निजी ईंधन कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल की कीमत में पांच रुपये और डीजल में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। नई दरें शनिवार तड़के से लागू हो गई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें बढ़ने के कारण कंपनी ने यह कदम उठाया है। इससे निजी और सरकारी पेट्रोल पंपों की कीमतों में अंतर बढ़ सकता है। कंपनी के देशभर में 7,108 पेट्रोल पंप हैं।
इस साल ईरान संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति प्रभावित होने के बाद नायरा ने सबसे पहले पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए थे। कंपनी ने 26 मार्च को पेट्रोल पांच रुपये और डीजल तीन रुपये प्रति लीटर महंगा किया था। उस समय उसके पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल की कीमत 100.71 रुपये और डीजल की कीमत 91.31 रुपये प्रति लीटर हो गई थी। इसके बाद मई में सरकारी तेल कंपनियों ने भी कीमतें बढ़ानी शुरू कर दी थीं। मई के आखिर तक अलग-अलग चरणों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल मिलाकर करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटने और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बाद नायरा ने 1 जुलाई को पेट्रोल पांच रुपये और डीजल तीन रुपये प्रति लीटर सस्ता कर दिया था। अब कंपनी ने एक बार फिर कीमतें बढ़ा दी हैं।
सरकारी तेल कंपनियों ने नहीं बढ़ाए दाम
देश में पेट्रोल पंपों के नेटवर्क पर सरकारी तेल कंपनियों का दबदबा है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के पास देश के 1,04,137 पेट्रोल पंपों में से 90 प्रतिशत से अधिक हैं। ये कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद लंबे समय तक खुदरा कीमतें स्थिर रखती रही हैं।
रिलायंस इंडस्ट्रीज और ब्रिटेन की बीपी के संयुक्त उपक्रम जियो-बीपी के पास 2,304 पेट्रोल पंप हैं। कंपनी ने अब तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव नहीं किया है। ऐसे में नायरा के दाम बढ़ाने से अलग-अलग कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कीमतों में अंतर बढ़ सकता है।
एक अक्टूबर को सरकार ने निजी ईंधन विक्रेताओं से कहा था कि वे अपने पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की बिक्री सीमित न करें। इससे पहले नायरा और जियो-बीपी ने खुदरा बिक्री में नुकसान के बीच कुछ पेट्रोल पंपों पर ईंधन की बिक्री की मात्रा सीमित की थी। अधिकारियों के मुताबिक, खुदरा और थोक डीजल की कीमतों के बीच अंतर के कारण औद्योगिक उपभोक्ता सस्ता डीजल खरीदने के लिए खुदरा पेट्रोल पंपों का रुख कर रहे थे। इससे इन पंपों पर आपूर्ति का दबाव बढ़ रहा था।तेल कंपनियों को कितना नुकसान हो रहा है?
रेटिंग एजेंसी इक्रा ने पिछले महीने अनुमान जताया था कि सितंबर में खुदरा कीमतें स्थिर रहने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल व पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें बढ़ने के कारण तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 8 रुपये और डीजल पर करीब नौ रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा था।
एजेंसी के अनुसार, पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बिक्री को मिलाकर कंपनियों को प्रतिदिन करीब 530 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था। इक्रा ने यह भी कहा था कि तेल कंपनियों के शोधन और विपणन कारोबार का संतुलन तब बनता है, जब कच्चे तेल की कीमत करीब 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में हो। इससे ऊपर कीमत जाने पर और खुदरा दाम नहीं बढ़ने पर कंपनियों का नुकसान बढ़ सकता है।