
कोलकाता: महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के मामलों में न्याय की मांग को लेकर र्चिचत कामदुनी आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहीं मौसुमी कयाल ने बुधवार को बारुईपुर दुष्कर्म और हत्या मामले के एक आरोपी के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की सराहना करते हुए इसे ”असुरों के संहार की शुरूआत” बताया। मुठभेड़ पर प्रतिक्रिया देते हुए कयाल ने कहा कि यह खबर सुनकर उन्हें ”बेहद सुकून मिला”।
उन्होंने कहा कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए ऐसे कड़े कदम जरूरी हैं। मुठभेड़ को बलात्कारियों के लिए ”एकमात्र न्याय” बताते हुए कयाल ने कहा कि ऐसे मामलों में आरोपियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि ”असुरों के इस संहार की शुरूआत” से अपराधियों में भय पैदा होगा। कयाल ने इस कार्रवाई को ”प्रशंसनीय” बताते हुए कहा कि पहले अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिलता था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं।
उन्होंने कहा, ”जांच होनी चाहिए, उनके बयान दर्ज किए जाने चाहिए और उसके बाद उनका मुठभेड़ में मारा जाना चाहिए। यही न्याय है। बलात्कारियों के लिए यही असली सजा है।” कयाल ने कहा कि ऐसी कार्रवाई यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि बलात्कारी ”इस राज्य में सांस तक न ले सकें” और किसी अन्य महिला के खिलाफ अपराध करने की सोच भी न सकें।
उत्तर 24 परगना जिले में 2013 में एक महाविद्यालय की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म और उसकी हत्या के बाद मौसुमी कयाल कामदुनी आंदोलन की प्रमुख आवाजों में उभरकर सामने आई थीं। सामाजिक दबाव और तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा उन्हें ”माओवादी” कहे जाने के बावजूद उन्होंने तत्कालीन राज्य सरकार के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी।
यह आंदोलन पश्चिम बंगाल में यौन हिंसा की पीड़िताओं को न्याय दिलाने के लिए चलाए गए सबसे प्रमुख अभियानों में से एक माना जाता है।
बारुईपुर में 11 वर्षीय एक बच्ची से दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल प्रभास मंडल मंगलवार देर रात पुलिस के साथ हुई कथित मुठभेड़ में मारा गया।
पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कयाल ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान दुष्कर्म के मामलों को अक्सर ”मनगढ़ंत” या ”दिखावटी घटनाएं” बताकर खारिज कर दिया जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि कामदुनी से लेकर आर.जी. कर अस्पताल की घटना तक कई मामलों में आरोपियों को सरकारी वकीलों और कुछ सीआईडी अधिकारियों का संरक्षण मिला।
उन्होंने मौजूदा भाजपा सरकार की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासन ने महिला सुरक्षा के प्रति सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा, ”हम जैसे आम लोग और माताएं बहुत खुश हैं। हमने इस तरह की कार्रवाई की कभी कल्पना भी नहीं की थी।”



