प्रेग्नेंसी में करवा चौथ का व्रत रखना चाहिए या नहीं? गायनेकोलॉजिस्ट ने दी जानकारी

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Tue, 27 Oct 2026 02:30 PM
प्रेग्नेंसी में करवा चौथ का व्रत रखना चाहिए या नहीं? गायनेकोलॉजिस्ट ने दी जानकारी
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करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं। लेकिन अगर कोई महिला प्रेग्नेंट है, तो उसके मन में सवाल उठता है कि क्या गर्भावस्था में भूखे-प्यासे रहकर व्रत रखना सुरक्षित है?

दरअसल, प्रेग्नेंसी के दौरान मां और गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत का खास ध्यान रखना जरूरी होता है। लंबे समय तक खाना-पानी न लेने से डिहाइड्रेशन, कमजोरी, चक्कर और ब्लड शुगर कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में क्या गर्भवती महिलाओं को करवा चौथ का निर्जला व्रत रखना चाहिए? क्या कुछ सावधानियों के साथ व्रत रखा जा सकता है? आइए जानते हैं कि गर्भावस्था में करवा चौथ का व्रत रखने को लेकर गायनेकोलॉजिस्ट की क्या सलाह है और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

 

प्रेग्नेंसी में करवा चौथ का व्रत कितना सुरक्षित है?

गायनेकोलॉजिस्ट की सलाह के अनुसार, गर्भावस्था में सूर्योदय से चंद्रोदय तक बिना खाना-पानी के रहना यानी निर्जला व्रत रखना जोखिम भरा हो सकता है। गर्भावस्था में शरीर को पर्याप्त पानी, ऊर्जा और पोषक तत्वों की जरूरत होती है। धार्मिक उपवास और प्रेग्नेंसी पर उपलब्ध रिसर्च सीमित हैं, इसलिए निर्जला व्रत को सभी गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

 

प्रेग्नेंसी में निर्जला व्रत रखने से क्या नुकसान हो सकते हैं?

  •  डिहाइड्रेशन: लंबे समय तक पानी नहीं पीने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है।
  • कमजोरी और चक्कर: खाली पेट रहने से थकान, सिरदर्द और चक्कर आने की समस्या हो सकती है।
  •  ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव: खासकर डायबिटीज से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
  •  गर्भावस्था में जटिलताओं का जोखिम: पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने पर उपवास का जोखिम बढ़ सकता है।

किन गर्भवती महिलाओं को व्रत रखने से बचना चाहिए?

जिन महिलाओं को जेस्टेशनल डायबिटीज, एनीमिया, लगातार उल्टी, डिहाइड्रेशन या हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की समस्या है, उन्हें बिना चिकित्सकीय सलाह के व्रत नहीं रखना चाहिए। गर्भावस्था के शुरुआती या आखिरी महीनों में भी अपनी स्थिति के अनुसार डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

 

अगर करवा चौथ मनाना है, तो क्या करें?

  •  निर्जला व्रत के बजाय डॉक्टर की सलाह से फलाहार या हल्का भोजन लें।
  • दिनभर पर्याप्त पानी और अन्य उपयुक्त तरल पदार्थ पीती रहें।
  •  फल, दूध, दही, मेवे और पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करें।
  • लंबे समय तक खड़े रहने, ज्यादा मेहनत करने और गर्मी में रहने से बचें।
  •  डॉक्टर की सलाह के बिना जरूरी दवाएं या प्रेग्नेंसी सप्लीमेंट लेना बंद न करें।

ध्यान रखें कि केवल फलाहार करने से भी हर गर्भवती महिला के लिए व्रत सुरक्षित नहीं हो जाता। यह फैसला अपनी मेडिकल स्थिति के अनुसार ही लें।

 

व्रत के दौरान ये लक्षण दिखें तो क्या करें?

अगर चक्कर आएं, बहुत कमजोरी महसूस हो, बेहोशी जैसा लगे, पेशाब कम हो या उसका रंग गहरा हो जाए, तो उपवास जारी न रखें और तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। पेट में तेज दर्द, ब्लीडिंग या बच्चे की हलचल कम होने पर तुरंत मेडिकल सहायता लें।

याद रखें कि करवा चौथ की परंपरा निभाना आपकी आस्था का विषय है, लेकिन गर्भावस्था में मां और बच्चे की सेहत सबसे महत्वपूर्ण है। निर्जला व्रत रखने के बजाय डॉक्टर की सलाह से सुरक्षित विकल्प चुनना बेहतर है।

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