नयी दिल्ली. कांग्रेस ने अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को चीन के मानचित्र में दिखाये जाने पर मंगलवार को कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि ये भारत के अभिन्न अंग हैं जिसे किसी ‘आदतन अपराधी’ द्वारा ऐसे अवैध सीमांकन या मनमाने तरीके से बनाये नक्शे से नहीं बदला जा सकता. कांग्रेस ने सरकार से कहा कि आगामी जी20 सम्मेलन के दौरान भारतीय क्षेत्र में चीन की घुसपैठ का वैश्विक स्तर पर खुलासा किया जाए.
चीन ने एक दिन पहले ही अपने ‘मानक मानचित्र’ का 2023 का संस्करण आधिकारिक रूप से जारी किया था जिसमें अरुणाचल प्रदेश, अक्साई चिन, ताईवान और विवादित दक्षिण चीन सागर को भी दर्शाया गया है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन समेत भारतीय क्षेत्र भारत के अभेद्य और अभिन्न हिस्से हैं और मनमाने तरीके से तैयार किया गया कोई चीनी नक्शा इसे नहीं बदल सकता.
उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ”अन्य देशों से जुड़े क्षेत्रों का नाम बदलने और उन्हें नक्शों पर दर्शाने के मामले में चीन आदतन अपराधी रहा है. कांग्रेस इस तरह के अवैध सीमांकन या भारतीय क्षेत्रों का नाम बदलने पर कड़ी आपत्ति जताती है.” कांग्रेस नेता और लोकसभा सदस्य मनीष तिवारी ने भी अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावों को ‘बेतुका, अतार्किक और ऐतिहासिक रूप से गलत’ करार दिया और सरकार से आग्रह किया कि हाल के दिनों में चीन द्वारा अतिक्रमण में कब्जाये गये भारतीय क्षेत्रों पर पुन: नियंत्रण पाया जाए.
उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ”भारत और चीन के बीच लंबित मुद्दा अप्रैल 2020 से अवैध तरीके से कब्जाये क्षेत्र को छोड़ना है.”
तिवारी ने कहा, ”मोदी सरकार को आत्मावलोकन करना चाहिए कि दिल्ली में शी चिनफिंग को तवज्जो देनी है या नहीं, क्योंकि उन्होंने भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर रखा है.” खरगे ने कहा, ”हम अपने पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व चाहते हैं जिसमें चीन शामिल है. हम वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अमन चैन चाहते हैं.”
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ”हालांकि यह दुखदायी है कि गलवान की घटना के बाद चीन की ओर से धोखेबाजी और आक्रामकता जारी है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से दी गयी छूट के कारण ऐसा हुआ जिन्होंने हमारे 20 बहादुर जवानों की शहादत के बाद कहा था कि ‘हमारे क्षेत्र में कोई नहीं घुसा’.” खरगे ने कहा कि मई 2020 से पहले बनी यथास्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है और सरकार को इस स्थिति की बहाली से कम किसी चीज में नहीं मानना चाहिए.
उन्होंने कहा, ”मोदी सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि एलएएसी में भारतीय क्षेत्र में 2000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर चीन का अवैध कब्जा समाप्त होना चाहिए. भारत ने बार-बार कहा है कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा देश का अभिन्न हिस्सा रहेगा. चीन के सरकारी समाचारपत्र ग्लोबल टाइम्स ने ‘एक्स’ पर लिखा, ”चीन के मानक मानचित्र का 2023 संस्करण आधिकारिक तौर पर सोमवार को जारी किया गया और प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय के स्वामित्व वाली मानक मानचित्र सेवा की वेबसाइट पर इसे जारी किया गया. यह मानचित्र चीन और दुनिया के विभिन्न देशों की राष्ट्रीय सीमाओं की रेखांकन विधि के आधार पर संकलित किया गया है.”
मणिपुर विधानसभा का सत्र और चलता तो भाजपा के आंतरिक मतभेद सामने आ जाते: कांग्रेस
कांग्रेस ने मणिपुर विधानसभा के एक दिवसीय सत्र को आज ‘तमाशा’ करार देते हुए कहा कि यदि सत्र कुछ दिन और चलता तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अंदर के मतभेद खुलकर सामने आ जाते. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा कि भाजपा ने हमेशा ही अवसर को औपचारिकता में बदला है.
मणिपुर विधानसभा का एक दिवसीय सत्र शुरू होने के एक घंटे के अंदर अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया. कांग्रेस विधायकों ने सत्र की अवधि बढ़ाकर पांच दिन करने की मांग को लेकर हंगामा किया. पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के नेतृत्व में विपक्षी विधायकों ने कहा कि राज्य के मौजूदा हालात पर चर्चा करने के लिए एक दिन पर्याप्त नहीं है. भाजपा के सात विधायकों समेत सभी 10 कुकी विधायक सदन में उपस्थित नहीं थे.
रमेश ने कहा, ”23 मार्च 2023 के बाद मणिपुर विधानसभा की बैठक आज पहली बार हुई. इसमें तीन मई से राज्य में हुई हिंसा में मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए दो मिनट का मौन रखा गया. मुख्यमंत्री ने एक प्रस्ताव पढ़ा और फिर इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया और अन्य किसी प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं दी गयी.” उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया एक घंटे से भी कम समय में समाप्त हो गई.
रमेश ने कहा, ”क्या तमाशा है? इतने बड़े बहुमत के साथ सत्तारूढ़ पार्टी कुछ और दिन का सत्र क्यों नहीं आयोजित कर सकी? कारण स्पष्ट है. यदि विधानसभा सत्र चलता तो भाजपा के अंदर के मतभेद खुलकर सामने आ जाते और वो भी विधानसभा के पटल पर.” उन्होंने कहा कि 10 कुकी विधायकों द्वारा सत्र का ‘बहिष्कार’ करना दिखाता है कि राज्य में गहरा विभाजन है और मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कितने अक्षम हैं.