प्रधानमंत्री मोदी ने सरदार पटेल की जयंती पर ‘मेरा युवा भारत’ संगठन की नींव रखने की घोषणा की

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 29 Oct 2023 08:44 PM
प्रधानमंत्री मोदी ने सरदार पटेल की जयंती पर ‘मेरा युवा भारत’ संगठन की नींव रखने की घोषणा की
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 31 अक्टूबर को लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर ‘मेरा युवा भारत’ नामक एक संगठन की नींव रखे जाने की घोषणा की, जो राष्ट्र निर्माण से जुड़े विभिन्न आयोजनों में देश के युवाओं को सक्रिय भागीदारी करने का अवसर देगा.

आकाशवाणी पर रविवार को प्रसारित मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 106वीं कड़ी में देशवासियों से अपने विचार साझा करते हुए मोदी ने पिछले कुछ वर्षों में खादी से जुड़े उत्पादों की बिक्री में हुए इजाफे का जिक्र किया. उन्होंने देशवासियों से एक बार फिर स्थानीय उत्पादों को अधिक से अधिक खरीदने की अपील की और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को पूरा करने का आ”ान किया.
मोदी ने कहा कि वह ‘मन की बात’ के जरिये देशवासियों, विशेषकर उन युवाओं के लिए एक खुशखबरी साझा कर रहे हैं, जिनके दिलों में भारत के लिए कुछ करने का जज़्बा, सपने और संकल्प हैं.

उन्होंने कहा, ”यह खुशखबरी देशवासियों के लिए तो है ही है, मेरे नौजवान साथियों आपके लिए विशेष है. दो दिन बाद ही 31 अक्टूबर को एक बहुत बड़े राष्ट्रव्यापी संगठन की नींव रखी जा रही है और वो भी सरदार साहब की जयंती के दिन. इस संगठन का नाम है ‘मेरा युवा भारत’ यानी ‘माई भारत संगठन.” प्रधानमंत्री ने कहा, ”यह संगठन भारत के युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जुड़े विभिन्न आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर देगा. यह विकसित भारत के निर्माण में भारत की युवा शक्ति को एकजुट करने का एक अनोखा प्रयास है.”

मोदी ने इसके लिए ‘माई भारत डॉट जीओवी डॉट इन’ नाम से एक वेबसाइट शुरु किए जाने की घोषणा करते हुए युवाओं से इस पर पंजीकरण कराने और विभिन्­न कार्यक्रमों के लिए ‘साइन अप’ करने की अपील की. प्रधानमंत्री ने इस महीने की शुरुआत में गांधी जयंती के अवसर पर दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित खादी भंडार में एक ही दिन में डेढ. करोड़ रुपये से ज्यादा की बिक्री का उल्लेख करते हुए कहा, ”10 साल पहले देश में जहां खादी उत्पादों की बिक्री बड़ी मुश्किल से 30 हजार करोड़ रुपये से भी कम की थी, आज यह बढ.कर सवा लाख करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गई है.” उन्होंने कहा कि खादी की बिक्री बढ.ने का मतलब है कि इसका फायदा शहर से लेकर गांव तक में अलग-अलग लोगों तक पहुंचता है.

मोदी ने कहा कि इस बिक्री का लाभ बुनकरों, हस्तशिल्प कारीगरों, किसानों, आयुर्वेदिक पौधे लगाने वालों और कुटीर उद्योगों को मिलता है. प्रधानमंत्री ने इसे ‘वोकल फोर लोकल’ अभियान की ‘ताकत’ बताते हुए देशवासियों से आग्रह किया कि वे जब भी पर्यटन या तीर्थटन पर जाएं, तो वहां के स्थानीय उत्पादों को जरूर खरीदें. उन्होंने लोगों से अपनी यात्रा के कुल बजट के कुछ हिस्से को स्थानीय उत्पादों की खरीदारी के लिए रखने का आग्रह किया.

आगामी त्योहारों का उल्लेख करते हुए मोदी ने लोगों से अपनी खरीदारी में स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने का आ”ान किया और कहा कि दृष्टि केवल छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी से सामान लेने तक सीमित नहीं है. उन्होंने कहा, ”आज भारत दुनिया में विनिर्माण का बड़ा केंद्र बन रहा है. कई बड़े ब्रांड यहीं पर अपने उत्पाद तैयार कर रहे हैं. अगर हम उन उत्पादों को अपनाते हैं, तो ‘मेक इन इंडिया’ को बढ.ावा मिलता है और यह भी ‘लोकल’ के लिए ‘वोकल’ ही होना होता है.” प्रधानमंत्री ने ऐसे उत्पादों को खरीदते समय डिजिटल लेन-देन का सहारा लेने का अनुरोध किया.

