त्रिसूर. गुरुवयूर श्री कृष्ण मंदिर के भंडार में मौजूद चांदी की सदियों पुरानी वस्तुओं को सोने में परिर्वितत किया जाएगा. यह कोई चमत्कार नहीं है बल्कि मंदिर प्रबंधन की रचनात्मक योजना है जिसमें वर्षों से अप्रयुक्त संपत्ति का उपयोग किया जाएगा. सूत्रों ने बताया कि भक्तों द्वारा दान किए गए गहने, बर्तन और अन्य वस्तुओं को मंदिर परिसर में एक कमरे में रखा गया है.
मंदिर प्रबंधन निकाय गुरुवयूर देवास्वोम ने भारत सरकार की हैदराबाद स्थित टकसाल के साथ एक समझौता किया है जिसमें चांदी की पांच टन से अधिक वस्तुओं को चांदी की ईंटों में बदला जाएगा. टकसाल में चांदी की वस्तुओं को ईंटों में बदलने से पहले शुद्ध किया जाएगा. देवास्वोम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चांदी की ईंटों को भारत सरकार की मुंबई टकसाल में भेजा जाएगा और इनके बदले समान सोने की ईंटें ली जाएंगी.
उन्होंने योजना की जानकारी देते हुए बताया कि सोने की ईंटों को मुंबई में भारतीय स्टेट बैंक की सर्राफा शाखा में जमा किया जाएगा.
देवास्वोम के उच्च अधिकारी ने पीटीआई-भाषा को बताया, ” देवास्वोम के निर्णय के अनुसार, मंदिर प्रशासन ने एक दिन पहले हैदराबाद स्थित टकसाल के साथ एक समझौता किया.” उन्होंने बताया कि आमतौर पर चांदी की किसी भी वस्तु में केवल 60 प्रतिशत चांदी ही शुद्ध होती है.
उन्होंने बताया कि मंदिर के भंडार में सोने की वस्तुओं के एक हिस्से को भी हाल ही में सोने की ईंटों में बदला गया और इसी तरह जमा किया गया. उन्होंने कहा कि इस क्रम में मंदिर को छह करोड़ रुपये का ब्याज प्राप्त हुआ. अधिकारी ने कहा कि देवास्वोम कुछ समय से चांदी के भंडार का उपयोग करने के व्यावहारिक और रचनात्मक तरीकों के बारे में सोच रहा था.
गुरुवयूर श्री कृष्ण मंदिर ने हाल ही में बैंक में जमा राशि का विवरण सार्वजनिक किया था. बैंकों में मंदिर के 1,700 करोड़ रुपये जमा हैं और उसके पास 260 किलोग्राम सोने का भंडार है. सूचना का अधिकार (आरटीआई) संबंधी एक आवेदन के जवाब में, मंदिर के अधिकारियों ने कहा कि मंदिर के पास 263.637 किलोग्राम सोना है और 20,000 सोने के लगभग लॉकेट हैं. सदियों पुराने मंदिर में भगवान विष्णु की कृष्ण के रूप में पूजा की जाती है और हर वर्ष देश भर से हजारों लोग यहां आते हैं.