सरकार को मणिपुर के मुद्दे पर चर्चा से डर नहीं, जनता का खौफ करे विपक्ष: अमित शाह

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 25 Jul 2023 08:23 PM
सरकार को मणिपुर के मुद्दे पर चर्चा से डर नहीं, जनता का खौफ करे विपक्ष: अमित शाह
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नयी दिल्ली. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में पिछले कुछ दिनों से जारी गतिरोध के बीच मंगलवार को विपक्षी दलों का एक बार फिर से आ”ान किया कि वे मणिपुर जैसे संवेदनशील विषय’ पर चर्चा करें क्योंकि ‘देश के लोग उन्हें देख रहे हैं और वे जनता का खौफ करें.’ शाह ने राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी को पत्र लिखकर यह भी कहा कि वे मणिपुर के मुद्दे पर चर्चा में ‘अमूल्य सहयोग’ दें.

गृह एवं सहकारिता मंत्री ने निचले सदन में बहु राज्य सहकारी समितियां संशोधन विधेयक 2022 पर हुई संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए मणिपुर के विषय का उल्लेख किया और बताया कि उन्होंने इस संदर्भ में लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के दोनों नेताओं को पत्र लिखा है. शाह ने यह भी कहा कि सरकार को मणिपुर पर चर्चा से कोई डर नहीं है और उसे कुछ छिपाना भी नहीं है.

उन्होंने विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के बीच कहा, ”मैंने आज दोनों सदन के विपक्ष के नेता को पत्र लिखा है कि कितनी भी लंबी चर्चा के लिए मैं तैयार हूं. सरकार को कोई डर नहीं है, जिसको चर्चा करनी है वो चर्चा करने आए. हमें कुछ छिपाना नहीं है.” गृह मंत्री ने विपक्षी सदस्यों के लिए कहा, ”जनता आपको देख रही है, चुनाव में जाना है. जनता के खौफ को ध्यान में रखें. आपसे विनती है कि मणिपुर जैसे संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा के लिए सदन में उचित माहौल बनाइए.”

खरगे और चौधरी को लिखे पत्रों में शाह ने कहा कि सरकार मणिपुर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और उन्होंने सभी से पार्टी की विचारधारा से ऊपर उठकर सहयोग करने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा, ”मुझे उम्मीद है कि सभी दल इस महत्वपूर्ण मुद्दे को हल करने में सहयोग करेंगे.” मणिपुर के मुद्दे पर संसद में जारी गतिरोध के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को भी लोकसभा में कहा था कि सरकार इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा को तैयार है और विपक्ष से आग्रह है कि वे चर्चा होने दें और सच्चाई सामने आने दें.

कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के अन्य घटक दल मानसून सत्र के पहले दिन से ही मणिपुर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से संसद में वक्तव्य देने और चर्चा की मांग कर रहे हैं. इस मुद्दे पर हंगामे के कारण संसद के मानसून सत्र के पहले चार दिन दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई.

मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाए जाने का वीडियो गत बुधवार, 19 जुलाई, को सामने आने के बाद राज्य के पहाड़ी क्षेत्र में तनाव व्याप्त हो गया. अधिकारियों ने बताया कि यह वीडियो चार मई का है. मणिपुर में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की बहुसंख्यक मेइती समुदाय की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में तीन मई को ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद राज्य में भड़की जातीय हिंसा में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

सरकार दीपावली तक देश में नयी सहकारी नीति लेकर आएगी : अमित शाह

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि सरकार दीपावली तक देश में नयी सहकारी नीति लेकर आयेगी जो आने वाले 25 वर्षों के लिए सहकारिता का मानचित्र प्रस्तुत करेगी. लोकसभा में मणिपुर के मुद्दे पर नारेबाजी कर रहे विपक्षी दलों के सदस्यों के शोर-शराबे के बीच ‘बहु राज्य सहकारी समितियां संशोधन विधेयक, 2022’ पर हुई संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए सहकारिता मंत्री अमित शाह ने यह बात कही.

उन्होंने कहा, ” वर्ष 2003 के बाद से देश में कोई सहकारी नीति नहीं आई. मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि विजयादशमी या ज्यादा से ज्यादा दीपावली तक हम नयी सहकारी नीति लेकर आएंगे.” शाह ने कहा कि यह नयी सहकारी नीति आने वाले 25 वर्षों के सहकारिता का मानचित्र देश और दुनिया के समक्ष प्रस्तुत करेगी.

