राहुल के रोड शो में पार्टी व आईयूएमएल के झंडे नहीं होने पर माकपा-भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना

तिरुवनंतपुरम/वायनाड. कांग्रेस ने वायनाड में राहुल गांधी की रैली में अपनी पार्टी और सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के झंडों का उपयोग नहीं करने का फैसला किया था. इस फैसले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने बृहस्पतिवार को कांग्रेस पर निशाना साधा.

माकपा ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि रैली में झंडों का इस्तेमाल नहीं किया गया क्योंकि कांग्रेस भाजपा से डरती है वहीं भाजपा ने दावा किया कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि गांधी आईयूएमएल से र्शिमंदा थे. भाजपा ने उनसे कांग्रेस का समर्थन नहीं लेने को कहा.

कांग्रेस ने आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि माकपा और भाजपा करीबी दोस्त बन गए हैं. उसने कहा कि उसे चुनाव प्रचार करने के लिए किसी से प्रशिक्षण लेने की जरुरत नहीं है. देश की सबसे पुरानी पार्टी ने माकपा पर हमला करते हुए कहा कि वह सिर्फ अपना वोट शेयर और चुनावचिह्न खोने के डर से ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव एलायंस’ (इंडिया) गठबंधन में शामिल हुई है. केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि कांग्रेस ने रोड शो के दौरान अपने और सहयोगी आईयूएमएल के झंडों का इस्तेमाल नहीं किया क्योंकि वह भाजपा से डरी हुई है.

मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए दावा किया कि कांग्रेस सांसद में अपनी ही पार्टी का झंडा सार्वजनिक रूप से प्रर्दिशत करने का ”साहस नहीं है”. विजयन ने कहा कि कांग्रेस आईयूएमएल के वोट चाहती है लेकिन उसके झंडे को स्वीकार नहीं कर पा रही जबकि लीग के लिए यह महत्वपूर्ण है.

उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”कांग्रेस इस स्तर तक गिर गई है कि वह सांप्रदायिक ताकतों से डरती है.” केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने दावा किया कि राहुल गांधी की रैली में आईयूएमएल का झंडा इसलिए नहीं दिखाया गया क्योंकि वह उस पार्टी से र्शिमंदा थे.

ईरानी वायनाड में भाजपा के लिए प्रचार कर रही थीं. उन्होंने कहा कि अगर उन्हें आईयूएमएल को लेकर शर्म आती है, तो उन्हें उसका समर्थन अस्वीकार कर देना चाहिए. बुधवार को वायनाड में राहुल गांधी का रोड शो 2019 की तुलना में काफी अलग दिखाई दे रहा था. पिछली बार भीड़ में आईयूएमएल के हरे झंडों की संख्या कांग्रेस से अधिक थी. इस बार दोनों दलों के झंडे नहीं थे.

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