश में होते हैं.” पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने ने कहा, “मैं समझ नहीं पा रहा कि जब-जब चुनाव आते हैं, तभी इस तरह की घटनाएं क्यों होती हैं.” नेगी ने कहा कि आपने देखा होगा जब पुलवामा की घटना हुई थी, तब चुनाव की चर्चा चल रही थी. पहलगाम हमला भी ऐसे ही समय हुआ था और इस बार बिहार विधानसभा चुनाव हो रहे हैं.

ज्ञात हो कि फरवरी 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 40 जवान शहीद हुए थे, तब लोकसभा चुनाव कुछ ही महीने दूर थे. इसी वर्ष अप्रैल में पहलगाम के एक पर्यटन स्थल पर हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें अधिकतर पर्यटक थे. यह 2019 के बाद कश्मीर घाटी में सबसे घातक हमला था.

हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष की बरसात से हुई तबाही के बाद राहत एवं पुनर्वास कार्यों पर बोलते हुए नेगी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने दो महीने पहले राज्य के लिए 1,500 करोड़ रुपये की सहायता की घोषणा की थी लेकिन यदि मदद समय पर न पहुंचे तो उसका कोई अर्थ नहीं रह जाता.

दिल्ली विस्फोट: मुस्लिम संगठनों ने सुरक्षा चूक की ओर इशारा किया, निष्पक्ष जांच की मांग की

प्रमुख मुस्लिम संगठनों ने दिल्ली में लाल किले के निकट हुए विस्फोट पर मंगलवार को चिंता व्यक्त करते हुए सुरक्षा चूक की ओर इशारा किया तथा सरकार से घटना की व्यापक, निष्पक्ष और बहुआयामी जांच कराने का आग्रह किया. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सोमवार शाम हुए विस्फोट पर गहरा दुख व्यक्त किया है. बोर्ड द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, बोर्ड ने मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है.

बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने राष्ट्रीय राजधानी में ऐतिहासिक लाल किले के निकट हुए विस्फोट पर गंभीर चिंता व्यक्त की. उन्होंने सरकार से इस घटना की व्यापक, निष्पक्ष और बहुआयामी जांच कराने का आग्रह किया. रहमानी ने कहा कि यदि यह कोई दुर्घटना थी, तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है, जिसके परिणामस्वरूप कई निर्दोष लोगों की जान चली गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए.

रहमानी ने कहा, “लेकिन यदि यह आतंकवादी कृत्य था, तो यह अत्यंत चिंताजनक है, तथा देश के सुरक्षा तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न उठाता है, विशेषकर तब, जब राष्ट्रीय राजधानी के सबसे संवेदनशील क्षेत्र भी सुरक्षित नहीं हैं.” उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड शोक संतप्त परिवारों के साथ एकजुटता से खड़ा है और सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता है.
जमात-ए-इस्लामी हिंद (जेआईएच) के अध्यक्ष सैयद सदातुल्ला हुसैनी ने इस विस्फोट पर गहरा दुख व्यक्त किया और पारदर्शी एवं उच्च-स्तरीय जांच की मांग की है. उन्होंने सुरक्षा चूक के लिए तत्काल जवाबदेही और पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए पर्याप्त मुआवजे की भी मांग की है.

हुसैनी ने एक बयान में कहा, “सोमवार शाम दिल्ली में लाल किले के पास हुए घातक विस्फोट से हमें गहरा दुख हुआ है, जिसमें कई लोगों की जान चली गई और कई लोग जख्मी हो गए. हम उन परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया और घायलों के साथ एकजुटता दिखाते हुए उनके शीघ्र और पूर्ण स्वस्थ होने की प्रार्थना करते हैं. हम दुख और पीड़ा की इस घड़ी में दिल्ली के लोगों के साथ हैं.” उन्होंने कहा, “मीडिया की प्रारंभिक खबरों से पता चलता है कि यह एक आतंकवादी कृत्य हो सकता है. अगर जांच एजेंसियां इसकी पुष्टि करती हैं, तो हम इस जघन्य कृत्य की स्पष्ट रूप से निंदा करते हैं और मांग करते हैं कि दोषियों को जल्द से जल्द न्याय के कटघरे में लाया जाए. राष्ट्रीय राजधानी के मध्य में ऐसी घटना सुरक्षा में गंभीर चूक को दर्शाती है.” उन्होंने कहा कि जनता की सुरक्षा के लिए ज.म्मिेदार सत्ता में बैठे लोगों की तत्काल जवाबदेही होनी चाहिए. हुसैनी ने कहा कि नागरिकों का जीवन और सुरक्षा सर्वोपरि है और सरकार को उनकी सुरक्षा के लिए अपना संवैधानिक कर्तव्य निभाना चाहिए.