उन्होंने कहा, ”जब आप भारत में बने, भारतीयों द्वारा बनाए गए उत्पादों से अपनी दिवाली रोशन करेंगे और अपने परिवार की हर छोटी-मोटी आवश्यकता लोकल से पूरी करेंगे, तो त्योहार की जगमगाहट ज्यादा बढ.ेगी. साथ ही स्थानीय लोगों का जीवन शानदार बनेगा. इससे भारत भी आत्मनिर्भर बनेगा.” सरदार पटेल की जयंती का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि इस अवसर पर 31 अक्टूबर को गुजरात में ‘स्टैचू ऑफ यूनिटी’ पर एकता दिवस से जुड़ा मुख्य समारोह होता है, लेकिन इस बार इसके अलावा दिल्ली में कर्तव्य पथ पर बहुत ही विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा.

उन्होंने बताया कि इस दिन न सिर्फ अमृत कलश यात्रा का, बल्कि पिछले ढाई साल से चल रहे आजादी के अमृत महोत्सव का भी समापन होगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि अमृत कलश यात्रा के लिए देशभर से जमा की गई मिट्टी अब दिल्­ली पहुंचने लगी है और इस मिट्टी को एक विशाल भारत कलश में रखा जाएगा तथा दिल्­ली में अमृत वाटिका बनाई जाएगी.

मोदी ने लोगों से इस अवसर पर ‘रन फॉर यूनिटी’ यानी एकता दौड़ का आयोजन करने और इसमें बडी संख्­या में शामिल होने की अपील की है. प्रधानमंत्री ने 31 अक्­टूबर को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्­यतिथि के मद्देनजर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने साहित्य को ‘एक भारत, श्रेष्­ठ भारत’ की भावना को प्रगाढ. करने का सबसे बेहतरीन माध्यम करार दिया और इस कड़ी में तमिलनाडु की धरोहर से जुडे दो प्रेरक प्रयासों की चर्चा की. मोदी ने तमिल लेखक शिव शंकरी का जिक्र किया, जिन्­होंने साहित्­य से देश को धागे में पिरोने और जोड़ने की एक परियोजना को आकार दिया है.

प्रधानमंत्री ने कहा, ”वह (शंकरी) 16 वर्षों से इस परियोजना पर काम कर रही हैं और उन्­होंने 18 भारतीय भाषाओं में लिखे साहित्­य का अनुवाद किया है. उन्­होंने कन्­याकुमारी से कश्­मीर तक और इंफाल से जैसलमेर तक देशभर में यात्राएं कीं, ताकि अलग-अलग राज्­यों के लेखकों और कवियों का साक्षात्कार ले सकें. शंकरी ने अपनी यात्रा की कमेंट्री तमिल और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में प्रकाशित की है. मुझे उनकी इस संकल्प शक्ति पर गर्व है.” कन्याकुमारी के थिरु ए के पेरूमल का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि वह तमिलनाडु के अलग-अलग हिस्सों में यात्रााए करते हैं और स्थानीय कला स्वरूपों को खोजकर उसे अपनी किताब का हिस्सा बनाते हैं.

उन्होंने कहा, ”शिव शंकरी और पेरूमल के प्रयास हर किसी के लिए एक मिसाल हैं. भारत को अपनी संस्कृति को सुरक्षित करने वाले ऐसे हर प्रयास पर गर्व है, जो हमारी राष्ट्रीय एकता को मजबूती देने के साथ ही देश का नाम, देश का मान, सब कुछ बढ़ाते हैं.” प्रधानमंत्री ने 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान बिरसा मुंडा हम सबके हृदय में बसे हैं और सकंल्­प शक्ति पर अडिग रहना क्­या होता है, यह हम उनके जीवन से सीख सकते हैं.
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने तिलका मांझी, टंट्या भील, वीर नारायण सिंह, वीर रामजी गोंड, वीर गुंडाधुर, भीमा नायक, कियांग नोबांग और रानी गाइदिन्ल्यू जैसे स्वतंत्रता सेनानियों को भी याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.
उन्होंने कहा, ”देश अपने आदिवासी समाज का कृतज्ञ है, जिसने राष्ट्र के स्वाभिमान और उत्थान को हमेशा सर्वोपरि रखा है.”

