नयी दिल्ली/कोलकाता. कांग्रेस ने मंगलवार को आरोप लगाया कि समाचार पोर्टल ‘न्यूजक्लिक’ के पत्रकारों से जुड़े परिसरों पर छापेमारी को बिहार में जातिवार सर्वेक्षण के ‘विस्फोटक’ निष्कर्षों और देशभर में जातिगत जनगणना कराने की बढ़ती मांग से ‘ध्यान भटकाने की ताजा कोशिश’ करार दिया.
दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने ‘न्यूजक्लिक’ और उसके पत्रकारों से जुड़े परिसरों पर मंगलवार सुबह छापेमारी की. इस कार्रवाई को लेकर पत्रकारों ने रोष व्यक्त किया है. कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि ‘न्यूजक्लिक’ के पत्रकारों से जुड़े परिसरों पर सुबह-सुबह की गई छापेमारी ‘बिहार में जातिवार जनगणना के विस्फोटक निष्कर्षों और देशभर में जातिगत जनगणना की बढ़ती मांग से ध्यान भटकाने की ताजा कोशिश के रूप में सामने आई है.’
खेड़ा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”जब उसे (सरकार को) पाठ्यक्रम से बाहर के प्रश्नों का सामना करना पड़ता है, तो वह अपने सुपरिचित पाठ्यक्रम में मौजूद एकमात्र जवाबी कदम का सहारा लेता है-ध्यान भटकाना.” वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने पोर्टल के खिलाफ कार्रवाई पर सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि यह “लोकतंत्र की जननी” की कार्रवाई नहीं, बल्कि “असुरक्षित और निरंकुश शासन” की कार्रवाई है.
उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, “इतनी मजबूत और निरंकुश सरकार को एक समाचार वेबसाइट से खतरा क्यों महसूस होता है? और वह भी उस वेबसाइट से, जिसके पाठक बहुत अधिक नहीं हैं? उन चीजों के प्रति असहिष्णुता नहीं दिखाई जानी चाहिए, जिनका भारत प्रतिनिधित्व करता है.” थरूर ने कहा, “सरकार ने आज अपना और हमारे लोकतंत्र का अपमान किया है.” कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी छापेमारी को लेकर सरकार की आलोचना की.
उन्होंने आरोप लगाया, ”चाटुकारों की फौज के बावजूद, कुछ पत्रकार अब भी सच बोलने की हिम्मत रखते हैं. लेकिन प्रधानमंत्री को सच बोलने वालों और सवाल पूछने वालों से विशेष समस्या है.” श्रीनेत ने कहा, ”इसलिए ऐसे लोगों पर छापे मारे जाएंगे, उन्हें डराया जाएगा, लेकिन साहेब यह भूल जाते हैं कि हर कोई रीढ़ की हड्डी के बगैर नहीं होता, जैसा कि चाटुकारों के साथ होता है.”
कांग्रेस नेताओं की यह प्रतिक्रिया बिहार में नीतीश कुमार सरकार द्वारा 2024 के संसदीय चुनावों से कुछ महीने पहले राज्य में हुए बहुप्रतीक्षित जाति सर्वेक्षण के निष्कर्ष जारी करने के एक दिन बाद आई है. सर्वे से पता चला है कि बिहार की कुल आबादी में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) और ईबीसी (अत्यंत पिछड़ा वर्ग) की कुल हिस्सेदारी 63 प्रतिशत है.
‘जितनी आबादी, उतना हक’ के लिए कांग्रेस नेताओं की वकालत पर सिंघवी का विरोधाभासी रुख
कांग्रेस द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर जाति जनगणना कराने और आबादी के अनुपात में अधिकार दिये जाने की जोरदार वकालत करने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक सिंघवी ने मंगलवार को सधे हुए अंदाज में कहा कि यह अंतत? बहुसंख्यकवाद का रूप ले लेगा. कांग्रेस के प्रवक्ता और इसकी शीर्ष नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य सिंघवी ने सोमवार को बिहार में जाति जनगणना के आंकड़े जारी होने के बाद राहुल गांधी और पार्टी के अन्य नेताओं के ‘जितनी आबादी, उतना हक’ के नारे के विपरीत रुख अख्तियार किया.
सिंघवी ने ‘एक्स’ पर लिखा, ”अवसरों की समानता कभी परिणामों की समानता के बराबर नहीं होती. ‘जितनी आबादी उतना हक’ का समर्थन कर रहे लोगों को पहले इसके परिणामों को पूरी तरह समझना होगा. अंतत: यह बहुसंख्यकवाद में परिणत होगा.” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या ‘आबादी’ के अनुपात में अधिकार दिये जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार गरीबों का है.
मोदी ने यह भी पूछा कि क्या कांग्रेस मुसलमानों के अधिकारों को कम करना चाहती है.
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”बिहार की जातिगत जनगणना से पता चला है कि वहां ओबीसी, एससी और एसटी 84 प्रतिशत हैं. केंद्र सरकार के 90 सचिवों में से सिर्फ 3 ओबीसी हैं, जो भारत का मात्र 5 प्रतिशत बजट संभालते हैं!”
राहुल गांधी ने कहा, ”इसलिए, भारत के जातिगत आंकड़े जानना जरूरी है. जितनी आबादी, उतना हक- ये हमारा प्रण है.” कांग्रेस ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय स्तर पर भी जाति जनगणना तत्काल कराने की मांग की थी. विपक्षी दल ने कहा कि यदि मोदी सरकार जाति जनगणना नहीं कराती तो कांग्रेस सरकार बनते ही यह काम किया जाएगा ताकि हर वर्ग को उनके अधिकार मिलें.
‘नया भारत’ प्रेस को गंभीरता से लेता है: न्यूज.क्लिक छापे पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने मंगलवार को ऑनलाइन समाचार पोर्टल ‘न्यूज.क्लिक’ और उसके पत्रकारों से जुड़े कई स्थानों पर दिल्ली पुलिस की छापेमारी की निंदा करते हुए कहा कि यह कार्रवाई दर्शाती है कि ह्लनया भारत प्रेस को गंभीरता से लेता हैह्व.
दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने चीन समर्थक प्रचार के लिए धन प्राप्त करने के आरोपों के बाद आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए के तहत दर्ज एक मामले में मंगलवार को न्यूजक्लिक और उसके पत्रकारों से जुड़े 30 स्थानों पर छापेमारी की. उर्मिलेश और अभिसार शर्मा समेत कुछ पत्रकारों को पूछताछ के लिए लोधी रोड स्थित विशेष प्रकोष्ठ के कार्यालय ले जाया गया.
पश्चिम बंगाल की कृष्णानगर संसदीय सीट से लोकसभा सदस्य मोइत्रा ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया, ह्लवरिष्ठ पत्रकारों पर छापा मारा गया और उन्हें पूछताछ के लिए ले जाया गया. उनके फोन और लैपटॉप जब्त कर लिए गए. नया भारत प्रेस को गंभीरता से लेता है.ह्व विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ में शामिल तृणमूल कांग्रेस ने इन छापों की कड़ी निंदा की है. उसने आरोप लगाया गया कि भाजपा सरकार की ह्लदंडात्मकह्व कार्रवाइयां मुख्य रूप से उन लोगों के खिलाफ हैं जो सत्ता के सामने सच बोलते हैं, न कि उन लोगों के खिलाफ जो नफरत और विभाजन को बढ़ावा देते हैं.