पूर्वी एशिया सम्मेलन: मोदी ने संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता के लिए संयुक्त प्रयास की वकालत की

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 07 Sep 2023 09:37 PM
पूर्वी एशिया सम्मेलन: मोदी ने संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता के लिए संयुक्त प्रयास की वकालत की
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जकार्ता. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को मजबूत करने के लिए संयुक्त प्रयास किये जाने का बृहस्पतिवार को आह्वान किया. मोदी ने पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का मानना है कि दक्षिण चीन सागर के लिए आचार संहिता प्रभावी होनी चाहिए और यह संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस) के अनुरूप होनी चाहिए.

प्रधानमंत्री ने भूराजनीतिक संघर्षों का उल्लेख करते हुए दोहराया कि “आज का युग युद्ध का नहीं है” और संवाद एवं कूटनीति ही संघर्षों के समाधान का एकमात्र रास्ता है. मोदी ने कहा कि आतंकवाद, अतिवाद और भूराजनीतिक संघर्ष “हम सभी” के लिए “बड़ी चुनौतियां” हैं और वर्तमान वैश्विक परिदृश्य चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और अनिश्चितताओं से घिरा हुआ है.

उन्होंने कहा, ”अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पूरी तरह से पालन करना अनिवार्य है और सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को मजबूत करने के लिए सभी की प्रतिबद्धता और संयुक्त प्रयास भी आवश्यक हैं.” मोदी ने कहा, ”जैसा कि मैंने पहले कहा है – आज का युग युद्ध का नहीं है. समाधान का एकमात्र रास्ता संवाद और कूटनीति है.” पिछले साल 16 सितंबर को उज्बेकिस्तानी शहर समरकंद में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक में मोदी ने कहा था, ”आज का युग युद्ध का नहीं है” और रूसी नेता को यूक्रेन संघर्ष समाप्त करने के लिए प्रेरित किया.

रक्षा और सुरक्षा से संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन एशिया-प्रशांत क्षेत्र का प्रमुख मंच है. वर्ष 2005 में गठन के बाद से, इसने पूर्वी एशिया के रणनीतिक, भू-राजनीतिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है. आसियान (दक्षिण पूर्व एशियाई देशों का संगठन) के सदस्य देशों के अलावा, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भारत, चीन, जापान, कोरिया गणराज्य, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अमेरिका और रूस शामिल हैं.

मोदी की टिप्पणी दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ.ती सैन्य आक्रामकता को लेकर वैश्विक चिंताओं के बीच आयी है. कुछ दिन पहले, मलेशिया, वियतनाम और फिलीपीन जैसे आसियान के कई सदस्य देशों ने ‘चीन के मानक मानचित्र’ के नवीनतम संस्करण में दक्षिण चीन सागर पर बीजिंग के क्षेत्रीय दावे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी.

बीजिंग ने गत 28 अगस्त को ‘चीन के मानक मानचित्र’ का 2023 संस्करण जारी किया था जिसमें ताइवान, दक्षिण चीन सागर, अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चीन को चीनी क्षेत्रों के रूप में शामिल किया गया है. भारत ने ‘मानचित्र’ को खारिज कर दिया है और इसे लेकर चीन के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है. आसियान देश दक्षिण चीन सागर पर एक बाध्यकारी आचार संहिता (सीओसी) पर जोर दे रहे हैं.

मोदी ने कहा, ”समय की मांग एक ऐसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की है जहां यूएनसीएलओएस सहित अंतरराष्ट्रीय कानून सभी देशों पर समान रूप से लागू हो. जहां नौ परिवहन और उड़ान की स्वतंत्रता हो और जहां सभी के लाभ के लिए बेरोकटोक वैध व्यापार हो.” उन्होंने कहा, ”भारत का मानना है कि दक्षिण चीन सागर के लिए आचार संहिता प्रभावी होनी चाहिए, यूएनसीएलओएस के अनुरूप होनी चाहिए और इसमें उन देशों के हितों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए जो चर्चा का हिस्सा नहीं हैं.” मोदी ने कहा कि म्यांमा में भारत की नीति आसियान के विचारों को ध्यान में रखती है. म्यांमा में फरवरी 2021 में सेना द्वारा तख्तापलट करके सत्ता पर काबिज होने के बाद से म्यांमा अंतरराष्ट्रीय संवीक्षा में है.

प्रधानमंत्री ने कहा, ”साथ ही, एक पड़ोसी देश के रूप में, सीमाओं पर शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा भारत-आसियान सम्पर्क को बढ.ाने पर भी हमारा जोर है. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि हम सभी के हित में है.” विकासशील देशों के सामने आने वाली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और ऊर्जा से संबंधित चुनौतियां, विशेष रूप से ‘ग्लोबल साउथ’ को प्रभावित कर रही हैं.

उन्होंने कहा, ”जी20 की हमारी अध्यक्षता के दौरान हम ग्लोबल साउथ से जुड़े इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.” पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के अंत में जारी एक बयान में कहा गया कि नेताओं ने एक खुले, पारदर्शी और समावेशी क्षेत्रीय ढांचे को मजबूत करने के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहरायी जो अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित हो तथा आसियान केंद्र में हो.

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