प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत का संगीत, नृत्य, सिनेमा और खानपान देश को दुनिया भर के समाजों से जोड़ रहे हैं तथा भारत की सांस्कृतिक विरासत को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से पहचान मिल रही है। मोदी ने 14 से 16 अक्टूबर तक विज्ञान भवन में आयोजित ‘बृहत्तर भारत : विश्वभर में भारत के सांस्कृतिक संबंधों पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन’ के प्रतिभागियों को भेजे लिखित संदेश में यह भी कहा कि सरकार स्मारकों के संरक्षण के साथ-साथ ‘ज्ञान भारतम’ पहल के जरिए देश की पांडुलिपियों की विरासत को भी संरक्षित कर रही है।
केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री का संदेश पढकर सुनाया।
मोदी ने कहा कि प्राचीन कलाकृतियों को विदेशों से वापस लाने के प्रयासों में फिर तेजी आई है और भारत की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिल रही है।
संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) इस सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। सम्मेलन का विषय भारत की सांस्कृतिक विरासत और देश की सीमाओं से परे फैली उसकी व्यापक सभ्यतागत विरासत है।
इसके उद्घाटन सत्र में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र ंिसह शेखावत भी मौजूद थे। सम्मेलन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधि, राजदूत और विद्वान हिस्सा ले रहे हैं तथा दुनिया के अन्य देशों के साथ भारत के ऐतिहासिक एवं वर्तमान सांस्कृतिक संबंधों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने बताया कि यह सम्मेलन बृहत्तर भारत परिषद की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। बृहत्तर भारत परिषद को ‘ग्रेटर इंडिया सोसाइटी’ के नाम से भी जाना जाता है।
इस संस्था की स्थापना भारतीय विद्वानों के एक समूह ने 14 अक्टूबर 1926 को तत्कालीन कलकत्ता में की थी और रवीन्द्रनाथ ठाकुर इसके आध्यात्मिक मार्गदर्शक थे।