महिला आरक्षण को लागू किए बिना इसे चुनाव में भुनाने के लिए बेताब हैं प्रधानमंत्री: कांग्रेस

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 20 Sep 2023 09:23 PM
महिला आरक्षण को लागू किए बिना इसे चुनाव में भुनाने के लिए बेताब हैं प्रधानमंत्री: कांग्रेस
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नयी दिल्ली/लखनऊ. कांग्रेस ने बुधवार को महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आरक्षण को तत्काल लागू किए बिना अगले लोकसभा चुनाव में इसे भुनाने के लिए बेताब हैं. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”महिला आरक्षण पर 2010 और 2023 में सरकारों की नीति और नियत की एक संक्षिप्त तुलना. दोनों विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण के प्रावधान वाले हैं. दोनों विधेयक में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए कोटे के भीतर कोटा है.”

उनका कहना था, ”मुख्य अंतर यह है कि 2010 के विधेयक में महिला आरक्षण का क्रियान्वयन 2023 के विधेयक के विपरीत तत्काल और बिना किसी शर्त के होना था जबकि इस विधेयक के साथ जनगणना (जो अभी तक नहीं हुई है) और परिसीमन (जो बहुत विवादास्पद है) की शर्तें हैं.” रमेश ने महात्मा गांधी के एक कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस मामले में जो किया है उसके लिए सिर्फ यही कहा जा सकता है कि यह एक दीवालिया बैंक से भुनाने के लिए दिया गया आगे की तारीख का चेक है.

उन्होंने कहा, ”लोकसभा में भाजपा की ओर से बोलने वाले यह समझाने की बहुत कोशिश कर रहे हैं कि वे 2026 के बाद पहली जनगणना के उपरांत परिसीमन के प्रावधान के संबंध में संविधान का पालन कर रहे हैं. लेकिन वे यह समझाने में सफल नहीं होंगे कि महिला आरक्षण को लागू करने के लिए उसे सबसे पहले परिसीमन से जोड़ने की आवश्यकता क्यों है? भाजपा ने 2010 में ऐसी किसी शर्त के बिना ही विधेयक का समर्थन किया था.” रमेश ने आरोप लगाया, ”यह और कुछ नहीं बल्कि प्रधानमंत्री द्वारा 2024 के चुनावों में महिलाओं के आरक्षण को वास्तव में लागू किए बिना उनके वोट को भुनाने की बेताबी को दिखाता है!” ‘

सरकारी चाहती है कि ‘सवर्ण महिलाओं’ का प्रतिनिधित्व बढ़े, ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं का नहीं: ओवैसी

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को लोकसभा में महिला आरक्षण से संबंधित विधेयक का विरोध किया और आरोप लगाया कि सरकार संसद में सिर्फ ‘सवर्ण महिलाओं’ का प्रतिनिधित्व बढ.ाना चाहती है तथा उसे अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) एवं मुस्लिम समुदाय की महिलाओं की चिंता नहीं है.

लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीट आरक्षित करने के प्रावधान वाले ‘संविधान (एक सौ अट्ठाईसवां संशोधन) विधेयक, 2023’ पर निचले सदन में चर्चा में भाग लेते हुए उन्होंने यह दावा भी किया कि यह विधेयक समावेशी नहीं है और यह कुछ खास लोगों के लिए है.

उन्होंने सवाल किया कि ओबीसी और मुस्लिम समुदायों के लिए आरक्षण का प्रावधान क्यों नहीं किया गया? ओवैसी के अनुसार, संसद में ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं का प्रतिनिधित्व बहुत कम है. उनका कहना था, ”प्रधानमंत्री ओबीसी हैं, लेकिन आज सदन में ओबीसी समुदाय का प्रतिनिधित्व महज 20 प्रतिशत है.” उन्होंने आरोप लगाया, ”मोदी सरकार चाहती है कि संसद में सवर्ण महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ.े, ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं का प्रतिनिधित्व नहीं बढ.े…सरकार चाहती है कि संसद में बड़े लोग प्रवेश करें, वह नहीं चाहती कि छोटे लोग इस संसद में प्रवेश करें.” ओवैसी ने इस विधेयक को ‘चुनावी स्टंट’ भी करार दिया.

महिला आरक्षण विधेयक ‘जुमला’, उन्हें बेवकूफ बनाने की मंशा से लाया गया : आप

‘आप’ नेता और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने बुधवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)नीत केंद्र सरकार महिला आरक्षण विधेयक महिलाओं को ‘बेवकूफ’ बनाने की मंशा से लेकर आई है क्योंकि परिसीमन और जनगणना की शर्तों की वजह से इसे 2039 से पहले लागू ही नहीं किया जा सकता.

सिंह ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) विधेयक का समर्थन करती है लेकिन चाहती है कि इसे 2024 के लोकसभा चुनाव से ही लागू किया जाए. उन्होंने आरोप लगाया, ” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किए गए सभी वादे जुमला साबित हुए हैं. महिला आरक्षण विधेयक भी जुमला है और यह महिलाओं को बेवकूफ बनाने की मंशा से लाया गया है. हम लगातार कह रहे हैं कि यह ‘महिला बेवकूफ बनाओ बिल’ है.”

मायावती ने महिला आरक्षण विधेयक के कुछ प्रावधानों को लेकर आशंका जताई

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने बुधवार को सरकार से महिला आरक्षण विधेयक को जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से अलग करने का आग्रह किया, क्योंकि ऐसा नहीं होने पर इसके क्रियान्वयन में कई वर्षों तक “देरी” होगी.

मायावती ने सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा कि महिला आरक्षण “तत्काल” लागू हो जाए. उन्होंने कहा कि विधेयक के कुछ प्रावधानों को इस तरह से तैयार किया गया है कि आरक्षण का लाभ अगले 15 या 16 वर्षों तक या बाद के “कई चुनावों” तक महिलाओं तक नहीं पहुंच पाएगा. सरकार ने संसद के निचले सदन, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण प्रदान करने से संबंधित ऐतिहासिक ‘नारीशक्ति वंदन विधेयक’ को मंगलवार को लोकसभा में पेश किया.

विधेयक को पहले ही समर्थन दे चुकीं बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने कहा, ”इस संशोधन विधेयक के तहत इस महिला आरक्षण विधेयक पास होने के बाद पहले पूरे देश में जनगणना करायी जाएगी. यह विधेयक पारित तो हो जाएगा लेकिन तुरंत लागू नहीं होगा. जब यह जनगणना पूरी हो जाएगी तो उसके पश्चात ही पूरे देश में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं का परिसीमन पूरा कराया जाएगा. उसके बाद ही महिला आरक्षण संबंधी संशोधन विधेयक लागू होगा.” उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ”इसका मतलब है कि इसे तुरंत लागू नहीं किया जाएगा.”

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