हुसैनी ने घटना के संबंध में गलत सूचना और सांप्रदायिक बयानबाजी फैलाने के लिए मीडिया और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के कुछ वर्गों की आलोचना भी की. उन्होंने कहा, “संकट की इस घड़ी में, नागरिकों के बीच एकता और एकजुटता की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है. जो लोग अपने वैचारिक या राजनीतिक लाभ के लिए ऐसी घृणित घटनाओं का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें सामने लाया जाना चाहिए और कानून के अनुसार दंडित किया जाना चाहिए.” हुसैनी ने कहा कि घटना की गहन, पारदर्शी और समयबद्ध जांच होनी चाहिए. यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सभी साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच की जाए तथा निष्कर्षों को सार्वजनिक किया जाए.

उन्होंने कहा, “हम जान गंवाने वालों के परिवारों के लिए तत्काल और समुचित अनुग्रह राशि और घायलों के लिए व्यापक चिकित्सा एवं पुनर्वास सहायता की मांग करते हैं. हम दोषियों के लिए कड़ी सज.ा और सुरक्षा चूक के लिए उच्चतम स्तर पर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही की मांग करते हैं.” लाल किले के पास हुए विस्फोट की जांच मंगलवार को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को सौंप दी गई. जांचकर्ताओं ने पुलवामा के एक डॉक्टर पर ध्यान केंद्रित किया है, जिसका संबंध मुख्य रूप से फरीदाबाद से विस्फोटकों की बरामदगी के साथ पर्दाफाश किए गए एक आतंकी मॉड्यूल से है.

लाल किले के पास सोमवार शाम को हुए विस्फोट से कुछ ही घंटे पहले जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े एक ”सफेदपोश” आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ था, जिसमें तीन डॉक्टर समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था और 2,900 किलोग्राम विस्फोटक जब्त किया गया था. यह मॉड्यूल कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था. सोमवार को गिरफ्तार किए गए लोगों में डॉ. मुजम्मिल गनई और डॉ. शाहीन सईद भी शामिल थे जो फरीदाबाद स्थित अल फला विश्वविद्यालय से जुड़े थे. फरीदाबाद से 360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट बरामद किया गया था.

दिल्ली विस्फोट का सोशल मीडिया पर ‘राजनीतिकरण’ करने के आरोप में सेवानिवृत्त प्राचार्य हिरासत में

, 11 नवंबर (भाषा) दिल्ली विस्फोट की घटना का सोशल मीडिया के जरिये कथित तौर ‘राजनीतिकरण’ करने की कोशिश करने के मामले में कछार जिले से एक स्कूल के सेवानिवृत्त प्राचार्य को मंगलवार को हिरासत में लिया गया. असम पुलिस ने यह जानकारी दी. कछार जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) पार्थ प्रोतिम दास ने बताया कि पुलिस ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया और नजरुल इस्लाम बरभुइयां को पूछताछ के लिए तलब किया.

पुलिस ने बताया कि सिलचर शहर के रंगपुर क्षेत्र निवासी बरभुइयां को पहले सिलचर सदर पुलिस थाने और बाद में पूछताछ के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय ले जाया गया. दास ने बताया कि कछार स्थित बांसकांडी एनएमएचएस स्कूल के प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए बरभुइयां ने दिल्ली विस्फोट पर टिप्पणी करते हुए लिखा था, ”चुनाव नजदीक आ रहे हैं.” पुलिस ने दावा किया कि यह टिप्पणी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी घटना का ”राजनीतिकरण” करने के लिए की गई थी.

दास ने कहा, ”उस व्यक्ति ने दिल्ली विस्फोट की खबर पर टिप्पणी करते हुए चुनावों का हवाला दिया और राष्ट्रीय सुरक्षा के एक संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश की. क्या यह टिप्पणी किसी खास मकसद से की गई थी, इसकी जांच की जा रही है.” उन्होंने कहा कि बरभुइयां को ”उसके पोस्ट के पीछे की मंशा और संभावित असर की जांच करने के लिए हिरासत में लिया गया है.” एसएसपी ने कहा, ”दिल्ली में हुई घटना की प्रकृति को देखते हुए, इस तरह की टिप्पणियों से गलत सूचना फैल सकती है या अनावश्यक अटकलें लगाई जा सकती हैं. हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं.” मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने इससे पहले दावा किया था कि धमाके के बाद से लोगों का एक वर्ग फेसबुक पर या तो खबर का स्वागत करते हुए पोस्ट कर रहा है या फिर खुशी वाले इमोजी डाल रहा है.

उन्होंने कहा कि इस वर्ष अप्रैल में कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भी ऐसी ही प्रवृत्ति देखने को मिली थी.
शर्मा ने कहा, ”इसका अभिप्राय है कि ये लोग आतंकवादियों का समर्थन कर रहे हैं. हम कल रात से ही उनकी पृष्ठभूमि की जांच कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर हम उनमें से कुछ को गिरफ्तार भी करेंगे ताकि असम में आतंकवाद फिर से पनप न सके या उसे बढ.ावा न मिले.” एसएसपी ने नागरिकों से अपील की कि वे अपुष्ट या राजनीतिक रूप से प्रेरित सामग्री को सोशल मीडिया पर साझा करने से बचें क्योंकि यह मामले की जांच में बाधा उत्पन्न कर सकती है.

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