कच्चातिवु द्वीप मामले के संबंध में विदेश मंत्री जयशंकर अपना बयान दे चुके हैं: विदेश मंत्रालय

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 04 Apr 2024 11:17 PM
कच्चातिवु द्वीप मामले के संबंध में विदेश मंत्री जयशंकर अपना बयान दे चुके हैं: विदेश मंत्रालय
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नयी दिल्ली. विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कच्चातिवु द्वीप को लेकर जारी विवाद को लेकर कहा कि विदेश मंत्री इस संबंध में पहले ही अपना बयान दे चुके हैं. कच्चातिवु मुद्दे पर सवालों के संबंध में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मामले पर विदेश मंत्री एस जयशंकर की हाल की टिप्पणियों का जिक्र किया.

उन्होंने कहा, ”मैं आपको बताना चाहूंगा कि जो मुद्दे उठाए गए हैं, उन पर विदेश मंत्री ने दिल्ली में और गुजरात में भी प्रेस से बात की है और सभी मुद्दों पर स्पष्टीकरण दिया है.” जायसवाल ने कहा, ”मैं कहूंगा कि आप कृपया उनकी प्रेस वार्ता देखें. आपको अपने जवाब वहां मिल जाएंगे.” नरेन्द्र मोदी सरकार ने कांग्रेस और उसकी सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) पर 1970 के दशक के मध्य में कच्चातिवु द्वीप के श्रीलंका को कब्जे में लेने के मामले में राष्ट्रीय हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए निशाना साधा है.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को दावा किया था कि कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों ने कच्चातिवु द्वीप को लेकर उदासीनता दिखायी जैसे उन्हें कोई परवाह नहीं हो और भारतीय मछुआरों के अधिकारों को छोड़ दिया जबकि कानूनी राय इसके खिलाफ थी. जयशंकर ने संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी जैसे प्रधानमंत्रियों ने कच्चातिवु को एक ”छोटा द्वीप” और ”छोटी चट्टान” बताया था. उन्होंने कहा था कि यह मुद्दा अचानक सामने नहीं आया है बल्कि यह हमेशा से एक जीवंत मुद्दा रहा है.

जयशंकर ने कहा था कि इसके रिकॉर्ड मौजूद हैं कि तत्कालीन विदेश सचिव ने तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं द्रमुक के नेता एम करुणानिधि को दोनों देशों के बीच हुई बातचीत की पूरी जानकारी दी थी. उन्होंने क्षेत्रीय दल द्रमुक पर कांग्रेस के साथ 1974 में और उसके बाद एक ऐसी स्थिति उत्पन्न करने के लिए मिलीभगत करने का आरोप लगाया था जो “बड़ी चिंता” का कारण है.

विश्व हिंदू परिषद ने कच्चातिवु द्वीप को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने कच्चातिवु मुद्दे को लेकर बृहस्पतिवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि 1974 में इंदिरा गांधी सरकार का यह द्वीप श्रीलंका को सौंपना भारतीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से विश्वासघात था.
विदेश मंत्री और भाजपा नेता एस. जयशंकर ने एक अप्रैल को दावा किया था कि कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्रियों ने कच्चातिवु द्वीप के प्रति उदासीनता दिखाई.

विहिप ने कहा कि उसे उम्मीद है कि भारत के “देशभक्त व राष्ट्रवादी” लोग ऐसी सरकार चुनेंगे जो पड़ोसी देशों के “कब्जे वाले” अन्य भारतीय क्षेत्रों के साथ-साथ द्वीप को भी वापस ला सके. विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने एक बयान में आरोप लगाया कि कच्चातिवु द्वीप को श्रीलंका को सौंपने का इंदिरा गांधी सरकार का फैसला “मनमाना और असंवैधानिक” था.

