बंगाल के राज्यपाल ने चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के लिए शिक्षा मंत्री को कैबिनेट से हटाने को कहा

बंगाल के शिक्षा मंत्री मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मेरे रिश्ते खराब कर रहे हैं : राज्यपाल बोस

कोलकाता. पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने बृहस्पतिवार को कहा कि शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने हाल में गौर बंग विश्वविद्यालय में राजनेताओं के साथ बैठक करके चुनाव आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) का ”जानबूझकर” उल्लंघन किया है. राजभवन के एक अधिकारी ने कहा कि राज्यपाल ने राज्य सरकार से कहा कि वह आचार संहिता का उल्लंघन करने के लिए बसु को कैबिनेट से हटाये. राज्य के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति बोस ने कहा कि संस्थान के परिसर में बैठक आयोजित करने के बसु के ”कृत्य ने विश्वविद्यालय प्रणाली को बदनाम” किया है.

अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”30 मार्च को गौर बंग विश्वविद्यालय में बसु के नेतृत्व और अन्य मंत्रियों, सांसदों, विधायकों व राजनीतिक नेताओं की उपस्थिति में हुई बैठक के आलोक में, कुलाधिपति ने राज्य सरकार को जानबूझकर आचार संहिता का उल्लंघन करने के लिए उनके (बसु) खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है, जिसमें उन्हें कैबिनेट से हटाना भी शामिल है.” यह विश्वविद्यालय मालदा जिले में स्थित है.

बंगाल के शिक्षा मंत्री मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मेरे रिश्ते खराब कर रहे हैं : राज्यपाल बोस

पश्चिम बंगाल में सरकार द्वारा संचालित विश्वविद्यालयों में संचालन संबंधी असमंजस पर चर्चा के बीच शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु द्वारा राज्यपाल को ‘उन्मादी’ करार देने के बाद सी वी आनंद बोस ने बृहस्पतिवार को कहा कि ऐसी टिप्पणियां तब आयी हैं जब उन्होंने पहले ही मंत्री द्वारा प्रस्तावित अंतरिम कुलपतियों के नामों को स्वीकृति दे दी है.

राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने कहा कि बसु के आरोप उनकी संवैधानिक सहकर्मी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ उनके संबंध खराब करने की कोशिश है. राजभवन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”मंत्री श्री ब्रत्य बसु ने राज्यपाल को ‘उन्मादी’ और अल्जाइमर से पीड़ित बताया है. यह ऐसे समय में कहा गया है जब राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों के अंतरिम कुलपतियों के तौर पर नियुक्ति के लिए मंत्री द्वारा सुझाए सभी चार नाम स्वीकार कर लिए हैं.”

पोस्ट में कहा गया है, ”राज्यपाल का मानना है कि मंत्री उनके और माननीय मुख्यमंत्री के बीच के रिश्ते खराब कर रहे हैं. राज्यपाल, मुख्यमंत्री का बहुत सम्मान करते हैं.” राज्यपाल के कार्यालय ने उच्चतम न्यायालय के फैसलों के विपरीत राज्य के शिक्षा विभाग के ”गैरकानूनी” आदेश का हवाला देकर विश्वविद्यालय की गतिविधियों को ”बाधित” करने वाले कुलपतियों को भी ‘सख्त’ चेतावनी जारी की.

पोस्ट में कहा गया है, ”कुलाधिपति उन कुलपतियों को सख्त चेतावनी देते हैं जो पश्चिम बंगाल सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के उन गैरकानूनी आदेशों का हवाला देकर विश्वविद्यालय की गतिविधियों को बाधित करते हैं जो उच्चतम न्यायालय के फैसले के विपरीत है. यह छात्र समुदाय के हितों की रक्षा के लिए है.” बसु ने राज्यपाल पर राज्य विश्वविद्यालयों के कामकाज के संबंध में ”अतार्किक और असंगत कदम” उठाने का भी आरोप लगाया था.

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बोस ने बुधवार रात को एक बयान जारी कर सरकारी हस्तक्षेप के खिलाफ इन संस्थानों की स्वायत्तता की रक्षा करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की. बोस ने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रमुख होने के नाते कुलाधिपति के पास अतिरिक्त प्राधिकारियों को शामिल किए बगैर सीधे कुलपति से बात करने का अधिकार होता है. उन्होंने दिसंबर, 2019 में पश्चिम बंगाल विधानसभा द्वारा पारित उन नियमों की आलोचना की जिनके तहत विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को कमजोर करते हुए कुलाधिपति और कुलपति के बीच एक मध्यस्थ निकाय स्थापित करने का प्रावधान है.

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