नई दिल्ली। भारतीय निर्वाचन आयोग के कामकाज और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कथित तौर पर एकतरफा फैसले लेने के आरोपों से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को सुनवाई करेगा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ इन मामलों की सुनवाई करेगी। याचिकाओं में मांग की गई है कि यह स्पष्ट किया जाए कि मुख्य चुनाव आयुक्त अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना निर्वाचन आयोग की ओर से फैसले नहीं ले सकते।
चुनाव आयोग में अंदरूनी मतभेद पर उठे सवाल
याचिकाओं में उन खबरों का हवाला दिया गया है, जिनमें दावा किया गया कि निर्वाचन आयोग के नाम पर करीब 14 फैसले लिए गए, जबकि अन्य दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इन पर आपत्ति दर्ज की थी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच दोनों चुनाव आयुक्तों ने एसआईआर से जुड़े विभिन्न कदमों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी।
चुनाव आयोग ने आरोपों को किया खारिज
निर्वाचन आयोग ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल कर इन आरोपों को खारिज किया। आयोग ने कहा कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने इस दावे को गलत बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अन्य दो आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद एकतरफा निर्णय लिए।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने के बाद दाखिल अपीलों के संबंध में आयोग ने कहा कि राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अधिकारियों की ओर से 16.10 लाख अपीलें दाखिल की गईं। आयोग ने इन अपीलों को दाखिल करने के अपने फैसले के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला भी दिया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने की मांग
राकेश कुमार सिंह की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि बहुसदस्यीय निकाय होने के कारण निर्वाचन आयोग के फैसले एकतरफा नहीं लिए जाने चाहिए। याचिका में आयोग के मूल रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग भी की गई है, ताकि पता लगाया जा सके कि विवादित फैसले संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप लिए गए थे या नहीं। याचिकाकर्ता ने अंतरिम राहत के तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग की है।
14 फैसले रद्द करने की मांग
दूसरी याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने दायर की है। इसमें कथित तौर पर एकतरफा लिए गए 14 फैसलों को रद्द करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल गठित करने का अनुरोध किया है। इसमें साइबर सुरक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी के विशेषज्ञों को भी शामिल करने की मांग की गई है।
राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन नेताओं की याचिका
राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं ने भी इसी तरह की याचिका संयुक्त रूप से दायर की है, जिस पर आज सुनवाई होगी। सुनवाई में मुख्य मुद्दा यह होगा कि निर्वाचन आयोग के बहुसदस्यीय ढांचे में फैसले लेने की प्रक्रिया क्या होनी चाहिए और कथित तौर पर आपत्तियों के बावजूद लिए गए फैसलों की जांच किस तरह की जाए। वहीं, निर्वाचन आयोग ने अपने जवाब में सभी फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया है।