सहकारिता मंत्री ने यह भी कहा कि देश में सहकारी संस्थानों से जुड़ा कोई एकीकृत डाटाबेस नहीं था, ऐसे में मौजूदा संस्थानों और जहां पर सहकारी संस्थान नहीं है, उनका एक राष्ट्रीय डाटाबेस तैयार करने का काम शुरू हो गया है. उन्होंने बताया कि इसका 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है और विजयादशमी के दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों इसे ऑनलाइन जारी किया जायेगा.

सहकारिता मंत्री अमित शाह के जवाब के बाद सदन ने शोर-शराबे के बीच ही ध्वनिमत से ‘बहु राज्य सहकारी समितियां संशोधन विधेयक, 2022’ को मंजूरी दे दी. विधेयक पर संक्षिप्त चर्चा में हिस्सा लेते हुए भारतीय जनता पार्टी के मनोज कोटक ने कहा कि सहकारिता आंदोलन को नयी दिशा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने एक बड़ा खाका प्रस्तुत किया है जिसमें छोटे किसानों, रेहड़ी पटरी वालों और छोटे व्यवसायियों की चिंता की गई है.

कोटक ने कहा कि यह विधेयक लाने की जरूरत इसलिए आई क्योंकि छोटे गांवों से लेकर कस्बों तक विभिन्न मंडलियों के संचालन के लिए कोई नियमन की व्यवस्था नहीं थी. इसका मकसद सहकारी मंडलियों का सुचारू संचालन सुनिश्चित करना है. चर्चा में हिस्सा लेते हुए वाईएसआर के एन श्रीकृष्णा ने कहा कि सहकारी समितियों का चुनाव संबंधी प्रावधान एक अच्छी पहल है.

बहुजन समाज पार्टी के राम शिरोमणि वर्मा ने कहा कि कुछ राज्यों में सहकारी समितियों में अनियमितताओं, वित्तीय गबन, विवाद, पक्षपातपूर्ण आचरण जैसे कदाचार को रोकने के लिए यह विधेयक महत्वपूर्ण है. भाजपा के संतोष गंगवार ने कहा कि देश के सहकारिता के इतिहास में यह बड़ा कदम है जो परिवर्तनकारी बदलाव लेकर आयेगा.

चर्चा के जवाब में शाह ने सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा, ”मोदी जी ने हर परिवार को एलपीजी गैस सिलिंडर देकर महिलाओं को धुएं से बचाया, हर गरीब के घर में बिजली पहुंचाकर उसे उजाला देने का काम किया. पांच लाख रुपये तक की स्वस्थ्य सुविधाएं मुफ्त कर दीं.” उनका कहना था, ”अब जरूरत है रोजगार देने की. इसमें किसानी और सहकारिता आंदोलन एक प्रमुख जरिया है. सहकारिता आंदोलन को आवाज देने के लिए यह विधेयक बना है.”

सहकारिता मंत्री ने कहा, ”बहु राज्यीय सहकारी संघ केंद्र सरकार का विषय है… इसमें जवाबदेही, पारर्दिशता और मुनाफा बढ.े, इसलिए यह विधेयक लाया गया है.” उन्होंने कहा, ”पहले यह कहा जाता था कि सहकारिता में राजनीतिक हस्तक्षेप होता है. अब हम एक प्रावधान लेकर आए हैं जिसमें निर्वाचन अधिकरण बनाने का प्रावधान है. इससे सरकारी दखल कम हो जाएगा. निर्वाचन अधिकरण के प्रमुख की शक्तियां लगभग चुनाव आयुक्त के बराबर कर दी गई हैं.” शाह ने कहा कि इस विधयक के पारित होने के साथ सहकारिता आंदोलन में बड़े युग का परिवर्तन होगा.

इस विधेयक को 20 दिसंबर, 2022 को संसद की एक संयुक्त समिति के पास भेजा गया था और समिति ने विधेयक के अधिकांश प्रावधानों पर सहमति जताते हुए 15 मार्च, 2023 को अपनी रिपोर्ट पेश की. बहु राज्यीय सहकारिता समिति कानून 1984 में लागू किया गया था. वर्ष 1987 में इस कानून के तहत ट्राइफेड (ट्राइबल को-ऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) को एक राष्ट्रीय स्तर की सहकारी संस्था के रूप में स्थापित किया गया था.

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