मोर्चा की जरूरत न पड़े, यह सुनिश्चित करने के लिये प्रयास जारी : अजित पवार ने हिंदी भाषा विवाद पर कहा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 29 Jun 2025 10:31 PM
मोर्चा की जरूरत न पड़े, यह सुनिश्चित करने के लिये प्रयास जारी : अजित पवार ने हिंदी भाषा विवाद पर कहा
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मुंबई/ठाणे. महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने रविवार को कहा कि ‘त्रि-भाषा’ नीति के खिलाफ पांच जुलाई को ‘मोर्चा’ आयोजित करने की जरूरत न पड़े, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं. राज्य विधानमंडल के मानसून सत्र की पूर्व संध्या पर स्कूलों में पहली कक्षा से हिंदी भाषा को ”थोपने” के खिलाफ विपक्ष के विरोध के बीच अजित पवार का यह आश्वासन आया है.

शिवसेना (उबाठा) अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने हिंदी ”थोपे जाने” के खिलाफ मुंबई में एक ‘मोर्चा’ आयोजित  करने की घोषणा की है. सरकार ने 17 जून को एक आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया है कि मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों को हिंदी ”सामान्य रूप से” तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाई जाएगी. राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि हिंदी भाषा छात्रों के लिए अनिवार्य नहीं है और भाषा को ”थोपे जाने” के विपक्ष के आरोप को खारिज कर दिया.

अजित पवार ने पत्रकारों को विस्तार से बताए बिना कहा, ”यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं कि मोर्चा निकालने की आवश्यकता न पड़े.” राकांपा प्रमुख ने पहली कक्षा के बजाय पांचवीं कक्षा से हिंदी भाषा पढ़ाने की बात दोहराई. उन्होंने कहा, ”प्राथमिक स्कूल के छात्रों के लिए मराठी और अंग्रेजी भाषा (सीखना) अनिवार्य किया जाना चाहिए. जो लोग मराठी पढ़ना और लिखना जानते हैं, वे तेजी से हिंदी सीख सकते हैं.” अजित पवार के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि सरकार में कोई तो है, जो इसका विरोध करने की हिम्मत दिखा रहा है, और हर कोई ”गुलाम नहीं बन गया है.” ठाकरे ने कहा, ”उन्हें (सरकार को) मोर्चा निकालने की जरूरत समझ में नहीं आई. मराठी के साथ अन्याय हो रहा है. अजित पवार को भी यह बताना चाहिए कि बिना उचित अध्ययन किए यह फैसला क्यों थोपा गया.”

शिंदे ने शिवसेना(उबाठा)-मनसे की करीबी को लेकर उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने रविवार को शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर उनकी पार्टी की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के साथ बढ़ती नजदीकी को लेकर परोक्ष हमला किया. मनसे का नेतृत्व उद्धव के चचेरे भाई राज ठाकरे करते हैं. शिवसेना प्रमुख शिंदे यहां शिवसेना (उबाठा) के पूर्व नासिक प्रमुख विलास शिंदे, 30 सरपंचों और कई पूर्व पार्षदों का पार्टी में स्वागत करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.

शिंदे ने कहा, ”एक नेता (उद्धव) उस पार्टी (मनसे) से संपर्क कर रहे हैं, जिसे उन्होंने अतीत में बुरी तरह कोसा था. उनकी पार्टी में हाल के दिनों में बड़े पैमाने पर दलबदल देखने को मिला है.” गत करीब दो दशक से अलग-अलग राह पर चल रहे चचेरे भाई उद्धव और राज ठाकरे ने कहा था कि वे मराठी भाषा के मुद्दे पर एकजुट होंगे, क्योंकि उनके दल हिंदी को ”थोपने” और कक्षा 1-5 के लिए राज्य सरकार के त्रि-भाषा फार्मूले के खिलाफ पांच जुलाई को संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन करेंगे.

शिंदे ने यह भी विश्वास जताया कि उनकी पार्टी महाराष्ट्र के आगामी नगर निगम चुनावों में नासिक में जीत हासिल करेगी.
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अविभाजित शिवसेना ने 2019 में महा विकास आघाडी (एमवीए)के बैनर तले कांग्रेस से हाथ मिलाकर अपने संस्थापक बाल ठाकरे और हिंदुत्व को धोखा दिया. शिंदे ने 2022 में उद्धव के नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह किया था और पार्टी को विभाजित कर दिया और बाद में पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न उन्हें प्राप्त हुआ. उन्होंने कहा कि पूर्व पहलवान चंद्रहार पाटिल ने शिवसेना (उबाठा)के टिकट पर सांगली से लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन असफल रहे थे और हाल ही में शिवसेना में शामिल हुए हैं, तथा 5,000 अन्य लोग घाटी में सैनिकों के लिए रक्तदान करने के लिए कश्मीर का दौरा करेंगे.

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