तरुण तेजपाल ने यौन उत्पीड़न मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया

नयी दिल्ली: पत्रकार तरुण तेजपाल ने 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय का रुख किया। बंबई उच्च न्यायालय के छह अगस्त के आदेश के खिलाफ अधिवक्ता आदित्य सामद्दार के जरिये अपील दायर की गई।
इससे पहले, गोवा सरकार ने तहलका के पूर्व संपादक को सुनाई गई सजा बढ़ाने की मांग को लेकर शीर्ष न्यायालय का रुख किया था। सरकार का कहना था कि इस मामले में उम्रकैद की सजा दी जानी चाहिए।

उच्च न्यायालय ने अधीनस्थ अदालत द्वारा पांच साल पहले तेजपाल को बरी करने के फैसले को पलट दिया था और उन्हें (तेजपाल को) दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। तेजपाल को 2013 में गोवा में एक पत्रिका द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान होटल की लिफ्ट में अपनी एक कनिष्ठ सहकर्मी से दुष्कर्म करने का दोषी ठहराया गया था।
इससे पहले, 62 वर्षीय पत्रकार ने दावा किया था कि वह राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार हुए हैं।

उच्चतम न्यायालय में दायर याचिका में गोवा सरकार ने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा दी गई सजा तेजपाल द्वारा किए गए अपराधों की प्रकृति और गंभीरता के मुकाबले बेहद कम है। याचिका में कहा गया, ”मौजूदा मामले में सजा बढ़ाकर आजीवन कारावास की जानी चाहिए या अदालत उचित समझे तो कोई अन्य कठोर सजा दी जानी चाहिए। साथ ही, सजा को एक साथ चलाने का निर्देश नहीं दिया जाना चाहिए था।” सरकार ने याचिका में कहा कि चुनौती केवल सजा की अवधि और सजा को एक साथ चलाने के निर्देश तक सीमित है।

तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की कई धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया, जिनमें धारा 376(2)(एफ), धारा 354(ए) और धारा 354(बी) शामिल हैं। धारा 376(2)(एफ) के तहत अधिकतम सजा आजीवन कारावास का प्रावधान है। तेजपाल ने नरमी बरतने की अपील करते हुए खुद को ”राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार” बताया था और कहा था कि वह दो बेटियों के पिता हैं।

वहीं, गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अधिकतम सजा दिए जाने का अनुरोध किया था। तेजपाल ने फैसले के बाद पत्रकारों से कहा था कि वह इस फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती देंगे। तेजपाल ने यह भी कहा था कि उन्हें भरोसा है कि आखिरकार सच सामने आएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button