देश अब खेलों में भी परचम लहरा रहा है: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को खेलों में भारतीय दल के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि हाल के दिनों में विभिन्न स्पर्धाओं में रिकॉर्ड प्रदर्शन कर भारतीय टीम ने इतिहास रचा है. आकाशवाणी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की ताजा कड़ी में देशवासियों को संबोधित करते हुए मोदी ने एशियाई खेलों और एशियाई पैरा खेलों के साथ ही विशेष ओलंपिक विश्व खेलों का जिक्र किया और भारतीय दल के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि विजेता खिलाड़ियों ने ‘बहुत ही साधारण परिवार’ से आने के बावजूद अपनी गरीबी को कभी अपनी सफलता के सामने दीवार नहीं बनने दिया.

उन्होंने कहा, ”इस समय देश का खेलों में भी परचम लहरा रहा है. पिछले दिनों एशियाई खेलों के बाद पैरा एशियाई खेलों में भी भारतीय खिलाड़ियों ने जबरदस्त कामयाबी हासिल की है. इन खेलों में भारत ने 111 पदक जीतकर एक नया इतिहास रच दिया है. मैं पैरा एशियाई खेलों में हिस्सा लेने वाले सभी खिलाड़ियों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं.” उन्होंने ‘स्पेशल ओलंपिक्स वर्ल्ड समर गेम्स’ में भारतीय दल के प्रदर्शन का उल्लेख करते करते हुए कहा कि यह प्रतियोगिता बौद्धिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ियों की अद्भुत क्षमता को सामने लाती है.

इस प्रतियोगिता में भारतीय दल ने 75 स्वर्ण पदक सहित 200 पदक जीते थे. इसका आयोजन र्बिलन में हुआ था. मोदी ने कहा, ”रोलर स्केटिंग हो या बिच वॉलीबॉल या फुटबॉल, भारतीय खिलाड़ियों ने पदकों की झड़ी लगा दी. इन पदक विजेताओं की जीवन यात्रा बहुत प्रेरक रही है.” उन्होंने हरियाणा के रणवीर सैनी, पुद्दुचेरी के 16 साल के टी-विशाल, गोवा की सिया सरोदे, छत्तीसगढ़ के दुर्ग के रहने वाले अनुराग प्रसाद, झारखंड के इंदु प्रकाश के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि बहुत ही साधारण परिवार से आने के बावजूद, इन खिलाड़ियों ने गरीबी को कभी अपनी सफलता के सामने दीवार नहीं बनने दिया.

मोदी ने कहा, ”मुझे विश्वास है कि इन खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की सफलता अन्य बच्चों और परिवारों को भी प्रेरित करेगी. मेरी आप सबसे भी प्रार्थना है आपके गांव में, अगल-बगल ऐसे बच्चे, जिन्होंने इस खेलकूद में हिस्सा लिया है या विजयी हुए हैं, आप सपरिवार उनके यहां जाइए. उनको बधाई दीजिए. और कुछ पल उन बच्चों के साथ बिताइए. आपको एक नया ही अनुभव होगा.” उन्होंने कहा, ”परमात्मा ने उनके अंदर एक ऐसी शक्ति भरी है कि आपको भी उसके दर्शन का मौका मिलेगा. जरूर जाइएगा.”

भारतीय पैरा खिलाड़ियों ने शनिवार को इतिहास रचकर हांगझोउ पैरा एशियाई खेलों में अपने अभियान का अंत 111 पदक जीतकर किया जो किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय बहु खेल टूर्नामेंट में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है . इन भारतीय पैरा खिलाड़ियों ने 29 स्वर्ण, 31 रजत और 51 कांस्य जीते. इससे पहले 23 सितंबर से आठ अक्टूबर तक हुए हांगझोउ एशियाई खेलों में भारत ने 107 पदक जीते थे.

भारत पदक तालिका में पांचवें स्थान पर रहा. चीन ने 521 पदक (214 स्वर्ण, 167 रजत और 140 कांस्य) जीते, जबकि ईरान ने 44 स्वर्ण, 46 रजत और 41 कांस्य अपने नाम किए. जापान तीसरे और कोरिया चौथे स्थान पर रहा. पहले पैरा एशियाई खेल 2010 में ग्वांग्झू में हुए थे जिसमें भारत 14 पदक जीतकर 15वें स्थान पर रहा था. इसके बाद 2014 में भारत 15वें और 2018 में नौवें स्थान पर रहा. भारत ने 2010 दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में पहली बार 100 से अधिक (101) पदक जीते थे.

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