छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामला : भूपेश बघेल की पूर्व अधिकारी सौम्या चौरसिया गिरफ्तार

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 17 Dec 2025 10:46 PM
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामला : भूपेश बघेल की पूर्व अधिकारी सौम्या चौरसिया गिरफ्तार
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रायपुर. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यालय में पदस्थ रहीं राज्य प्रशासनिक सेवा की निलंबित अधिकारी सौम्या चौरसिया को कथित शराब घोटाला मामले में मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया. ईडी के अधिवक्ता सौरभ कुमार पांडे ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि यहां एक विशेष अदालत ने बुधवार को चौरसिया को दो दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया.

पांडे ने बताया कि ईडी ने चौरसिया को मंगलवार देर शाम शराब ‘घोटाले’ में कथित संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया था और बुधवार को उन्हें तीन दिनों की रिमांड के लिए एक विशेष अदालत में पेश किया गया. उन्होंने बताया कि अदालत ने चौरसिया को दो दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया है तथा उन्हें शुक्रवार (19 दिसंबर) को अदालत में पेश किया जाएगा. अधिवक्ता ने बताया कि ईडी की जांच के दौरान शराब घोटाले में चौरसिया की संलिप्तता का पता चला. उन्होंने कथित तौर पर इस घोटाले से उत्पन्न अपराध की आय के रूप में 115 करोड़ रुपये प्राप्त किए.

चौरसिया ने भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में उप सचिव के रूप में कार्य किया था.
चौरसिया कथित कोयला लेवी घोटाले में भी आरोपी हैं. उन्हें इस साल मई में उच्चतम न्यायालय से अंतरिम जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा किया गया था. उन्हें 2022 में कोयला लेवी घोटाला मामले में गिरफ्तार किया गया था. पांडे ने बताया कि ईडी अब चौरसिया से पूछताछ करेगी जिससे पता चल सके कि यह रकम कहां खपाई गई है. चौरसिया के वकील हर्षवर्धन परगनिहा ने कहा कि पूरी कार्रवाई अवैध है.

उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई एक व्यक्ति, लक्ष्मीनारायण बंसल के बयान के आधार पर की गई है, जिसके खिलाफ इसी मामले में पहले ही गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा चुका है. लेकिन उसे गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है. शराब घोटाला मामले में निदेशालय ने इस साल 15 जनवरी को कांग्रेस विधायक और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को तथा 18 जुलाई को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था.

ईडी ने आरोप लगाया है कि 71 वर्षीय लखमा अपराध की कमाई के मुख्य प्राप्तकर्ता थे और आबकारी मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्हें बड़ी मात्रा में नकदी मिली थी. ईडी ने यह भी आरोप लगाया है कि चैतन्य बघेल शराब घोटाले के सिंडिकेट के मुखिया थे और उन्होंने इस घोटाले से उत्पन्न लगभग एक हजार करोड़ रुपये का व्यक्तिगत रूप से प्रबंधन किया था. ईडी के अनुसार, यह कथित घोटाला भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान 2019 और 2022 के बीच हुआ था, जिसके परिणामस्वरूप राज्य के खजाने को 2,500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ और शराब सिंडिकेट के सदस्यों को अवैध लाभ हुआ.

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