ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मंगलवार को कोटिया समुदाय के गांवों को लेकर लंबे समय से चले आ रहे अंतरराज्यीय सीमा विवाद के समाधान के लिए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक से ”रचनात्मक सुझाव” मांगे। वहीं, मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को ”राजनीतिक दृष्टिकोण” से देखने के लिए पटनायक की आलोचना की। माझी ने पटनायक के पत्र के उत्तर में कहा में कि कोटिया समुदाय के गांव 1936 में राज्य के गठन के समय से ही ओडिशा का अभिन्न अंग रहे हैं।
उन्होंने पटनायक को लिखे जवाबी पत्र में कहा, ”राज्य सरकार ओडिशा की क्षेत्रीय अखंडता और वैध हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।” माझी ने हालांकि कहा कि पटनायक के 19 अक्टूबर के पत्र में इस संवेदनशील मुद्दे का रचनात्मक और कानूनी रूप से मान्य समाधान देने के बजाय, एक ‘राजनीतिक दृष्टिकोण’ से पूरे प्रकरण को देखने की कोशिश की गई है।
उन्होंने कहा, ”राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे इस मामले की संवेदनशीलता के मद्देनजर, सभी संबंधित पक्षों को संयम और जिम्मेदारी से कार्य करना चाहिए तथा न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए।” मुख्यमंत्री ने कहा, ”सरकार के विचारार्थ, इस पुराने लंबित मुद्दे के समाधान के लिए यदि आपके पास कोई रचनात्मक सुझाव हों, तो मुझे उन्हें पाकर खुशी होगी।”
उन्होंने पटनायक को बताया कि कोटिया ग्राम पंचायत क्षेत्रों के एकीकृत विकास की निगरानी के लिए, राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। कोटिया समुदाय के 21 गांव ओडिशा के कोरापुट जिले के पोटांगी प्रखंड और आंध्र प्रदेश के सालूर/अराकू क्षेत्रों में स्थित हैं और कई दशकों से इनकों लेकर दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद है।