उम्रदराज और असाध्य रोग से पीड़ित कैदियों की शीघ्र रिहाई के लिए नीति बनाएं: न्यायालय

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Thu, 16 Jul 2026 02:59 PM
उम्रदराज और असाध्य रोग से पीड़ित कैदियों की शीघ्र रिहाई के लिए नीति बनाएं: न्यायालय
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नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे उम्रदराज अथवा असाध्य बीमारी से पीड़ित कैदियों की शीघ्र या समयपूर्व रिहाई के लिए तीन महीने के भीतर एक व्यापक नीति तैयार करें।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि इस नीति में रिहाई पर विचार के लिए पात्रता के मानदंड और प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।

विशेष रूप से, इसमें ”असाध्य रोग” की स्पष्ट और एक समान परिभाषा दी जानी चाहिए। पीठ ने यह फैसला राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की उस याचिका पर सुनाया, जिसमें 70 वर्ष से अधिक आयु के तथा असाध्य बीमारी से पीड़ित कैदियों को जमानत पर रिहा करने का अनुरोध किया गया था।

निर्णय सुनाते हुए न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने कहा, ”सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस निर्णय की तिथि से तीन महीने के भीतर उम्रदराज और/या असाध्य बीमारी से पीड़ित कैदियों की शीघ्र अथवा समयपूर्व रिहाई के लिए एक व्यापक नीति तैयार कर उसे अधिसूचित करें।” पीठ ने कहा कि यह नीति संबंधित राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों से परामर्श कर तैयार की जानी चाहिए, ताकि संस्थागत समन्वय सुनिश्चित हो और पात्र कैदियों की प्रभावी पहचान की जा सके।

न्यायालय ने कहा कि नीति में शीघ्र या मानवीय आधार पर रिहाई के लिए दिए जाने वाले आवेदनों को प्रस्तुत करने, उनकी जांच करने और उनका निस्तारण करने की समयबद्ध, पारदर्शी और सुगम प्रक्रिया भी निर्धारित की जानी चाहिए। न्यायालय ने केंद्र, सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को यह भी निर्देश दिया कि वे छह महीने के भीतर अनुपालन की स्थिति बताते हुए शपथपत्र न्यायालय में दाखिल करें।

इस मामले में विस्तृत निर्णय अभी जारी होना बाकी है। पिछले वर्ष मई में उच्चतम न्यायालय ने नालसा की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई थी और केंद्र सरकार सहित अन्य पक्षों से जवाब मांगा था। याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया था कि 70 वर्ष से अधिक आयु के कैदियों तथा असाध्य बीमारी से पीड़ित बंदियों की रिहाई को सुगम बनाने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।

याचिका में कहा गया था कि असाध्य रोग से पीड़ित और उम्रदराज कैदियों को विशेष चिकित्सा देखभाल तथा उन पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता होती है, लेकिन जेलों में क्षमता से अधिक कैदी होने के कारण जेल प्रशासन के लिए ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराना कठिन हो जाता है।

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