दिल्ली: 11 नवंबर तक रैली-प्रदर्शन पर रोक की मांग, सीटीआई ने पुलिस कमिश्नर को लिखा पत्र, 14 हजार करोड़ के नुकसान का दावा

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री का दावा- 1 नवंबर की रामलीला मैदान रैली से एक दिन में करीब 11 हजार करोड़ का कारोबारी नुकसान
Author: www.navabharat.news
UPDATED: Tue, 03 Nov 2026 12:34 PM
दिल्ली: 11 नवंबर तक रैली-प्रदर्शन पर रोक की मांग, सीटीआई ने पुलिस कमिश्नर को लिखा पत्र, 14 हजार करोड़ के नुकसान का दावा
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दिल्ली: चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर मांग की है कि 11 नवंबर को भैया दूज तक सेंट्रल दिल्ली और पुरानी दिल्ली में किसी भी रैली, धरना या विरोध मार्च की अनुमति न दी जाए। संगठन ने खास तौर पर कनॉट प्लेस, जंतर-मंतर, रामलीला मैदान, इंडिया गेट, राजघाट और दिल्ली गेट इलाकों का नाम लिया है।

अक्तूबर में 14 हजार करोड़ के नुकसान का दावा

सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार लगातार हो रहे प्रदर्शनों और उनसे लगने वाले जाम के कारण व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। संगठन का दावा है कि 1 अक्तूबर से 1 नवंबर के बीच दिल्ली के कारोबार को करीब 14 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

सीटीआई के मुताबिक अक्तूबर में जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस, पटेल चौक और जनपथ के आसपास लगातार रैलियों से सेंट्रल दिल्ली का यातायात प्रभावित रहा। संगठन का दावा है कि 1 से 30 अक्तूबर के बीच कनॉट प्लेस, जनपथ, पालिका बाजार, खान मार्केट, करोलबाग, पहाड़गंज और कमला मार्केट जैसे बाजारों के खुदरा कारोबार, होटल, रेस्तरां और परिवहन क्षेत्र को करीब 3 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

एक रैली से 11 हजार करोड़ के नुकसान का अनुमान

सीटीआई का कहना है कि 1 नवंबर को रामलीला मैदान में हुई एक बड़ी रैली से कई प्रमुख बाजारों में कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ। संगठन ने उस एक दिन में करीब 11 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है, जिसमें खुदरा और थोक व्यापार का हिस्सा लगभग 8,800 करोड़ रुपये बताया गया है।

संगठन के अनुसार रामलीला मैदान के पांच किलोमीटर के दायरे में करीब तीन लाख दुकानें हैं, जिनमें कश्मीरी गेट, चांदनी चौक, सदर बाजार, दरियागंज, पहाड़गंज, कनॉट प्लेस और करोलबाग जैसे बड़े बाजार शामिल हैं। दावा है कि रैली के दिन करीब 2.5 लाख दुकानें पूरी तरह बंद रहीं और लगभग 80 प्रतिशत व्यावसायिक गतिविधियां ठप हो गईं। सीटीआई के अनुसार आसपास के करीब 100 शहरों और कस्बों से खरीदारी के लिए आने वाले 3 से 4 लाख ग्राहक भी प्रभावित हुए।

अन्य क्षेत्रों पर असर का दावा

  • ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स: करीब 1,500 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान। संगठन के मुताबिक रामलीला मैदान के 10 किलोमीटर के दायरे में वाहनों की आवाजाही और माल ढुलाई बुरी तरह प्रभावित हुई।
  • होटल-रेस्तरां और पर्यटन: करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान। कनॉट प्लेस, करोलबाग, पहाड़गंज, चांदनी चौक और दरियागंज में दो हजार से अधिक प्रतिष्ठानों की बुकिंग रद्द होने का दावा।
  • असंगठित क्षेत्र और दिहाड़ी मजदूर: करीब 200 करोड़ रुपये की आर्थिक चोट। संगठन के अनुसार करीब 20 लाख कर्मचारियों, लोडरों, ऑटो और ई-रिक्शा चालकों, रेहड़ी-पटरी वालों की एक दिन की कमाई प्रभावित हुई।

त्योहारों के पीक सीजन की चिंता

बृजेश गोयल ने कहा कि 6 नवंबर को धनतेरस, 8 नवंबर को दिवाली और 11 नवंबर को भैया दूज है, इसलिए अगले दस दिन दिल्ली के कारोबारियों के लिए बेहद अहम हैं। उनके मुताबिक दिल्ली के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से करीब 20 लाख व्यापारी और 75 लाख कर्मचारी जुड़े हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस दौरान रैलियां और प्रदर्शन जारी रहे तो त्योहारी कारोबार पर असर पड़ेगा और व्यापारियों के लिए नुकसान सहना मुश्किल होगा।

पुलिस कमिश्नर के सामने तीन मांगें

  1. 11 नवंबर तक रोक: कनॉट प्लेस, जंतर-मंतर, रामलीला मैदान और इंडिया गेट समेत सेंट्रल दिल्ली के प्रमुख इलाकों में रैली, धरना और विरोध-प्रदर्शन की अनुमति न दी जाए।
  2. वैकल्पिक स्थान तय हों: रैलियों और प्रदर्शनों के लिए बुराड़ी, अलीपुर, जसोला और यमुना खादर जैसे स्थान निर्धारित किए जाएं।
  3. ट्रैफिक और पार्किंग की व्यवस्था: त्योहारों के पूरे सीजन में सेंट्रल दिल्ली के बाजारों में यातायात सुचारू रहे और पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था हो।

नुकसान के आंकड़ों पर बहस

नुकसान के ये आंकड़े सीटीआई के दावे और अनुमान हैं। इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी हुई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इन दावों को भाजपा का प्रोपेगेंडा बताया है और कहा है कि बाजारों में जमकर खरीदारी हुई।

नोट: खबर में दिए गए नुकसान के आंकड़े सीटीआई के दावों पर आधारित हैं, इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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