सिक्किम में अचानक आई बाढ़ के बाद आठ लोगों की मौत, 22 सैन्यकर्मी समेत 69 लोग लापता

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 04 Oct 2023 10:25 PM
सिक्किम में अचानक आई बाढ़ के बाद आठ लोगों की मौत, 22 सैन्यकर्मी समेत 69 लोग लापता
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गंगटोक/नयी दिल्ली. उत्तरी सिक्किम में ल्होनक झील पर बादल फटने से तीस्ता नदी में अचानक बाढ़ आने के बाद आठ लोगों की मौत हो गई और 22 सैन्यकर्मी समेत 69 लोग लापता हो गए. अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि तीन लोग उत्तरी बंगाल में बह गए. अधिकारियों ने बताया कि चुंगथांग बांध से पानी छोड़े जाने के कारण स्थिति और बिगड़ गई. बाढ़ मंगलवार देर रात करीब डेढ़ बजे आई. गंगटोक के उप जिला मजिस्ट्रेट (एसडीएम) महेंद्र छेत्री ने बताया, ”गोलिटार और सिंगताम क्षेत्र से पांच शव बरामद किए गए हैं.”

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि 22 सैन्यर्किमयों के अलावा, 47 नागरिक भी लापता हैं, जबकि एक सैन्यकर्मी समेत 166 लोगों को बचाया गया है. रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने कहा, ”बचाए गए सैनिक की स्वास्थ्य स्थिति स्थिर है.” अधिकारियों ने बताया कि बचाव र्किमयों ने सिंगताम के गोलिटार में तीस्ता नदी के बाढ़ क्षेत्र से एक बच्चे सहित कई शव निकाले. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सिक्किम के मुख्यमंत्री पी एस तमांग से बात की और राज्य में अचानक आयी बाढ़ से उपजे हालात की समीक्षा की. प्रधानमंत्री ने राज्य सरकार को हरसंभव मदद का आश्वासन भी दिया.

मोदी ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, ”सिक्किम के मुख्यमंत्री पी एस तमांग से बात की और राज्य के कुछ हिस्सों में दुर्भाग्यपूर्ण प्राकृति आपदा से पैदा हुई स्थिति की समीक्षा की. चुनौतियों का सामना करने के लिए हरसंभव मदद का आश्वासन भी दिया. मैं सभी प्रभावितों की सुरक्षा और कुशलता की प्रार्थना करता हूं.”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी सेना के लापता जवानों की सलामती के लिए प्रार्थना की. कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (एनसीएमसी) ने सिक्किम में बादल फटने के बाद की स्थिति की समीक्षा की और पर्यटकों और सुरंग में फंसे लोगों को निकालने पर जोर दिया. एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बैठक में शामिल हुए सिक्किम के मुख्य सचिव ने एनसीएमसी को राज्य की ताजा स्थिति के बारे में जानकारी दी.

विज्ञप्ति के मुताबिक केंद्रीय एजेंसियों और सिक्किम सरकार के राहत और बचाव उपायों की समीक्षा करते हुए कैबिनेट सचिव ने कहा कि चुंगथांग बांध की सुरंग में फंसे लोगों और पर्यटकों को निकालने का काम प्राथमिकता के आधार पर किया जाए. गौबा ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की अतिरिक्त टीम तैनात की जानी चाहिए और जल्द से जल्द सड़क, दूरसंचार और बिजली आपूर्ति बहाल की जानी चाहिए. विज्ञप्ति में कहा गया है कि कैबिनेट सचिव ने सिक्किम सरकार को आश्वासन दिया कि सभी केंद्रीय एजेंसियां तैयार हैं और सहायता के लिए उपलब्ध रहेंगी.

केंद्रीय सचिव ने समिति को बताया कि केंद्र सरकार द्वारा उच्चतम स्तर पर लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है और हर संभव मदद दी जा रही है. राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) ने पहले ही तीन टीम तैनात कर दी हैं और अतिरिक्त टीम गुवाहाटी और पटना में तैयार हैं. सिक्किम सरकार ने एक अधिसूचना में इसे आपदा घोषित कर दिया है.

रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि चुंगथांग बांध से पानी छोड़े जाने के कारण झील में जलस्तर अचानक 15 से 20 फुट तक बढ़ गया. उन्होंने बताया, ”सेना के 22 जवानों के लापता होने की सूचना है और 41 वाहन कीचड़ में धंसे हुए हैं.” प्रवक्ता ने कहा कि संचार व्यवस्था ठप होने के कारण लापता र्किमयों की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है. एक अधिकारी ने बताया, ”राज्य की राजधानी गंगटोक से 30 किलोमीटर दूर सिंगताम में स्टील से बना एक पुल बुधवार तड़के तीस्ता नदी के पानी में पूरी तरह से बह गया. इस पुल को इंद्रेणी पुल के नाम से भी जाना जाता है.” केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के मुताबिक, बुधवार दोपहर एक बजे तीस्ता नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे था और इसके आसपास बाढ़ की कोई स्थिति नहीं है. सीडब्ल्यूसी ने कहा कि तीन जगहों-मेल्ली, सिंगताम और रोहतक पर तीस्ता का जल स्तर खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन इसके करीब बना हुआ है.

