हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह ने बताया कि पंजाब, ओडिशा और तमिलनाडु 2030 में होने वाले पुरुष और महिला एफआईएच विश्व कप की मेजबानी की दौड़ में सबसे आगे हैं। ओडिशा दो बार पुरुषों के विश्व कप का मेजबान रह चुका है जबकि तमिलनाडु ने पिछले साल चेन्नई और मदुरै में पुरुषों के जूनियर विश्व कप की मेजबानी की थी।
भारतीय हॉकी का गढ़ रहे पंजाब ने कभी विश्व कप की मेजबानी नहीं की है। वह अभी एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी कर रहा है। यह पिछले 17 वर्ष में पहला मौका है जबकि पंजाब किसी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहा है। भोलानाथ ने पीटीआई से कहा, ”ओडिशा, तमिलनाडु और पंजाब सभी विश्व कप की मेजबानी की दौड़ में शामिल हैं। अगर ओडिशा को फिर से विश्व कप की मेजबानी मिलती है तो यह उसके भी बड़ी उपलब्धि होगी। ओडिशा हमारी पहली प्राथमिकता होगा।” उन्होंने कहा, ”मैं यूं ही हवा में तीर नहीं मारता।
मुझे झूठ बोलना नहीं आता।” भोलानाथ ने कहा कि महासचिव बनने के बाद उनकी प्राथमिकता हॉकी को देश के हर कोने में पहुंचाना रहा है।
उन्होंने कहा, ”मैं हॉकी को देश के हर कोने तक पहुंचाना चाहता हूं। मध्य प्रदेश ने अब तक किसी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की मेजबानी नहीं की है लेकिन अब महिला चैंपियंस ट्रॉफी 19 से 28 नवंबर तक भोपाल में खेली जाएगी।” भोलानाथ ने कहा कि पंजाब को एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि उसकी हॉकी में समृद्ध विरासत रही है।
उन्होंने कहा, ”’जब मैं हॉकी इंडिया का महासचिव बना तो मैंने देखा कि टीम के अधिकतर खिलाड़ी पंजाब से थे। जब मैंने पंजाब के खिलाड़ियों से बात की तो उन्होंने कहा कि वह दुनिया भर के देशों में खेल चुके हैं, लेकिन उनके माता-पिता ने उन्हें कभी अंतरराष्ट्रीय मैच खेलते नहीं देखा था। इसलिए मैं पंजाब में अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट आयोजित करने के लिए प्रतिबद्ध था।” पीटीआई ने इस महीने की शुरूआत में खबर दी थी कि चार सीनियर खिलाड़ी मनदीप सिंह, जरमनप्रीत सिंह, अमित रोहिदास और नीलाकांता शर्मा एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी के रूप में भारत की तरफ से अपना अंतिम टूर्नामेंट खेलेंगे।
नीलाकांता पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि यह उनका आखिरी टूर्नामेंट होगा, वहीं मनदीप, जरमनप्रीत और रोहिदास ने टीम में बने रहने की इच्छा व्यक्त की है। भोलानाथ ने कहा, ”यह हॉकी इंडिया का फैसला नहीं है। मैं नहीं जानता कि यह किसका फैसला है। हमने ऐसा कोई फैसला नहीं किया है। जो खिलाड़ी फिट और सक्षम हैं, वे खेलते रहेंगे। ईश्वर भी उन्हें खेलने से नहीं रोक पाएगा और जो सक्षम नहीं हैं, भगवान भी उन्हें नहीं खिला पाएंगे। हम अगले ओलंपिक में पदक जीतना चाहते हैं।”