नयी दिल्ली. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के शीर्ष नेताओं ने इजराइल-हमास युद्ध में तत्काल मानवीय संघर्ष विराम के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में मतदान से भारत के अनुपस्थित रहने की रविवार को निंदा की. उन्होंने फलस्तीनी लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए यहां सांकेतिक धरना दिया और युद्धविराम का आह्वान किया.
यहां पार्टी के एकेजी भवन कार्यालय के बाहर आयोजित प्रतीकात्मक विरोध-प्रदर्शन में माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार के अलावा पार्टी नेता मोहम्मद सलीम, वृंदा करात, प्रकाश करात और केंद्रीय समिति के सभी सदस्य शामिल हुए.
माकपा की केंद्रीय समिति ने रविवार को यहां तीन-दिवसीय सत्र के समापन पर फलस्तीन के लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए देश भर में विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने का निर्णय लिया. पिनराई विजयन ने रविवार को कहा कि यह चौंकाने वाला है कि इजराइल-हमास संघर्ष में तत्काल मानवीय संघर्ष विराम के आह्वान वाले प्रस्ताव पर भारत संयुक्त राष्ट्र महासभा में मतदान से दूर रहा. विजयन ने यहां माकपा के धरने में भाग लेते हुए आरोप लगाया कि फलस्तीनी लोगों के नरसंहार की निंदा न करके भारत इसमें ‘सहभागी’ बन रहा है.
उन्होंने कहा, ”यह वास्तव में चौंकाने वाला है कि भारत सरकार इजराइल का समर्थन करते हुए संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव पर चर्चा से दूर रहने की हद तक चली गई है… हम इस गठजोड़ के सहयोगी बनने के स्तर तक गिर गए हैं.” विजयन ने कहा, ”आज हम जो देख रहे हैं वह फलस्तीनी लोगों का नरसंहार है… निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं… अगर हम इस नरसंहार की निंदा नहीं करते हैं तो हम इसमें भागीदार बन रहे हैं.” केरल के मुख्यमंत्री ने तत्काल युद्धविराम का भी आह्वान किया. येचुरी ने दावा किया कि इजराइल का युद्ध हमास के साथ नहीं है, बल्कि यह फलस्तीन के लोगों पर हमला है.
उन्होंने कहा, ”हमारी पार्टी का मानना है कि इजराइल द्वारा की जा रही बर्बरता को रोका जाना चाहिए. संयुक्त राष्ट्र महासभा में 120 देशों ने मानवीय आधार पर युद्धविराम के पक्ष में मतदान किया है. अब तक 8,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, इनमें आधे से ज्यादा बच्चे हैं. हम इस बर्बरता को स्वीकार नहीं कर सकते.” उन्होंने द्वि-राष्ट्र समाधान की भी वकालत की और कहा कि संयुक्त राष्ट्र को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि फलस्तीन राष्ट्र की स्थापना हो और पूर्वी यरुशलम इसकी राजधानी बने.
पार्टी नेता वृंदा करात ने आरोप लगाया, ”इजराइल का हमला किसी आतंकवादी समूह पर नहीं है, यह फलस्तीनी जमीन पर कब्जा करने के लिए किया गया हमला है. इजराइल का दावा है कि वह हमास पर हमला कर रहा है, हम उसे चुनौती देते हैं. वेस्ट बैंक में हमास कहां है? वे वेस्ट बैंक पर भी हमला कर रहे हैं, इससे उनके इरादे स्पष्ट हो जाते हैं.” उन्होंने दावा किया, ”संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत की अनुपस्थिति भारत के लोगों की आवाज नहीं है. मोदी सरकार ने इतिहास को किनारे रख दिया है और अमेरिका के अधीनस्थ सहयोगी के रूप में काम कर रही है.”