अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को लेकर सख्ती के बीच भारतीय आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने अपनी भर्ती योजनाओं पर भरोसा जताया है। कंपनी ने कहा है कि वह अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15 हजार अतिरिक्त लोगों को नौकरी देने की योजना पर कायम है। अमेरिकी सरकार की कार्रवाई के बावजूद टीसीएस को अपनी भर्ती रणनीति और ग्राहकों के साथ कामकाज पर बड़े असर की उम्मीद नहीं है।
अमेरिका की पाबंदी पर TCS ने क्या कहा?
टीसीएस ने अमेरिकी सरकार की ओर से स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम यानी PERM पर की गई कार्रवाई के बाद अपनी स्थिति स्पष्ट की। कंपनी ने कहा कि वह अमेरिकी श्रम विभाग के सभी निर्देशों का पालन करेगी।
कंपनी के मुताबिक, उसकी अमेरिकी कार्ययोजना स्थानीय लोगों की भर्ती पर केंद्रित है। इसके लिए टीसीएस अपने कार्यालयों और अन्य भर्ती माध्यमों के जरिए स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर देती है।
पांच वर्षों में 15 हजार अतिरिक्त नौकरियां
टीसीएस ने अमेरिका में अगले पांच वर्षों के दौरान 15 हजार अतिरिक्त लोगों को नौकरी देने की अपनी योजना दोहराई है। इस पहल के जरिए कंपनी अमेरिकी बाजार में अपनी स्थानीय कर्मचारी संख्या बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहती है।
कंपनी के अनुसार, अमेरिका में उसके 31 कार्यालय और डिलीवरी केंद्र हैं, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे में कंपनी को उम्मीद है कि उसकी स्थानीय भर्ती रणनीति कारोबार की जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी।
TCS को बड़े असर की आशंका क्यों नहीं?
टीसीएस का कहना है कि पिछले दो वर्षों में PERM कार्यक्रम के तहत उसके आवेदनों की संख्या इकाई के अंक में रही है। इसी आधार पर कंपनी को उम्मीद है कि इस कार्यक्रम से निलंबन का उसकी भर्ती योजनाओं और ग्राहकों को दी जाने वाली सेवाओं पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
हालांकि, कंपनी ने अमेरिकी श्रम विभाग के निर्देशों का पालन करने की प्रतिबद्धता जताई है। निलंबन का वास्तविक प्रभाव आगे की नियामकीय प्रक्रिया और संबंधित आवेदनों की स्थिति पर निर्भर करेगा।
PERM कार्यक्रम क्या है?
PERM यानी Program Electronic Review Management अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके तहत नियोक्ता को यह साबित करना होता है कि किसी विदेशी कर्मचारी को स्थायी नौकरी देने से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन, कामकाजी परिस्थितियों या रोजगार के अवसरों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
इस कार्यक्रम से जुड़ी प्रक्रिया में नियोक्ता की ओर से श्रम प्रमाणन हासिल करना शामिल होता है। इसके बाद रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं। PERM पर रोक का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका में सभी प्रकार के वीजा या हर तरह की भर्ती पर स्वतः प्रतिबंध लग गया है।
किन आईटी कंपनियों पर हुई कार्रवाई?
रिपोर्ट के मुताबिक, टीसीएस के अलावा इन्फोसिस, कॉग्निजेंट, विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी और कैपजेमिनी का नाम भी इस कार्रवाई में शामिल है। अमेरिकी सरकार ने कथित अनियमितताओं की जांच के बीच इन कंपनियों से संबंधित PERM आवेदनों पर कार्रवाई की है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर चिंता जताई है। वहीं, भारतीय आईटी उद्योग के संगठन नैसकॉम का कहना है कि आव्रजन नीति और कुशल कर्मचारियों की आवाजाही को अलग-अलग मुद्दों के रूप में देखा जाना चाहिए।
नैसकॉम ने क्या कहा?
नैसकॉम के मुताबिक, भारतीय आईटी कंपनियां एच-1बी वीजा पर निर्भरता कम करने और अमेरिका में स्थानीय भर्ती बढ़ाने की दिशा में काम कर रही हैं। ऐसे में PERM कार्यक्रम पर कार्रवाई और कंपनियों की स्थानीय भर्ती रणनीति के प्रभावों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
कुल मिलाकर, अमेरिकी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया से जुड़ी सख्ती के बावजूद टीसीएस ने अपने अमेरिकी कारोबार और भर्ती योजनाओं को लेकर भरोसा जताया है। हालांकि, अगले पांच वर्षों में 15 हजार अतिरिक्त नौकरियों का लक्ष्य पूरा होना अमेरिकी नीतियों, कारोबारी मांग और कंपनी की भर्ती रणनीति पर निर्भर करेगा।