मृत्यु अटल सत्य है, मायने यह रखता है कि जिंदगी कैसे जी गयी: प्रधानमंत्री मोदी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 16 Mar 2025 10:31 PM
मृत्यु अटल सत्य है, मायने यह रखता है कि जिंदगी कैसे जी गयी: प्रधानमंत्री मोदी
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि मृत्यु अटल सत्य है और असल में मायने यह रखता है कि जिंदगी कैसे जी गयी है. पॉडकास्टर लेक्स फ्रीडमैन के साथ एक पॉडकास्ट में मोदी ने कहा कि मृत्यु को लेकर चिंता करने के बजाय जीवन को गले लगाना चाहिए.

यह पूछे जाने पर कि क्या वह मृत्यु से डरते हैं, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”हम निश्चित रूप से जानते हैं कि जो जन्म लेता है, उसकी मृत्यु तय है. इसके बावजूद जीवन का फलना-फूलना तय है.” उन्होंने कहा, ”जो चीज निश्चित है, उसका डर क्यों? इसीलिए आपको मौत पर चिंता करने के बजाय जीवन को गले लगाना चाहिए. इसी तरह जीवन विकसित और समृद्ध होगा.” प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से आग्रह किया कि वे चिंता में समय बर्बाद न करें, बल्कि अपनी ऊर्जा अपने जीवन को समृद्ध बनाने और दुनिया में सकारात्मक योगदान देने में लगाएं.

मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि क्योंकि जीवन अनिश्चित है, इसलिए हर पल को उद्देश्यपूर्ण, सीखते हुए और बदलाव लाने वाले तरीके से व्यतीत किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, ”आपको अपने जीवन को समृद्ध और उन्नत करने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए ताकि आप मृत्यु के आने से पहले पूरी तरह से और उद्देश्यपूर्ण जीवन जी सकें… आपको मृत्यु के भय को छोड़ देना चाहिए.” उन्होंने कहा, ”आखिरकार, मृत्यु अवश्यंभावी है और यह चिंता करने का कोई फायदा नहीं है कि यह कब आएगी.”

प्रधानमंत्री ने निर्वाचन आयोग की सराहना की, कहा- वैश्विक समुदाय को इसके कामकाज का अध्ययन करना चाहिए

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के ”तटस्थ और स्वतंत्र” निर्वाचन आयोग की सराहना की और कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उसके द्वारा किये जाने वाले प्रबंधन का वैश्विक समुदाय को अध्ययन करना चाहिए. पॉडकास्टर लेक्स फ्रीडमैन के साथ एक पॉडकास्ट में मोदी ने भारत की चुनावी प्रक्रिया के व्यापक पैमाने पर प्रकाश डाला और इसकी जटिलता तथा नागरिकों के बीच उच्च स्तर की राजनीतिक भागीदारी पर जोर दिया.

मोदी ने कहा, ”भारत में, हमारे पास एक तटस्थ और स्वतंत्र निर्वाचन आयोग है, जो चुनाव कराता है और सभी निर्णय लेता है. यह अपने आप में इतनी बड़ी सफल कहानी है कि दुनियाभर के प्रमुख विश्वविद्यालयों को इसके प्रबंधन पर अध्ययन करना चाहिए.” उन्होंने कहा कि वैश्विक समुदाय को भारत की चुनाव प्रणाली के पैमाने और राजनीतिक जागरूकता को देखते हुए इसका विश्लेषण करना चाहिए.

फ्रीडमैन ने कहा कि भारत में चुनाव कई दिलचस्प पहलू सामने लाते हैं और उन्होंने पूछा कि क्या ऐसी कोई कहानी है, जो मोदी को विशेष रूप से प्रभावशाली लगी हो. वर्ष 2024 के आम चुनाव का जिक्र करते हुए मोदी ने बताया कि 98 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं – जो उत्तरी अमेरिका की जनसंख्या से दोगुने से भी अधिक और यूरोपीय संघ की संयुक्त आबादी से भी अधिक है.

प्रधानमंत्री ने कहा, ”98 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से 64.6 करोड़ मतदाता मतदान करने के लिए अपने घरों से बाहर निकले, यहां तक ??कि मई की भीषण गर्मी में भी जब कुछ स्थानों पर तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था.” मोदी ने बताया कि देशभर में 10 लाख से अधिक मतदान केंद्र बनाये गये और 2,500 से अधिक राजनीतिक दलों ने इसमें हिस्सा लिया.

उन्होंने लोकतंत्र को मजबूत बनाने में मीडिया की भूमिका का भी उल्लेख किया, जिसमें 900 से अधिक टीवी चैनल और 5,000 समाचार पत्र इस प्रक्रिया में योगदान दे रहे हैं. मोदी ने कहा, ”हमारे देश के सबसे गरीब नागरिकों ने भी तेजी से प्रौद्योगिकी को अपना लिया है, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के माध्यम से मतदान किया है और हम एक ही दिन में परिणाम घोषित करने में सक्षम हैं.” उन्होंने मतदाता भागीदारी और चुनावी पारर्दिशता में सुधार के लिए निरंतर प्रयासों के माध्यम से लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया.