उन्होंने कहा, “यह भारत की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और संसद, तमिलनाडु विधानसभा तथा हमारे लाखों मछुआरों के साथ विश्वासघात था. विश्व हिंदू परिषद भारत की संप्रभुता और अखंडता के प्रति तत्कालीन कांग्रेस सरकारों की घोर लापरवाही और उदासीनता के लिए उनकी कड़ी निंदा करती है.ह्व

भारत ने इजराइल से सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया

भारत ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने इजराइल से उन भारतीय निर्माण श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है जो द्विपक्षीय गतिशीलता समझौते के तहत इस सप्ताह वहां गए हैं. भारत में इजराइली राजदूत नाओर गिलोन ने मंगलवार को कहा कि 60 से अधिक भारतीय निर्माण श्रमिकों का पहला जत्था इजराइल के लिए रवाना हो गया है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संवाददाताओं से कहा, “जैसा कि आप जानते हैं, ये (पहला जत्था) कर्मचारी एक गतिशीलता समझौते के तहत इजराइल गए हैं, जिस पर हमने देश के साथ हस्ताक्षर किए हैं.” उन्होंने कहा, “हम उनकी सुरक्षा के प्रति सचेत हैं. हमने इजराइली अधिकारियों से उनकी सुरक्षा और कुशलक्षेम सुनिश्चित करने का आग्रह किया है.” जायसवाल ने कहा कि लगभग 18 हजार भारतीय देखभालकर्ता वर्तमान में इजराइल में कार्यरत हैं और वहां भारतीय दूतावास उनके संपर्क में है.

इजराइल-हमास संघर्ष के बाद, मीडिया में ऐसी खबरें थीं कि इजराइली निर्माण उद्योग 90 हजार फलस्तीनियों के स्थान पर एक लाख भारतीय श्रमिकों की भर्ती करने पर विचार कर रहा है. पिछले महीने, भारत ने कहा था कि वह कथित तौर पर हिजबुल्ला द्वारा किए गए मिसाइल हमले में एक भारतीय की मौत के मद्देनजर इजराइल में अपने सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है.

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से व्यथित है भारत: विदेश मंत्रालय

भारत ने तीन दिन पहले सीरिया की राजधानी दमिश्क में ईरानी राजनयिक परिसर पर हुए घातक हमले पर बृहस्पतिवार को चिंता व्यक्त की और कहा कि वह पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से व्यथित है. ईरान ने एक अप्रैल को हुए इस हमले के लिए इज.राइल को जिम्मेदार बताया और कहा कि इसका बदला लिया जाएगा. ईरानी मीडिया के अनुसार, हमले में दो जनरल सहित सात रिवोल्यूशनरी गार्ड कर्मी मारे गए.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ”हमने एक अप्रैल को सीरिया में ईरानी राजनयिक परिसर पर हुए हमले पर चिंता व्यक्त की है. भारत पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और आगे हिंसा तथा अस्थिरता को बढ़ावा देने की इसकी क्षमता को लेकर व्यथित है.” उन्होंने कहा, “हम सभी पक्षों से ऐसे कार्यों से बचने का आग्रह करते हैं जो आम तौर पर स्वीकृत सिद्धांतों और अंतरराष्ट्रीय कानून के मानदंडों के विपरीत हैं.” जायसवाल की टिप्पणी हमले के संबंध में एक सवाल के जवाब में आई.

यह हमला गाजा में इजराइल के जारी सैन्य अभियान के बीच हुआ. पिछले साल सात अक्टूबर को हमास द्वारा इजराइली शहरों पर किए गए अभूतपूर्व हमले के जवाब में गाजा में इजराइल अपना सैन्य आक्रमण जारी रखे हुए है. हमास ने सात अक्टूबर को इज.राइल में लगभग 1,200 लोगों को मार डाला था और 220 से अधिक लोगों का अपहरण कर लिया था, जिनमें से कुछ को संक्षिप्त युद्धविराम के दौरान रिहा कर दिया गया. गाजा में हमास के अधिकारियों के अनुसार, इजराइल के हमले में गाजा में 30 हजार से अधिक लोग मारे गए हैं.

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