गंगटोक से सिंगताम की ओर ट्रैकिंग के लिए निकले कोलकाता के पर्यटक राजीव भट्टाचार्य (25) ने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ”हमने घाटी में तेज गति से पानी की एक विशाल लहर को आते देखा… सौभाग्य से, मैं और मेरे दोस्त ऊंची जगह पर थे और अचानक आई बाढ़ से प्रभावित नहीं हुए. अब हम वापस गंगटोक जा रहे हैं.” नदी में उफान के कारण तीस्ता नदी घाटी क्षेत्र में स्थित डिक्चु, सिंगताम और रंगपो समेत कई कस्बों में भी बाढ़ आ गई है.

शिक्षा विभाग ने एक परिपत्र में कहा कि मंगन, गंगटोक, पाकयोंग और नामची जिलों में स्थित सभी स्कूल आठ अक्टूबर तक बंद रहेंगे.
अधिकारियों ने कहा कि सिक्किम और देश के बाकी हिस्सों के बीच मुख्य संपर्क राष्ट्रीय राजमार्ग-10 के कुछ हिस्से बह गए, साथ ही, उत्तर बंगाल और बांग्लादेश के लिए बाढ़ की चेतावनी जारी की गई है, जहां से तीस्ता बहती है.

सिक्किम में अपने घर जा रही कॉलेज छात्रा डोल्मा भूटिया ने ‘पीटीआई-भाषा’ को फोन पर बताया, ”हम सिलीगुड़ी से गंगटोक जा रहे थे जब हमारी कार को स्वेतझोरा इलाके में रुकने के लिए मजबूर होना पड़ा. लगातार बारिश के कारण सड़क के नीचे चट्टान और मिट्टी खिसकने से एनएच-10 का एक हिस्सा धंस गया था. सौभाग्य से, बारिश के कारण सभी कारें धीरे-धीरे चल रही थीं, अन्यथा जमीन धंसने से कई वाहन उसमें समा सकते थे.” पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के पुलिस अधिकारियों ने कहा कि रायगंज जिले के दो युवक -स्वर्णद्वीप मजूमदार (23) और श्रीकांत मजूमदार (27) और झारखंड का ईशान बुधवार को सिक्किम में लापता हो गए. उन्होंने बताया कि तीनों छुट्टियां मनाने शनिवार को मोटरसाइकिल से सिक्किम रवाना हुए थे.

रायगंज के एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ”मंगलवार सुबह से उनका पता नहीं लगाया जा सका है क्योंकि उनके मोबाइल नंबर पहुंच से बाहर हैं. हमने मदद के लिए सिक्किम पुलिस से संपर्क किया है.” अधिकारियों ने बताया कि दो अन्य पुल लैंको हाइडल बिजली परियोजना के पास तीस्ता में आए उफान के कारण गिर गए हैं. उन्होंने कहा कि प्रशासन ने कई राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां सैकड़ों लोगों ने शरण ली है.

सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसएसडीएमए) ने कहा कि ”ल्होनक झील के कुछ हिस्सों पर बादल फटने से तीस्ता नदी घाटी पर झील में अचानक जलस्तर बढ़ गया”, जिससे मंगन, गंगटोक, पाकयोंग और नामची जिलों में कई प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा.

मुख्यमंत्री तमांग ने तीस्ता नदी घाटी में अचानक आई बाढ़ के कारण हुए नुकसान का आकलन करने के लिए सिंगताम का दौरा किया. मुख्यमंत्री ने सिंगताम नगर पंचायत कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की और उनसे स्थिति पर नजर रखने को कहा.
तमांग ने कहा, ”इस चुनौतीपूर्ण वक्त में, मैं इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से प्रभावित हुए सभी पीड़ितों और उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करना चाहता हूं.”

उन्होंने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा, ”मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि सरकार जरूरतमंद लोगों को सभी आवश्यक सहायता और राहत उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. हम स्थिति की गंभीरता को समझते हैं और अपने नागरिकों की सुरक्षा एवं कुशलता सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं. हमारे सर्मिपत दल इस आपदा से उत्पन्न चिंताओं और चुनौतियों से निपटने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं.” पश्चिम बंगाल के सरकारी अधिकारियों ने बताया कि राज्य में पिछले कुछ दिनों हुई मूसलाधार बारिश के अलावा तीस्ता नदी में जल स्तर बढ़ने से कलिम्पोंग, दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी जिलों में कई स्थान प्रभावित हुए हैं, जहां प्रशासन ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है.

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