एआई शक्तिशाली है, पर मानव कल्पनाशीलता की जगह नहीं ले सकती : प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शक्तिशाली है, लेकिन यह कभी भी मानव कल्पनाशीलता की जगह नहीं ले सकती. उन्होंने कहा कि दुनिया चाहे एआई के साथ कुछ भी कर ले, लेकिन भारत के बिना यह अधूरी रहेगी. रविवार को लेक्स फ्रीडमैन के साथ एक पॉडकास्ट में मोदी ने कहा कि वास्तविक मानवीय बुद्धिमत्ता के बिना, कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) विकसित नहीं हो सकती या स्थायी रूप से प्रगति नहीं कर सकती.

प्रधानमंत्री ने कहा, “यह सही है कि हर युग में प्रौद्योगिकी और मानवता के बीच प्रतिस्पर्धा का माहौल बना. कई बार इसे संघर्ष के रूप में भी चित्रित किया गया. अक्सर ऐसा दर्शाया गया, मानो प्रौद्योगिकी मानव अस्तित्व को ही चुनौती दे देगी.” उन्होंने कहा, “लेकिन हर बार, जैसे-जैसे प्रौद्योगिकी आगे बढ़ी, मनुष्य ने खुद को (उसके मुताबिक) ढाल लिया और एक कदम आगे रहा. हमेशा से ऐसा ही होता आया है. आखिरकार, यह मनुष्य ही है जो अपने लाभ के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के सर्वोत्तम तरीके खोजता है.” मोदी ने यह भी कहा कि उनका मानना ??है कि एआई के साथ, “मनुष्य अब यह सोचने के लिए मजबूर हो रहा है कि मानव होने का सही अर्थ क्या है”.

उन्होंने कहा, “यह एआई की असली ताकत है. एआई के काम करने के तरीके की वजह से, इसने हमारे काम को देखने के तरीके को चुनौती दी है. लेकिन मानवीय कल्पना ही ईंधन है. एआई इसके आधार पर कई चीजें बना सकता है और भविष्य में, यह और भी अधिक हासिल कर सकता है. फिर भी, मेरा दृढ़ विश्वास है कि कोई भी प्रौद्योगिकी मानव मस्तिष्क की असीम रचनात्मकता और कल्पनाशीलता की जगह नहीं ले सकती.” एआई के विकास को मूलत? एक सहयोग बताते हुए प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह भारत के बिना अधूरा रहेगा.

उन्होंने कहा, “दुनिया चाहे एआई के साथ कुछ भी करे, भारत के बिना यह अधूरा ही रहेगा. मैं यह बात बहुत जिम्मेदारी से कह रहा हूं. मेरा मानना ??है कि एआई का विकास मूल रूप से सहयोग है. इसमें शामिल सभी लोग साझा अनुभवों और सीख के माध्यम से एक दूसरे का समर्थन करते हैं.” मोदी ने कहा कि भारत सिर्फ सैद्धांतिक एआई मॉडल ही विकसित नहीं कर रहा है, बल्कि वह बहुत विशिष्ट उपयोग के मामलों के लिए एआई-संचालित अनुप्रयोगों पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है और उन्हें क्रियान्वित कर रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) तक पहुंच समाज के हर वर्ग के लिए उपलब्ध हो.

उन्होंने कहा, “हमने इसकी व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पहले से ही एक अद्वितीय बाजार-आधारित मॉडल बनाया है. भारत में मानसिकता में महत्वपूर्ण बदलाव हो रहा है, हालांकि ऐतिहासिक प्रभावों, पारंपरिक सरकारी प्रक्रियाओं या मजबूत सहायक बुनियादी ढांचे की कमी के कारण हम दूसरों से पीछे दिखाई देते हैं.” प्रधानमंत्री मोदी ने 5जी का उदाहरण देते हुए कहा, “शुरू में दुनिया को लगा कि हम बहुत पीछे हैं. लेकिन एक बार जब हमने शुरुआत की, तो हम विश्व में सबसे तेजी से व्यापक 5जी नेटवर्क शुरू करने वाला देश बन गए.”

उन्होंने कहा, “हाल ही में एक अमेरिकी कंपनी के अधिकारी मुझसे मिलने आये और उन्होंने इसी तथ्य के बारे में अपने अनुभव साझा किये. उन्होंने मुझसे कहा कि अगर मैं अमेरिका में इंजीनियरों के लिए विज्ञापन दूं, तो मुझे सिर्फ एक कमरा भरने के लिए ही आवेदक मिलेंगे. लेकिन अगर मैं भारत में ऐसा ही करूं, तो एक फुटबॉल मैदान भी उन्हें रखने के लिए पर्याप्त नहीं होगा.” मोदी ने कहा, “इससे पता चलता है कि भारत के पास असाधारण रूप से विशाल प्रतिभा का भंडार है और यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है.” उन्होंने ने इस बात पर जोर दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मूलत? मानवीय बुद्धिमत्ता द्वारा संचालित, निर्मित और निर्देशित होती है.

प्रधानमंत्री ने कहा, “वास्तविक मानवीय बुद्धिमत्ता के बिना, एआई स्थायी रूप से विकसित या प्रगति नहीं कर सकती. वास्तविक बुद्धिमत्ता भारत के युवाओं और प्रतिभाओं में प्रचुर मात्रा में मौजूद है, और मेरा मानना है कि यह हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं.” उन्होंने कहा, “मनुष्यों में एक-दूसरे का खयाल रखने की जन्मजात क्षमता होती है, एक-दूसरे के बारे में चिंतित होने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है. अब, क्या कोई मुझे बता सकता है कि क्या एआई ऐसा करने में सक्षम है?”

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