नयी दिल्ली/चेन्नई. तमिलनाडु के मुख्य विपक्षी दल ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के महासचिव के पलानीस्वामी ने बुधवार को स्पष्ट तौर पर यह बताने से इंकार कर दिया कि उनकी पार्टी 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन करेगी या नहीं. हालांकि उन्होंने कहा कि गठबंधन केवल चुनाव के समय ही बनते हैं.
पलानीस्वामी की मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद चुनावी गठबंधन की अटकलें तेज हो गई हैं.
पलानीस्वामी ने पार्टी नेताओं के साथ मंगलवार को शाह से हुई मुलाकात के बारे में नयी दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि उनकी पार्टी ने तमिलनाडु के समक्ष मौजूद कई मुद्दों से केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया. उन्होंने कहा, ”हमने धनराशि शीघ्र जारी करने का आग्रह किया है, क्योंकि इसमें देरी हो रही है.” पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना और शिक्षा से संबंधित योजनाओं (एसएसए) के तहत तमिलनाडु के लिए लंबित धनराशि को केंद्र सरकार से जारी करने की मांग की.
उन्होंने कहा, ”तमिलनाडु लगातार दो-भाषा नीति का पालन कर रहा है और इसे जारी रखा जाना चाहिए. साथ ही, संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों का प्रस्तावित परिसीमन इस तरह से किया जाना चाहिए, जिससे तमिलनाडु पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े.” पलानीस्वामी ने कहा कि गोदावरी-कावेरी नदी जोड़ो योजना को तेजी से लागू किया जाना चाहिए और नादंतई वाझी कावेरी योजना के लिए धनराशि जारी की जानी चाहिए. केंद्र को कावेरी नदी पर मेकेदातु बांध के निर्माण की अनुमति नहीं देनी चाहिए और उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार काम करना चाहिए.
पलानीस्वामी ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति तथा महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध, अन्नाद्रमुक की ओर से अमित शाह को सौंपे गए ज्ञापन में रेखांकित किए गए अन्य मुद्दे हैं. अन्नाद्रमुक नेता ने मंगलवार को शाह के साथ हुई मुलाकात और भाजपा से चुनावी गठबंधन की संभावना के बारे में पूछे जाने पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए पूछा कि क्या चुनाव की घोषणा हो चुकी है. उन्होंने गठबंधन बनाने के सवाल पर ‘हां’ या ‘नहीं’ में जवाब देने की आवश्यकता पर सवाल किया. उन्होंने कहा कि गठबंधन पर फैसला चुनाव के समय ही लिया जाएगा.
अन्नाद्रमुक नेता ने संवाददताओं को पिछले चुनावों में गठबंधन की घोषणा के समय को याद करने को कहा; चाहे वह 2019 का लोकसभा चुनाव हो या 2021 का विधानसभा चुनाव; अन्नाद्रमुक और भाजपा ने दोनों ही चुनावों में सहयोगी के तौर पर हिस्सा लिया था.
उन्होंने कहा, ”गठबंधन परिस्थितियों की मांग के अनुसार बदलते हैं और ये विचारधारा और नीतियों से अलग होते हैं, जो स्थायी होते हैं.” अन्नाद्रमुक महासचिव ने रेखांकित किया कि राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार गठबंधन बदलते रहते हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव अगले साल मार्च में होने हैं और पूछा कि क्या गठबंधन पर टिप्पणी अब ”एक साल पहले” की जानी चाहिए, और इसके लिए मीडिया में ”सनसनीखेज” बातों को जिम्मेदार ठहराया.
भाजपा से 2023 में संबंध तोड़ने के बाद से अन्नाद्रमुक के नेताओं द्वारा बार-बार केंद्र की सत्तारूढ. पार्टी से गठबंधन की संभावना को खारिज करने की पृष्ठभूमि में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य विधानसभा चुनाव एक साल बाद ही होने वाले हैं और इसलिए गठबंधन के बारे में टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी.
यह पूछे जाने पर कि क्या यह अनुमान लगाया जा सकता है कि अन्नाद्रमुक ने भाजपा के साथ चुनावी समझौता कर लिया है? उन्होंने कहा, ”केवल मीडिया ही ऐसा कह रहा है, ऐसा कुछ नहीं है; हम यहां लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए आए हैं और चुनाव में एक वर्ष का समय बचा है तथा गठबंधन से संबंधित दावे महज अटकलें हैं.” अन्नाद्रमुक से निष्कासित नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम ने पलानीस्वामी की शाह से मुलाकात पर कहा, ”इलम नानमाइक्के (सब कुछ अच्छे के लिए है).”
पलानीस्वामी के चेन्नई लौटने पर जब संवाददाताओं ने उनके बयान की ओर इशारा किया कि भाजपा के साथ कोई भी गठबंधन नहीं होगा और पूछा कि क्या अन्नाद्रमुक अपने रुख पर कायम रहेगी, तो उन्होंने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि किस पार्टी ने हर समय लागू होने वाला ‘स्थायी’ रुख अपनाया है.
पलानीस्वामी ने पूछा कि क्या द्रमुक के साथ मिलकर काम करने वाली पार्टी का कोई खास रुख है और उन्होंने हर बार किसी भी रुख के अनुमान को खारिज कर दिया. अन्नाद्रमुक महासचिव ने कहा,””यह राजनीति है और राजनीतिक स्थिति के आधार पर इसमें बदलाव हो सकते हैं.” उन्होंने पूछा कि अभी कोई निश्चित रुख कैसे तय किया जा सकता है. पलानीस्वामी ने कहा, ”हमारा एकमात्र लक्ष्य जनविरोधी द्रमुक को हराना है और पार्टी इसके लिए सभी कदम उठाएगी.”