कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने कथित तौर पर बुजुर्गों को ठगने से संबंधित एक मामले में पूछताछ के लिए पार्टी की सांसद और अभिनेत्री नुसरत जहां को जारी प्रवर्तन निदेशालय के समन की आलोचना की है. टीएमसी ने इसे आगामी लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी की छवि खराब करने के लिए एक “प्रतिशोधपूर्वक” कदम बताया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस आरोप को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और टीएमसी की “घबराहट भरी प्रतिक्रिया” पर सवाल उठाया.
टीएमसी नेता और राज्य के संसदीय कार्य मंत्री सोवनदेब चट्टोपाध्याय ने कहा, ह्लयह लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा की प्रतिशोध की राजनीति है. वे हम पर और अन्य विपक्षी दलों पर आरोप लगाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं. यह समन चुनाव से पहले हमारी छवि खराब करने का एक और प्रयास है.ह्व जहां ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वह “जांच में सहयोग करेंगी”. पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदू अधिकारी ने प्रतिशोध की राजनीति के आरोपों को निराधार करार दिया.
उन्होंने कहा, ह्लजब भी ईडी या सीबीआई टीएमसी नेताओं को बुलाती है, तो वे प्रतिशोध की राजनीति पर बात करने लगते हैं. लेकिन वास्तव में, टीएमसी भ्रष्टाचार में गहराई तक डूबी हुई है, और एक भी नेता ऐसा नहीं है जिसके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप न हों. अगर उन्होंने कोई गलती नहीं की है तो वे ईडी या सीबीआई के समन से क्यों डरते हैं.ह्व जहां को शहर के न्यू टाउन में फ्लैट देने का वादा करके वरिष्ठ नागरिकों को कथित तौर पर ठगने के मामले में पूछताछ के लिए 12 सितंबर को यहां केंद्रीय एजेंसी के सामने पेश होने के लिए कहा गया है.
ईडी की जांच बुजुर्गों के एक समूह की हाल की शिकायत से संबंधित है. इस समूह ने एक रीयल एस्टेट कंपनी पर न्यू टाउन इलाके में फ्लैट का वादा कर इन लोगों को ठगने का आरोप लगाया है. नुसरत जहां (33) ने संवाददाता सम्मेलन किया था और यह कहते हुए किसी भी धोखाधड़ी गतिविधि में शामिल होने से इनकार किया था कि उन्होंने मार्च, 2017 में ही कंपनी के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था. बशीरहाट से तृणमूल की लोकसभा सदस्य नुसरत जहां ने कहा था कि उन्होंने कंपनी से ऋण लिया था जिसे उन्होंने मई, 2017 में ब्याज समेत चुका दिया था.